रूह ने…

रूह ने…
September 29 19:40 2025

डॉ. रामवीर
उस दिन एक दुकान पर चढ़ा तो देखा च्यवनप्राश के डिब्बे उल्टे रखे हुए हैं। उल्टे क्यों रखे हैं ? पूछने पर दुकानदार ने बताया कि भले ही ग्राहक कुछ और लेने आया हो पर डिब्बे उल्टे देख कर नजर जरूर जाती है। चीज नजर आती है तो खरीद भी लेता है। यह है दुकानदारों का ध्यानाकर्षण प्रकार।

लेखक भले ही स्वयं को बुद्धिजीवी समझे पर दुकानदार से अधिक बुद्धिमान् नहीं हो सकता। दुकानदार पुराना परिचित था, उधार दे देता था तो उस दिन उससे बुद्धि उधार ले आया और घर आकर जब लिखने बैठा तो नेहरू को उल्टा कर के ‘रूह ने’ शीर्षक से लिखना शुरू किया। आशंका थी कि नेहरू शीर्षक देख कर भाजपाई भाई तो लेख पढ़ेंगे नहीं, रूह ने देख कर भले पढ़ लें कि देखें रूह ने क्या कर दिया। रूह माने आत्मा और आत्मा का विषय अध्यात्म। आजकल अध्यात्म आदि शंकराचार्य जैसे आध्यात्मिक आचार्यों से नहीं बल्कि डबलश्री रविशंकर और सद्गुरु जैसे गुरुघंटालों के चैनल्स से चल रहा है। आस्था और संस्कार जैसे चैनल्स पर उपलब्ध सस्ते अध्यात्म से आत्मज्ञानी बने भक्तों की अन्तरात्मा (जमीर) मरने के उदाहरण मिल जाते हैं। अध्यात्म ब्लैक होल की तरह है, उसमें समाने से पहले ही नेहरू पर लौटते हैं। नेहरू को गए तो बासठ साल हो गए पर भाजपाइयों में नेहरू की रूह आ गई है। देवी आना, रूह आना इस आध्यात्मिक देश का एक विशेष सोशिओ-रिलीजिअस फीचर है। जैसे देवी आने पर महिला बाल खोल कर अंटशंट बोलने लगती है वैसे ही अन्ध भक्त नेहरू की रूह आने पर स्टार्ट हो जाते हैं, फिर तो इतिहास भूगोल सब बदल जाता है। नेहरू स्वतन्त्रता आन्दोलन की आग में तपा देशभक्त था, इधर मोदी के लिए आन्दोलन ही गाली है – झूठ और अन्याय के विरोध में खड़े लोगों को आन्दोलनजीवी कहना क्या बताता है। हिन्दी एक समर्थ भाषा है, गुणी और गुणहीन के बीच बड़े अन्तर को बताने के लिए विशेष कहावत है – जिसे सभी जानते हैं उसे क्या उद्धृत करना। इतिहास इतिहास होता है। इतिहास का पुनर्लेखन पुनर्विवाह की तरह है। पुनर्विवाह पारिवारिक विवशता हो सकती है, उसमें प्रथम प्रेम के रोमांस की ऊष्मा होनी दुष्कर है। गान्धी फिल्म बनने से पहले गान्धी को कोई नहीं जानता था (मोदी), गान्धी के पास लॉ की डिग्री नहीं थी (मनोज सिन्हा, राज्यपाल) जैसे बयान देने वाले कैसा इतिहास लिखवाएंगे कल्पना की जा सकती है। रूह अमर होती है, सच्चा इतिहास मिटाया नहीं जा सकता वह मुल्क की रूह की तरह होता। भक्त बनिए, देशभक्त बनिए, देशभक्तों का स्वागत, अन्धभक्तों पर लानत।

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Mazdoor Morcha
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