मुफ़्त नहीं रही महात्मा गांधी ग्राम बस्ती योजना
फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) धनपशुओं के हाथ की कठपुतली बनीं मोदी-सैनी की डबल इंजन सरकारें संविधान की कल्याणकारी अवधारणा के विपरीत व्यापारी-लुटेरी बन चुकी हैं। अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब बेघर परिवारों को मुफ़्त आवास देने की योजना पलटते को हुए अब सरकार इन गरीबों को सर्किल रेट वसूल कर ही जमीन देगी।
यदि सामाजिक-शैक्षिक रूप से पिछड़े इन गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति इतनी ही अच्छी होती तो उन्हें सरकार की क्या जरूरत थी। सरकार की इस योजना से गरीबों का भला हो न हो भू माफिया, बिल्डरों और अधिकारियों की मिलीभगत से दुरुपयोग किए जाने पूरी संभावनाएं नजऱ आ रही हैं। जिला पंचायत एवं विकास अधिकारी प्रदीप कुमार के अनुसार सरकार ने महात्मा गांधी ग्राम बस्ती योजना के विस्तार का निर्णय लिया है।
खास बात यह है कि 2008 में शुरू हुई इस योजना में ग्राम पंचायत की जमीन से आर्थिक रूप से कमजोर अनुसूचित जाति पिछड़ा वर्ग व अन्य परिवारों को मुफ्त प्लॉट उपलब्ध कराया जाता था। अब सरकार ने तय किया है कि इन गरीब परिवारों को 100-100 गज के प्लॉट दिए जाएंगे लेकिन लाभार्थी को सर्किल रेट के आधार पर जमीन के दाम चुकाने होंगे। उनके अनुसार योजना के तहत फरीदाबाद खंड का पावटा, तिगांव खंड का फज्जपुर खादर, मोटूका और बल्लभगढ़ खंड के दयालपुर, पन्हैड़ा खुर्द, शाहपुर कलां, मौजपुर व गढख़ेड़ा को चुना गया है जहां गरीब बेघर परिवारों को प्लॉट दिए जाएंगे।
योजना का लाभ पाने के लिए अभ्यर्थी को हाउसिंग फॉर ऑल एप पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा, यानी अभ्यर्थी को स्मार्टफोन लेना होगा। समझने वाली बात है कि जिस गरीब के पास अपनी जमीन नहीं है और जो दिहाड़ी मज़दूरी कर, खेत मज़दूरी कर परिवार का गुजारा चलाने में भी सक्षम न हो वह दस पंद्रह हजार रुपये वाला स्मार्टफोन कहां से लाएगा। मान लिया कि किसी ने उसे मोबाइल दे दिया तो इंटरनेट चलाने के लिए रिचार्ज करने के भी पैसे उसके पास मुश्किल से होंगे। ये गरीब दिहाड़ी मज़दूर इतने पढ़े लिखे भी नहीं होते कि वह स्मार्ट फोन के प्ले स्टोर से सरकार का हाउसिंग फॉर ऑल एन डाउनलोड कर उसे ऑपरेट कर सकें और फिर आवेदन में ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड कर सकें। इस तरह के फॉर्म स्मार्ट फोन चलाने वाले औसत उपभोक्ता को भरना मुश्किल होता है तो फिर गरीब अनपढ़ और अनभिज्ञ के लिए कितना दुश्वार होगा समझा जा सकता है।
अधिकारी प्लॉट का सर्कल रेट लेने के पीछे वजह बता रहे हैं कि वर्तमान में जमीन की कीमतें बाजार दर बहुत ज्यादा हो गई हैं। बेशकीमती ज़मीन ऐसे ही नहीं दी जा सकती, सर्किल रेट की शर्त लगाने से केवल जरूरतमंद ही आवेदन करेंगे, बेवजह कोई आगे नहीं आएगा। धन नहीं होने के कारण तो जरूरतमंद भी आवेदन नहीं कर पाएगा। जानकार इसे भूमाफिया, बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार द्वारा सोची समझी साजिश मानते हैं। उनका मानना है कि सरकार सच में गरीबों को ही प्लॉट देना चाहती तो ऑनलाइन आवेदन की जगह लाभार्थियों को चिह्नित करने के लिए सर्वे करा सकती थी। अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे जा सकते थे इसके लिए पंचायतों में फार्म उपलब्ध कराए जाते। इसके विपरीत आवेदन प्रक्रिया जटिल और अल्पज्ञानी ग्रामीणों की पहुंच से दूर रखने के लिए ही बनाई गई है।
जानकारों के अनुसार इसका लाभ भूमाफिया और बिल्डर ही उठाएंगे। यह तथ्य है कि आमतौर पर कहीं भी जमीन का वास्तविक दाम वहां के सर्किल रेट से कहीं ज्यादा होता है। जो गरीब बेघर परिवार सरकार के मुफ़्त राशन पर गुजर बसर कर रहे हैं उनके पास जमीन खरीदने का पैसा नहीं होगा। ऐसे में भूमाफिया-बिल्डर इन गरीबों को दो चार हज़ार रुपये का चुग्गा डाल कर उनके दस्तावेज हासिल कर उनके नाम से आवेदन करेंगे। इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि सत्ता के संरक्षण वाले बिल्डर नेता-मंत्री के रसूख का इस्तेमाल और अधिकारियों की जेब गर्म कर गरीबों के नाम पर प्लॉट खरीद लें और ऊंचे दामों पर बेच कर मोटी कमाई करें।
जब सरकार में लीडर से भूमाफिया-डीलर बने कृष्णपाल गूजर जैसे मंत्री शामिल हों जो भूमाफिया, बिल्डरों के बड़े संरक्षक माने जाते हैं तो कुछ भी संभव हो सकता है। सुधी पाठकों को बताते चलें कि कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के तहत 1979 में गरीब-बेघरों को मुफ़्त आवास दिए गए थे। तब सरकार ने गरीबों के नाम 100-100 गज के प्लॉट की निशुल्क रजिस्ट्री करवाई थी। तीन दशक बाद हुडा की कांग्रेस सरकार में महात्मा गांधी ग्राम बस्ती योजना के तहत ग्राम पंचायतों में दोबारा गरीब बेघर परिवारों को चिह्नित किया गया और 1979 के लाभार्थियों को अलग कर नए परिवारों को निशुल्क प्लॉट उपलब्ध कराए गए थे।
2014 में केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार आई और गरीब कल्याण की अनेक योजनाओं में कटौती होने लगी, इसकी परिणति सैनी सरकार में नजर आ रही है जिसमें गरीबों से दाम वसूल कर उन्हें बसाने के अहसान का ड्रामा किया जाएगा।