फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) क्षेत्र में सोमवार को चेकिंग करने निकले बिजली महकमे के पल्ला सब डिवीजन जेई हिमांशु ने इस्माइलपुर स्थित विष्णु एन्क्लेव के निर्माणाधीन मकान में बिजली चोरी पकड़ी। मज़दूरों ने बताया कि मकान पार्षद लाल कुमार मिश्रा का है। मज़दूरों ने लाल कुमार का नंबर भी जेई को दिया। जेई ने फोन किया और मकान के बारे में पूछा तो सदाचारी पार्टी भाजपा के पार्षद लाल कुमार ने खम ठोंकते हुए पूरी ठसक के साथ इस अंदाज में हां कहा मानो कह रहे हों कि यह मेरा घर है इस तरफ आंख उठाने की कोशिश न करना। फोन काटने के बाद अपना फर्ज निभाते हुए जेई हिमांशु ने पार्षद महोदय के नाम से बिजली चोरी का 80 हजार रुपये का चालान काट कर थमा दिया। आसपास के लोगों के अनुसार काफी लंबे समय से पार्षद महोदय के मकान के पास से गुजर रही लाइन में खूंटी डाल कर बिजली चोरी की जा रही थी। अब मामला क्योंकि पार्षद का था तो क्षेत्र में चर्चा फैल गई कि लाल भइया के यहां बिजली चोरी पकड़ी गई है। जल्द ही चालान की कॉपी भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। सदाचारी पार्टी के पार्षद का भ्रष्टाचार वायरल होते ही भाजपाइयों में बेचैनी फैलना स्वाभाविक था सो लाल कुमार से सवाल जवाब होने लगे।
बताया जाता है कि पार्षद महोदय ने पार्टी के पदाधिकारियों और नेताओं के सामने लगभग रोते हुए इज्जत बचाने की गुहार लगाई। फिर क्या था पीएम मोदी से विपक्ष पर नाकामियों का ठीकरा फोडऩे की कला सीखे भाजपाइयों ने पार्षद महोदय को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद को उजला बताने की सलाह दी और बिजली निगम के अधिकारियों को सत्ता की हनक दिखा कर मामला निपटाने का फरमान सुना दिया गया। आनन फानन प्रेसवार्ता कर लाल कुमार ने सफाई दी कि चोरी का मामला उनसे जुड़ा नहीं है, न ही उनके यहां कोई चेकिंग हुई है। पूर्व पार्षद पति पर राजनीतिक साजिश के तहत उनका नाम चालान में लिखवाने का आरोप लगाया। इधर सत्ताधारियों की धमक के आगे एसडीओ जवाहर भी पलटी मार गए और बयान जारी किया कि जांच के दौरान मज़दूरों ने गलती से लाल कुमार मिश्रा का नाम ले लिया था, दरअसल वह मकान दिलीप कुमार मिश्रा के नाम है, अब चालान में पार्षद महोदय का नाम काट कर दिलीप कुमार मिश्रा का डाला जाएगा।
क्षेत्र के लोगों के मुताबिक मकान लाल कुमार मिश्रा ही बनवा रहे हैं लेकिन फंसने पर बदनामी से बचने के लिए पारिवारिक सदस्य दिलीप कुमार मिश्रा का नाम लिया जा रहा है। लोगों की बात मेें कितनी सच्चाई है मकान का असली मालिक कौन है, उसके पार्षद से क्या संबंध हैं और पार्षद का जेई से उनका मकान होने की बात कहना, ये सारी बातें जांच का विषय हंै। चोरी किसी साधारण व्यक्ति के यहां पकड़ी जाती तो चालान भी लाखों में होता, जन प्रतिनिधि का घर होने के कारण जेई ने बहुत वाजिब दर से रसीद काटी थी। राजनीति के जानकार कहते हैं कि अब यह चालान सीधे रद्दी की टोकरी में जाएगा क्योंकि कोई भी सत्ताधारी नेता या उसका पारिवारिक सदस्य अस्सी हजार रुपये का जुर्माना भरने से रहा। मीडिया में सफाई देकर बिजली महकमे को पहले ही गलत बता दिया गया है, मामला ठंडा पड़ते ही चालान पर्ची भी ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी।