सर्वे : बिहार में 71.55 प्रतिशत दलितों को नई मतदाता सूची में नाम हटने का डर

सर्वे : बिहार में 71.55 प्रतिशत दलितों को नई मतदाता सूची में नाम हटने का डर
August 03 18:37 2025

न्यूजक्लिक
NACDAOR-TCM ने बिहार में दलित समुदाय के बीच एक व्यापक सर्वे किया है जिसके अनुसार दलितों में महागठबंधन को बढ़त मिल रही है, लेकिन उन्हें चुनाव आयोग पर बहुत कम भरोसा रह गया है। साथ ही स्ढ्ढक्र को लेकर बहुत डर है। नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ दलित एंड आदिवासी ऑर्गेनाइजेशन्स (NACDAOR) और द कन्वर्जेंट मीडिया (TCM) ने बिहार के दलित समुदाय के बीच अब तक का सबसे व्यापक सर्वेक्षण किया है। 18,581 सैंपल साइज के साथ यह सर्वे बिहार को छह क्षेत्रों में बांटकर किया गया – कोसी, मिथिलांचल, सीमांचल, भोजपुर, चंपारण, और मगध-पाटलिपुत्र। सर्वे प्रदेश की 49 विधानसभा सीटों पर किया गया, जिनमें 11 अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटें शामिल हैं।

नैकडोर के चेयरमेन अशोक भारती और टीसीएम के डायरेक्टर प्रेम कुमार एवं रंजन कुमार ने 18 जुलाई को पटना में एक प्रेसकॉन्फ्रेन्स करके इस सर्वे के परिणाम जारी किए और दावा किया कि यह पहल दलित कार्यकर्ताओं द्वारा दलित समुदाय की राय को सामने लाने की अनूठी कोशिश है। इसके लिए 98 कार्यकर्ताओं को पटना, बेगूसराय और दरभंगा में चार प्रशिक्षण शिविरों में प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण और सर्वेक्षण का काम 10 जून से 4 जुलाई तक 25 दिन चला।

प्रमुख निष्कर्ष:
महागठबंधन को बढ़त: दलित समुदाय में महागठबंधन को 46.13प्रतिशत समर्थन मिला, जबकि एनडीए को 31.93प्रतिशत. कोसी (72.33 प्रतिशत) और भोजपुर (53.75 प्रतिशत) में महागठबंधन की मजबूत स्थिति है, जबकि सीमांचल में एनडीए (42.57 प्रतिशत) को बढ़त है। 2020 के विधानसभा चुनाव की तुलना में महागठबंधन का वोट शेयर 0.19प्रतिशत बढ़ा, जबकि एनडीए का 4.6 प्रतिशत घटा। महादलितों में नीतीश की पकड़ कमज़ोर : दलितों में नीतीश कुमार के लिए समर्थन घटा है खासतौर से महादलितों के बीच पकड़ कमजोर हुई है। यह इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि बिहार में महादलित की सोच नीतीश कुमार ने ही स्थापित की थी। दुसाध (18.79प्रतिशत) में सबसे कम और बाकी दलित जातियों (महादलित) में नीतीश को समर्थन 20 से 33 प्रतिशत के बीच है।

तेजस्वी यादव की लोकप्रियता: तेजस्वी यादव (28.83 प्रतिशत) बिहार में दलितों के सबसे पसंदीदा नेता हैं। दूसरे नंबर पर चिराग पासवान (25.88प्रतिशत) हैं और दलितों में नीतीश कुमार (22.80प्रतिशत) पिछड़कर तीसरे नंबर पर जा पहुंचे हैं।

बेरोजग़ारी सबसे बड़ा मुद्दा: सर्वे में 58.85प्रतिशत दलित मतदाताओं ने बेरोजगारी को सबसे बड़ा मुद्दा बताया, विशेष रूप से कोसी (80.51प्रतिशत) और भोजपुर (61.42प्रतिशत) में। शिक्षा-स्वास्थ्य (14.67प्रतिशत) और भ्रष्टाचार (11.21प्रतिशत) भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। तेजस्वी यादव द्वारा बेरोजगारी पर लगातार उठाए गए सवालों का प्रभाव दलित समुदाय में स्पष्ट दिखता है। लोकप्रियता में नरेंद्र मोदी को टक्कर दे रहे हैं राहुल गांधी : दलित मतदाताओं में नरेंद्र मोदी (47.51प्रतिशत) और राहुल गांधी (40.30प्रतिशत) की लोकप्रियता स्पर्धी है जिसमें मोदी आगे हैं। मगर, बिहार में कांग्रेस के सीमित प्रभाव को देखते हुए राहुल गांधी को मिल रहा समर्थन बड़ा लगता है। राहुल गांधी आंकड़ों में नरेंद्र मोदी को टक्कर देते दिख रहे हैं।

राम विलास पासवान सर्वाधिक पसंदीदा दलित नेता : दिवंगत राम विलास पासवान को 52.35प्रतिशत दलितों ने सबसे बड़ा दलित नेता माना, विशेष रूप से दुसाध (65.37प्रतिशत) और अन्य छोटी जातियों (68.36) में। रविदास/चमार में बाबू जगजीवन राम (47.87प्रतिशत) को प्राथमिकता मिली। जातिगत जनगणना का श्रेय : राहुल गांधी (30.81प्रतिशत) और तेजस्वी यादव (27.57प्रतिशत) को मिलाकर महागठबंधन को 58.38प्रतिशत लोग जातिगत जनगणना का श्रेय देते हैं, जबकि नरेंद्र मोदी को 33.15प्रतिशत। नीतीश सरकार से असंतोष: नीतीश सरकार के कामकाज को 48.43प्रतिशत दलितों ने खराब बताया, विशेष रूप से भोजपुर (71.10प्रतिशत) और कोसी (68.75प्रतिशत) में। मेहतर/हाडी/वाल्मीकि (54.30प्रतिशत) और पासी (53.03प्रतिशत) में सकारात्मक राय अधिक है।
चुनाव आयोग पर भरोसा घटा : केवल 51.22प्रतिशत लोग चुनाव आयोग पर भरोसा करते हैं, जबकि 27.40प्रतिशत इसे निष्पक्ष नहीं मानते।

वोटर लिस्ट को लेकर डर : 71.55प्रतिशत दलितों को नई मतदाता सूची में नाम हटने का डर है, विशेष रूप से रविदास/चमार (83.05प्रतिशत) और पासी (78.84प्रतिशत) में। सीमांचल (78.08प्रतिशत) और कोसी (77.19प्रतिशत) में यह चिंता सबसे अधिक है। आरक्षण की मांग : 82.89प्रतिशत दलित आरक्षण का दायरा बढ़ाने के पक्ष में हैं। आरक्षण की सीमा तोडऩे की राजनीतिक मुहिम का ये असर हो सकता है। जातिगत रुझान : रविदास/चमार (52.31प्रतिशत) और अन्य छोटी जातियां (57.76प्रतिशत) महागठबंधन का मजबूत आधार हैं। दुसाध (37.34प्रतिशत) और मेहतर/हाडी/वाल्मीकि (35.73प्रतिशत) में एनडीए को समर्थन है। सर्वे की विशिष्टता : यह सर्वे दलित कार्यकर्ताओं द्वारा दलित समुदाय के बीच किया गया। विश्वसनीयता और प्रामाणिकता की कसौटी पर सटीक इस सर्वे में बिहार की सभी 23 दलित जातियां शामिल हुईं। इनमें 9 प्रमुख जातियां (97.8प्रतिशत आबादी) शामिल हैं जिनमें दुसाध (31प्रतिशत), रविदास (30.72प्रतिशत), और मुसहर (17.08प्रतिशत) प्रमुख हैं।

सर्वे में उम्मीदवार (44.66प्रतिशत) और पार्टी (32.51प्रतिशत) को मतदान का आधार बताया गया, जबकि जाति (10.09प्रतिशत) का प्रभाव सीमित है। हालांकि पसंद की उम्मीदवार का आधार जातिगत हो सकता है। राजनीतिक निहितार्थ : यह सर्वे बिहार की राजनीति में दलित समुदाय की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करता है। महागठबंधन की बढ़ती लोकप्रियता, तेजस्वी यादव और राहुल गांधी का प्रभाव, और बेरोजगारी जैसे मुद्दों का उभरना नीति निर्माताओं और राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संदेश है।

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Mazdoor Morcha
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