शिक्षा निदेशालय दिखा रहा मुंगेरीलाल के हसीन सपने
फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मोदी-सैनी द्वारा काम नहीं लेकिन काम का ढिंढोरा पीटने और जुमलेबाजी से शिक्षा निदेशालय भी प्रेरित नजर आ रहा है। अब सरकारी स्कूलों में रोबोटिक्स की पढ़ाई शुरू करने के लिए निदेशालय ने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा है। शिक्षा निदेशालय सरकारी स्कूलों में बच्चों को पर्याप्त एकेडमिक शिक्षा तक नहीं उपलब्ध करा पा रहा है लेकिन मुंगेरीलाल की तरह रोबोटिक्स जैसी जटिल शिक्षा देने के सुनहरे ख्वाब देख और दिखा रहा है।
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि जिले के सभी राजकीय विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से रोबोटिक्स लैब बनाई जाएगी। पहले चरण में जिले में 14 विद्यालयों में प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। निदेशालय ने इन विद्यालयों की सूची मांगी है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जिन स्कूलों की सूची भेजी जाएगी उनमें छात्रों की संख्या, विषयवार अध्यापकों की संख्या का ब्यौरा भी मांगा गया है। रोबोटिक्स पाठ्यक्रम छठी से बारहवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए शुरू किया जाएगा, प्रत्येक कक्षा के अनुरूप अलग अलग पाठ्यक्रम बनाया जाएगा।
विद्यालयों में निदेशालय रोबोटिक्स का पाठ्यक्रम शुरू कराने से पहले आधारभूत ढांचा विकसित कराएगा। इसके तहत अध्यापकों को रोबोटिक्स के पाठ्यक्रम से संबंधित जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विद्यालयों में प्रयोगशाला विकसित की जाएंगी। रोबोटिक्स लैब में छात्र को प्रोग्रामिंग, कोडिंग आदि सिखाई जाएंगी। इसके लिए शिक्षा निदेशालय रोबोटिक्स विशेषज्ञों को नियुक्त करेगा, साथ ही विज्ञान के अध्यापकों को भी नियुक्त किया जाएगा। छात्रों को फोटो फोबिक रोबोट, फोटो ट्रॉपिक रोबोट, ऑब्स्टेकल अवॉइडर रोबोट, ऑब्स्टेकल फॉलोअर रोबोट, ग्रिपर रोबोट, स्टीयरिंग रोबोट, लाइन फॉलोअर रोबोट, एज अवॉइडर रोबोट, वॉलफॉलोअर रोबोट, ट्रैश बिन रोबोटो, पिक एंड प्लेस रोबोट और थ्रीडी आधारित गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई) की ‘गहरी समझ रखने का ढोंग करते हुए उसके बे सिर-पैर के नए नए मतलब बताते हैं उसी तरह शिक्षा निदेशालय में बैठे ‘काबिल अधिकारी भी रोबोटिक्स की पढ़ाई करवाने का दावा कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक, यांत्रिकी और कंप्यूटर व तकनीकि के जटिल समन्वय का अध्ययन रोबोटिक्स में शामिल है। यानी इसके लिए स्कूल में न केवल आधुनिक कंप्यूटर होने चाहिए, रोबोटिक्स से संबंधित कलपुर्जे, उनकी जोड़-तोड़ करने वाली मशीनें, रोबोट में लगाए गए कलपुर्जों के संचालन में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जैसे वायर, कनेक्शन फ्लैप, कमांड चिप, कोडिंग चिप, मोटर, गियर, चेन, बेल्ट, सेंसर आदि उपकरण भी होने चाहिए।
रोबोटिक्स को समझने से पहले इन उपकरणों की भी अच्छी तरह से जानकारी होनी चाहिए। समझने वाली बात है कि करीब एक दशक पहले सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर लगाए गए उन्हें चलाने के लिए जेनरेटर सेट पर मोटा खर्च किया गया। यह योजना भी रेते में घी डालने का मुहावरा बन कर रह गई, न तो कंप्यूटर चले और न ही जेनरेटर ही कोई काम आए। विषय के शिक्षकों की भर्ती कब हुई पता नहीं। दस साल में कंप्यूटर बेकार हो गए, जेनरेटर भी कबाड़ कर गायब कर दिए गए। जो सरकार बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा दे नहीं पाई वो रोबोटिक्स पढ़ाएगी, कहना मुश्किल है। संदर्भवश सुधी पाठकों को बता दें कि शहर के अनेकों राजकीय स्कूल बिना लैब के संचालित हो रहे हैं। एनआईटी पांच स्थित राजकीय कन्या विद्यालय में प्रयोगशाला भवन नहीं होने के कारण छात्राओं को आसमान के नीचे या बरामदे में पढ़ाई करनी पड़ रही है। ऐसा ही हाल कमोबेश सभी सरकारी स्कूलों का है। कक्षाएं भी नहीं हैं। इस संबंध में मज़दूर मोर्चा ने गतांक में छात्र खुले में पढऩे को मजबूर, निर्माण के चालीस करोड़ डकारने की ताड़ में अधिकारी शीर्षक से खबर छापी थी।
लैब और कक्षाओं को छोड़ भी दिया जाए तो भी अनेक सरकारी स्कूलों में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक भी पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं। रोबोटिक्स की पढ़ाई के ख्वाब देखने वाली सरकार पहले शिक्षकों की कमी पूरा कर ले, स्कूलों के जर्जर भवन की मरम्मत कराए, कमरों की कमी पूरी करे, छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए शौचालय बनवाए। यानी पहले से चले आ रहे विषय और पाठ्यक्रमों को पूरी तरह से पढ़ा ले उसके बाद रोबोटिक्स जैसे आधुनिक विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करे, अन्यथा इस विषय का हाल भी दस साल पहले चालू किए गए कंप्यूटर लैब जैसा ही होने वाला है।