करनाल मंडी के गेट पास घोटाले में हुई एफआईआर दर्ज़! करनाल (मज़दूर मोर्चा) यहां अनाज मंडी में धान खरीद अवधि के दौरान गेट पास जारी करने में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। एडीसी करनाल की रिपोर्ट के आधार पर मंडी बोर्ड के चार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। यह मामला एफआईआर संख्या 0838, थाना करनाल सिटी में दर्ज किया गया है। एफआईआर में शिकायत कर्ता ईश्वर सिंह, जिला मंडी अधिकारी (एचएसएएम बोर्ड, करनाल) हैं। उन्होंने बताया कि मंडी के डिजिटल सिस्टम से गेट पास अनाधिकृत आई.पी. एड्रेस के जरिए जारी किए गए, जिससे सरकारी प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी और आर्थिक हानि की संभावना सामने आई है । प्रारंभिक जांच में पाया गया कि गेट पास जारी करने में तकनीकी छेड़छाड़ और रिकॉर्ड से छुपाने के प्रयास किए गए हैं।
एडीसी करनाल द्वारा दिनांक 4 नवम्बर 2025 को भेजे गए पत्र संख्या 1575 के आधार पर यह एफआईआर दर्ज की गई। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि मंडी बोर्ड की डिजिटल प्रणाली से कुछ गेट पास संदिग्ध नेटवर्क से बनाए गए, जिनका डेटा सर्वर लॉग में मौजूद नहीं था। इससे गेट पास प्रणाली में साइबर हेराफेरी की पुष्टि होती है। एफआईआर में जिनके नाम आरोपित के रूप में दर्ज किए गए हैं, उनमें आशा रानी, सचिव करनाल मार्केट कमेटी, राजेंद्र कुमार, निवासी गाँव बुधनपुर वीरान (इंद्री); अमित कुमार, निवासी गाँव जुंडला तथा अजय कुमार, निवासी गाँव खेड़ीनरू (करनाल) शामिल हैं। इन सभी पर सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। साइबर सेल करनाल की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, 22 सितम्बर से 4 नवम्बर 2025 के बीच कुछ गेट पास फर्जी रूप से बनाए गए। इन गेट पासों की एंट्री मंडी के आधिकारिक सर्वर पर नहीं थी और इन्हें अनाधिकृत आईपी पते से तैयार किया गया। यह संकेत है कि मंडी प्रणाली में किसी अंदरूनी व्यक्ति ने तकनीकी पहुंच का दुरुपयोग किया है।
करनाल सिटी थाना पुलिस ने मामले की जांच सब-इंस्पेक्टर राजन कुमार को सौंपी है। उन्होंने बताया कि मंडी के सर्वर, कंप्यूटर लॉग और गेट पास डाटा की डिजिटल फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। प्रारंभिक साक्ष्यों से साइबर हस्तक्षेप और मानवीय लापरवाही दोनों की पुष्टि हुई है। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(4) के तहत दर्ज की गई है, जो सरकारी रिकॉर्ड या दस्तावेजों में फर्जी प्रविष्टि करने या धोखाधड़ी से संबंधित अपराधों पर लागू होती है। इस अपराध के लिए कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। डीएफएससी और मंडी बोर्ड प्रशासन ने बयान जारी कर कहा है कि मंडी प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए राज्य की सभी मंडियों की डिजिटल समीक्षा शुरू कर दी गई है। दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।
स्थानीय व्यापारियों ने इस प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यदि अधिकारी स्वयं गेट पास प्रक्रिया में हेराफेरी करें, तो किसान और खरीदार दोनों के हित खतरे में पड़ जाते हैं। व्यापारियों ने मांग की है कि जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और दोषियों को कठोर दंड मिले। यह मामला हरियाणा की मंडी प्रणाली में डिजिटल भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बन गया है। गेट पास प्रणाली में हुई साइबर हेराफेरी से न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुँचा, बल्कि मंडी व्यवस्था की साख भी दांव पर लग गई है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और मंडी बोर्ड ने भी आंतरिक ऑडिट की प्रक्रिया आरंभ कर दी है।