सूचना के अधिकार की हालत पतली
सतर्क नागरिक संगठन नामक संस्था द्वारा ओडिशा राज्य से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य सूचना आयोग में अपील का निपटारा होने में लगभग 7 साल का समय लगता है। एसएनएस के अनुसार राष्ट्रीय सूचना आयोग भी अपील का निपटारा करने में लगभग दो साल का समय लेता है हालांकि एक साल से चार रिक्त स्थान भरने के बाद से आयोग ने 33742 मामले निपटा कर अपना काफी बोझ कम किया है। संगठन ने पाया है की इतने मामले इकठ्ठे होने का कारण राज्य और राष्ट्रीय सूचना आयोग में स्टाफ की कमी व उसकी अकर्मण्यता दोनो है।
सूचना आयोग न्याय पाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थे लेकिन उनमें सदस्यो की नियुक्ति न करके उनको पंगु बनाने में सरकार सफल रही है। लगता है मौजूदा सरकार की लोगो को न्याय दिलाने में कुछ ज्यादा रुचि नहीं है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की लताड़ के बाद सरकार को हाल ही में कुछ नियुक्ति करने पर मजबूर होना पड़ा है। शायद सरकार चाहती है की लोग सड़कों पर ही लड़ लड़ाकर त्वरित न्याय प्राप्त कर ले, सूचना आयोगों के चक्कर में अपना समय न खराब करे।