साइकिल ट्रैक के नाम पर लूट-बांट की तैयारी

साइकिल ट्रैक के नाम पर लूट-बांट की तैयारी
January 06 00:08 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) महंगे और घटिया विकास कार्य कराने में माहिर एफएमडीए के भ्रष्ट अधिकारी लूट कमाई के लिए पिछले साल बनकर तैयार हुईं पांच सड़कों पर साइकिल ट्रैक बनवाएंगे। खास बात यह है कि इन सड़कों की ड्राइंग और डीपीआर में साइकिल ट्रैक शामिल था लेकिन ठेकेदारों ने नहीं बनाया और भुगतान भी ले गए। किसी भी ठेकेदार की इतनी हिम्मत नहीं कि वह काम अधूरा छोड़ दे, उसे मालूम है कि ऐसा करने पर भुगतान नहीं होगा। बावजूद इसके यदि ठेकेदार ने साइकिल ट्रैक नहीं बनाया तो समझा जा सकता है कि मोटी कमीशनबाजी में अधिकारियों की सांठगांठ से ही यह मुमकिन हुआ। आशंका की पुष्टि इस बात से भी होती है कि एफएमडीए के चीफ इंजीनियर रमेश बागड़ी ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय नए सिरे से साइकिल ट्रैक बनाने के टेंडर जारी करने की तैयारी कर रहे हैं।

एफएमडीए द्वारा बनवाए गए वाईएमसीए बाईपास रोड, सेक्टर 15 डीसी आवास रोड, सेक्टर 16 मेट्रो रोड और सेक्टर 15-16 विभाजक मार्ग बीते साल तैयार हुए थे। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज रोड निर्माण का भी रमेश बागड़ी ने दावा किया है लेकिन उसकी केवल मरम्मत ही कराई गई वो भी घटिया किस्म की।

राष्ट्रीय राजमार्ग को बाईपास से जोडऩे वाले करीब दो किलोमीटर लंबे वाईएमसीए रोड का निर्माण सितंबर 2021 में शुरू हुआ, जो किसी तरह रो पीट कर चंद महीने पहले ही आधा अधूरा तैयार हो पाया, यानी ठेकेदार ने साइकिल ट्रैक नहीं बनाया, कहीं कहीं फुटपाथ भी गायब है। सेक्टर 15 डीसी कार्यालय रोड भी करीब डेढ़ साल में बन कर तैयार हुई और चंद हफ्तों में ही उसमें दरारें आ गईं, बनते ही उसमें मरम्मत शुरू हो गई। इसी तरह सेक्टर 16-16ए की विभाजक सड़क रोड भी पौने दो साल में जैसी तैसी बन कर तैयार हुई, यहां साइकिल ट्रैक बनाने के बजाय आरएमसी बिछा कर सड़क चौड़ी कर दी गई, तत्कालीन विधायक नरेंद्र गुप्ता ने तो इस सड़क के निर्माण को अपने कार्यकाल की उपलब्धियों में गिनाया था, इसकी भी हालत अच्छी नहीं है।

ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज से चिमनी बाई चौक तक की सड़क पर आज भी गड्ढे हैं बावजूद इसके चीफ इंजीनियर रमेश बागड़ी का दावा है कि चंद महीने पहले ही इस सड़क का निर्माण करा दिया गया है। जानकारों के अनुसार तिकोना पार्क ऑटो मार्केट से ईएसआई चौक होते हुए चिमनी बाई चौक तक सड़क का निर्माण कराया जा रहा है, उसकी आड़ में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज रोड को बना हुआ दिखा कर करोड़ों रुपयों की बंदरबांट की किए जाने की आशंका प्रबल है।

नौ रुपये का काम नब्बे रुपये में कराने का हुनर रखने वाले एफएमडीए अधिकारियों ने इन पांचों घटिया सड़कों के निर्माण पर जी भर कर पैसा लुटाया बावजूद इसके साइकिल ट्रैक नहीं बनवाया। अब साइकिल ट्रैक के नाम पर करोड़ों रुपयों की लूट बांट की जाएगी। अव्वल तो साइकिल ट्रैक बनेंगे नहीं, रोते पीटते बन भी गए तो ऐसी जगह बनाए जाएंगे जिन पर साइकिल चलाना मुमकिन नहीं होगा और वह ट्रैक भी अतिक्रमण का शिकार हो जाएंगे। बाटा मोड़ से सेक्टर 12 होते हुए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन मोड़ तक बनाया गया साइकिल ट्रैक अवैज्ञानिक होने के कारण साइकिल सवारों की पसंद आज तक नहीं बन सका, अतिक्रमण है सो अलग।

ठीक बाटा मोड़ से जहां से साइिकल ट्रैक शुरू होता है उस पर दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है, होटल ढाबे वालों की कुर्सी-मेज ट्रैक पर ही रखी रहती हैं तो बाइक-ऑटो मरम्मत करने वाले भी ट्रैक तक सामान फैला कर उसे बंद किए हुए हैं। आगे बढ़ कर ट्रैक सड़क के समानांतर ग्रीन बेल्ट के पीछे चलता है लेकिन इस पर कई जगह झुग्गी वालों का अतिक्रमण है तो कहीं चाय-पान की दुकान लगी है। सेक्टर 12 लघु सचिवालय और न्यायालय परिसर के पास तो यह ट्रैक और ग्रीन बेल्ट वाहन पार्किंग माफिया के कब्जे में है। यहां साइकिल ट्रैक का इस्तेमाल दो पहिया-चार पहिया वाहनों की पार्किंग के लिए किया जाता है। थोड़ी ही आगे बिजली महकमे का ट्रांसफॉर्मर और मोटा केबिल साइकिल ट्रैक में बाधा साबित होते हैं। इस साइकिल ट्रैक को बनाने में भी लाखों रुपये खर्च कर दिए गए लेकिन उपयोग शून्य ही है। नए साइकिल ट्रैकों का भी हाल यही होने वाला है।

बागड़ी पांच और नए साइकिल ट्रैक बनवाने के दावे तो कर रहे हैं लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि ये बनाए कहां जाएंगे, अधिकतर सड़कों को चौड़ा करने में फुटपाथ तक आरएमसी बिछा दी गई है, साइकिल ट्रैक के लिए जगह ही नही बची है। संदर्भवश, 2016 में भी हूडा द्वारा 18 लाख की लागत से ऐसा ही एक ट्रैक बनाया गया था जिसका आज कोई अता पता नहीं है।

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Mazdoor Morcha
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