फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सैनी ने मुख्यमंत्री पद संभालते ही काम हो न हो होते दिखना चाहिए के मोदी-खट्टर फार्मूले पर चलते हुए प्रत्येक दिन समाधान दिवस चलाने की घोषणा कर दी। गोदी मीडिया और पत्तलकार समाचार पत्रों ने समाधान दिवस को रामराज आने की तर्ज पर जनता के लिए अनमोल सेवा शुरू होने जैसा बताया। इस सबकेे बीच बीते दसियों साल से ठगी जा रही बहुतायत जनता को समाधान दिवस के शुभारंभ दिवस पर भी निराश लौटना पड़ा।
मुख्यमंत्री के आदेश पर मंगलवार को नगर निगम के कॉन्फ्रेंस हॉल में समाधान दिवस समारोहपूर्वक शुरू हुआ। जनता के लिए पंडाल कुर्सी का इंतजाम किया गया और निगम के उन्ही घाघ कर्मचारियों को जनता समस्याओं का सामाधान मौके पर ही करने के लिए मुस्तैदी से तैनात किया गया जो बिना जेब गर्म किए काम नहीं करते । खुद निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास ने समाधान दिवस का उद्घाटन किया। हुआ वही जो आम दिनों में होता है, समाधान दिवस में 47 पीडि़त अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे इनमें से केवल सात की समस्याओं का हल किया गया और बाकी को पांच दिन बाद आने की कह कर टरका दिया गया। ओल्ड फरीदाबाद जोन में तो किसी फरियादी की सुनी ही नहीं गई, समाधान के नाम पर उन्हें चलता कर दिया गया। बल्लभगढ़ जोन में भी समाधान दिवस का कुछ खास असर नहीं दिखा।
अधिकतर समस्याएं प्रॉपर्टी आईडी दुरुस्त कराने की थी, गलत हाउस टैक्स, पेयजल, सीवर समस्या से संबंधित थीं। समझने वाली बात है कि जिस प्रॉपर्टी आईडी का रगड़ा पिछले चार-पांच साल से चल रहा है, सीवर जाम की समस्या और पेयजल आपूर्ति की परेशानी भी नई नहीं है। जो सरकार पिछले दस साल में पेयजल आपूर्ति नहीं करा सकी और चोक सीवर नहीं करवा सकी उसके निकम्मे अधिकारी एक दिन में समाधान कर देंगे कैसे मुमकिन होगा। रही बात प्रॉपर्टी आईडी की तो यह समस्या खट्टर-सैनी सरकार द्वारा जनता की गाढ़ी कमाई संघी याशी कंसल्टेंसी पर लुटाने और जनता को परेशान करने के उद्देश्य से ही लाई गई थी। नगर निगम क्षेत्र में जितने भी भवन बने हैं उन सबका नक्शा तो नगर निगम ने ही पास किया है, हाउस नंबर भी नगर निगम से ही जारी किया जाता है, बावजूद इसके प्रॉपर्टी आईडी के नाम पर जनता को परेशान किया जा रहा है।
सरकार भी जानती है कि बीते दस साल में उसने जनता को केवल वरगलाया ही है। जनता के भारी रोष और विरोध के बावजूद किसी तरह सरकार बन गई है तो भलेे ही काम न हो लेकिन जनता को संतुष्ट करने के लिए समाधान दिवस का नाटक किया गया।
दरअसल, समाधान दिवस का आयोजन ही सरकार की यह स्वीकारोक्ति है कि उसके महकमों में आम जनता का काम नहीं होता। जनता को काम कराने के लिए अधिकारियों- बाबुओं की मु_ी गर्म करनी पड़ती है। यदि सरकारी विभागों में सारे काम नियमानुसार किए जाने लगें तो शायद किसी को समाधान दिवस या दफ्तरों के चक्कर लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। यह सच्चाई किसी से छिपी नहीं है कि मंत्री-विधायकों को हर विभाग से खर्चा और हिस्सापत्ती चाहिए होती है, यह खर्चा या तो जनता के लिए होने वाले विकास कार्यों मेें कांटा मार कर निकाला जाता है या फिर जनता से वसूली करके। यदि सरकार और उसके मंत्री-विधायक विभागों पर दबाव बनाना छोड़ दें तो भ्रष्टाचार में काफी कमी आ सकती है लेकिन दस साल की कार्यशैली देख कर यह लगता नहीं कि सैनी भी जनता को वरगलाने के अलावा कुछ अलग करेंगे।
हास्यास्पद बात यह भी है कि जोश में आए सैनी ने प्रत्येक दिन समाधान दिवस मनाए जाने का आदेश जारी किया है। सुनने में तो यह अच्छा लगता है लेकिन इसका सीधा सा अर्थ है कि जैसे रुटीन में जनता आकर अपनी समस्या सुनाती थी और इक्का दुक्का का समाधान किए जाने के अलावा सबको खाली हाथ लौटना पड़ता था वैसे ही इसमें भी होने वाला है, हां व्यक्ति को यह संतोष हो सकता है कि उसने समाधान दिवस में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी, न कि किसी दफ्तर में। यह भी समझने वाली बात है पिछले दस साल से सीएम विंडो, ग्रीवांस कमेटी की बैठक, जनता दरबार जैसे बड़े कार्यक्रमों का आयोजन लगातार हो रहा है, उनमें आने वाली समस्याओं में से अधिकतर का एक दिन में समाधान नहीं हो पाता तो बाबुओं द्वारा चलाए जाने वाले इस समाधान दिवस में क्या होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। कुल मिलाकर सैनी का समाधान दिवस एक दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात ही साबित होने वाला है।