रेडक्रॉस ने जनता से वसूला धन, अपनों में बांटे तोहफे

रेडक्रॉस ने जनता से वसूला धन, अपनों में बांटे तोहफे
November 04 05:20 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) जिस रेडक्रॉस सोसायटी के पास अपने प्रोजेक्ट चलाने के लिए पैसा नहीं है, लेकिन उसने जनता से सेवा के नाम पर वसूले गए करीब डेढ़ लाख रुपये के दिवाली गिफ़्ट खरीद कर अपने कर्मचारियों के बीच बांट दिए। जन कल्याण के नाम पर जनता से लूटे गए धन का इस तरह खुलेआम दुरुपयोग किया जाना बताता है कि यह सारा खेल आला अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है। इस मामले में सोसायटी के आला अधिकारियों के विरोधाभासी बयान भी दाल में काला होने का इशारा कर रहे हैं।

सोसायटी सूत्रों के अनुसार कर्मचारियों को बांटने के लिए एनआईटी स्थित सिटी मॉल से 80 गिफ़्ट पैक मंगाए गए। प्रत्येक गिफ्ट पैक में आधा किलोग्राम काजू-बादाम के साथ इलेक्ट्रिक केतली व प्रेस (इस्त्री) शामिल है। बाजार में इस पैक की कीमत 1800 से लेकर 2000 रुपये तक बताई जा रही है। इनमें से 65 गिफ़्ट पैक तो कर्मचारियों में बांट दिए गए जबकि 15 पैक अधिकारियों के खासमखास और चाहने वालों के लिए रख लिए दिए गए। सोसायटी में गिफ़्ट बांटे जाने से बाल भवन के कर्मचारियों में रोष है, इन लोगों का कहना है कि बाल भवन भी तो रेडक्रॉस सोसायटी की तरह ही सोसायटी द्वारा संचालित है जब उन लोगों को गिफ़्ट मिल सकता है तो फिर यहां के कर्मचारियों को क्यों नहीं।

हालांकि, सरकारी कार्यालयों के नियम कायदे जानने वालों के अनुसार जनता के धन पर पलने वाले किसी भी कर्मचारी को कोई गिफ़्ट दिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। चाय-नाश्ता, स्नैक्स की मद में काजू-बादाम का उपभोग सख्ती से प्रतिबंधित है यानी इन वस्तुओं का बिल पास नहीं हो सकता। कर्मचारियों को गिफ़्ट बांटने के लिए करीब चालीस हज़ार रुपये काजू-बादाम पर भी खर्च किया गया।

गिफ़्ट की खरीद सोसायटी सचिव के स्तर पर नहीं की गई है क्योंकि वह तीस हज़ार रुपये तक ही खर्च कर सकते हैं। इससे अधिक कीमत के बिल सोसायटी के अध्यक्ष यानी डीसी फरीदाबाद विक्रम सिंह के हस्ताक्षर से पास होते हैं। डीसी विक्रम सिंह ने इस तथ्य को समझते हुए बिल किसी और खाते से पास किए होंगे।

प्रदेश रेडक्रॉस सोसायटी की वाइस चेयरपर्सन सुषमा गुप्ता ने बताया कि फरीदाबाद कार्यालय में गिफ्ट बांटे गए हैं, इन गिफ्ट की खरीद के लिए पहले से ही बजट में प्रावधान किया गया है, अचानक बजट नहीं जारी किया गया है। वहीं प्रदेश महासचिव मुकेश अग्रवाल ने पहले तो गिफ़्ट बांटे जाने की बात से ही इनकार किया, फिर कहा कि सब कर्मचारियों ने अपनी तरफ से पैसे इक_ा कर गिफ़्ट मंगाए हैं। फिर बोले कि कर्मचारियों को जो गिफ़्ट बांटे गए वह रिटायरमेंट पार्टी कम दिवाली गिफ़्ट के रूप में बांटे गए हैं। महकमे में साढ़े 29 साल सेवा करने के बाद रिटायर हो रहे व्यक्ति के सम्मान में पार्टी की गई होगी इसके लिए सभी कर्मचारियों ने योगदान किया होगा। यह हास्यास्पद है कि कोई व्यक्ति अपने ही खर्च पर उपहार खरीदे और फिर उसे महकमे की ओर से मिला दर्शा कर रख ले। रिटायरमेंट पार्टी में सेवानिवृत्त होने वाले व्यक्ति को ही उपहार दिए जाते हैं न कि सबको। भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि सोसायटी में गिफ़्ट बांटने का यह खेल बीते पांच साल से चल रहा है, पिछले साल भी सबको करीब डेढ़ हजार रुपये कीमत वाले प्रेशर कुकर बांटे थे। वर्तमान में गुडग़ांव रेडक्रॉस सोसायटी के सचिव विकास कुमार ने भी अपने कार्यकाल में यहां महंगे दिवाली गिफ़्ट बंटवाए थे।
जिला रेडक्रॉस सोसायटी की ओर से रक्तदान सहित कई सामाजिक कल्याण के कार्यक्रम चलाए जाते हैं। कहने को तो इन सबकेे लिए बाकायदा बजट पारित होता है लेकिन जि़ला रेड क्रॉस सोसायटी इनमें से किसी मद पर धन खर्च करती हो एसा नजऱ नहीं आता।

उदाहरण के लिए सोसायटी की ओर से टीबी मरीजों को पोषाहार किट बांटी जाती है, लेकिन किट सोसायटी खरीदती नहीं बल्कि सिद्धपीठ महाकाली मंदिर, डीएस केयर फाउंडेशन, लॉयनेस क्लब, या सुनीता गर्ग, नीरा गोयल आदि समाजसेवियों या विक्टोरा टूल्स कंपनी से बंटवाती है। इसी तरह रक्तदान शिविर भी सामाजिक संस्थाओं द्वारा ही आयोजित कराया जाता है। बीके अस्पताल स्थित सोसायटी का रिहैबिलिटेशन-फिजियोथेरेपी सेंटर में मशीनें और इमारत बनाने के लिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के की ओर से सीएसआर फंड जारी किया गया है। इसी तरह कामकाजी महिला आवास की इमारत की मरम्मत पर भी सोसायटी द्वारा एक रुपया नहीं खर्च किया जाता, यह खर्च विक्टोरा टूल्स नामक कंपनी के सीएसआर फंड से होता है। यानी सोसायटी के पास अपने कार्यक्रमों के लिए धन नहीं है लेकिन गिफ़्ट बांटने के लिए तुरंत फंड उपलब्ध हो जाता है।

संदर्भवश सुधी पाठक जान लें कि रेडक्रॉस में पैसा आता कहां से और कैसे है। आपने यदि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना तो सौ रुपये की रेडक्रॉस की पर्ची कटे बगैर नहीं
बनेगा। वाहन का रजिस्ट्रेशन कराना है तो भ रेडक्रॉस की मोटी रसीद कटेगी, भूमि की रजिस्ट्री करानी है तो भी पर्ची कटेगी, इसी तरह अनेकों काम जो जिला प्रशासन द्वारा लोगों के लिए किए जाते हैं उन सबमें रेडक्रॉस के लिए जनता की गर्दन दबा कर पैसे वसूल किए जाते हैं। यह प्रशासन की जबरी वसूली का एक बड़ा ज़रिया है जिसे लोगों के काम अटका कर वसूला जाता है।

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Mazdoor Morcha
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