चंडीगढ़ । आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने राज्य सूचना आयोग से आरटीआई में मिली जानकारी से खुलासा किया कि सूचना आयोग में आरटीआई के अंतर्गत विभिन्न अपीलों व शिकायतों के कुल 7216 केस लंबित हैं। आयोग में सूचना आयुक्तों व स्टाफ के वेतन पर पिछले बीस वर्षो में 92 करोड़ रुपये व कैपिटल हेड पर 36 करोड़ 39 लाख सहित कुल 1 अरब 28 करोड़ 39 लाख रुपये खर्च हुए हैं। जबकि पिछले बीस वर्षो में आरटीआई एक्ट बारे में जनता को जागरूक करने पर मात्र ढाई लाख रुपये खर्च किये गए, और पिछले 14 वर्षो में तो इस कार्य पर फूटी कौड़ी भी खर्च नहीं की गई।
समय से सूचना न देने के डिफाल्टर सूचना अधिकारियों पर आयोग ने कुल 5करोड़ 86 लाख का जुर्माना ठोंका, लेकिन इन सूचना अधिकारियों ने सिर्फ 2करोड़ 84 लाख रुपये ही जुर्माना जमा कराया, जबकि 3करोड़ 2 लाख की जुर्माना राशि इनसे वसूल करनी बाकी है। आयोग ने पिछले बीस वर्षो में कुल 92 लाख 22 हजार रुपयों की क्षतिपूर्ति या मुआवज़ा राशि भी आवेदकों को दोषी सूचना अधिकारियों से दिलवाई। इसी दौरान आयोग ने आरटीआई एक्ट की उल्लंघना व समय से सूचना न देने के कुल 1974 सूचना अधिकारियों के खिलाफ़ विभागीय कारवाई करने के लिये सरकार से अनुशंसा भी की।
आयोग की भारी विफलता का नमूना सूचना आयोग के पास प्रदेश के जन सूचना अधिकारियों व प्रथम अपीलीय अधिकरियों की सूची तक नहीं है। ऐसे में सूचना लेने के लिये आम जनता की हालत क्या होगी समझा जा सकता है। आवेदक किसको आरटीआई लगाएं, किसके पास प्रथम अपील करें? आयोग के पास इतनी भी सूचना नहीं है। र्देश भर में नियुक्त सभी राज्य जन सूचना अधिकारियों व प्रथम अपीलीय अधिकारियों को आरटीआई एक्ट-2005 की कोई ट्रेनिंग मिली है या नहीं।
लंबित केस निबटाने में आठ वर्ष लग सकते हैं। गत 1 जनवरी 2024 मे आयोग में लंबित विभिन्न केसों की कुल संख्या 8340 थी जो 31 दिसंबर 2024 मे घट कर 7216 रह गई। यानि पूरे वर्ष में सिर्फ 1124 पेंडिंग केसों का निबटान किया गया। यही गति रही तो लंबित केसों का निबटान होने में करीब आठ वर्ष लग सकते हैं। पीपी कपूर ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार आरटीआई एक्ट को पिछले दरवाज़े से खत्म कर रही है। सूचना अधिकारी समय से सूचना नहीं देते, और फिर सूचना आयोग में अपील करने पर कोर्ट से भी लम्बी तारीखें लगा कर अपीलकर्ताओं को धक्के कटाए जा रहे हैं। इसी कारण प्रदेश में आरटीआई एक्ट मज़ाक बन कर रह गया है।
कपूर ने सरकार से मांग की है कि आयोग में लंबित सभी केसों को युद्धस्तर पर समयबद्ध सीमा में निबटाने, आरटीआई एक्ट को प्रभावी ढंग से लागू करने, डिफाल्टर सूचना अधिकारियों से बकाया 3 करोड़ 2 लाख रुपये की जुर्माना राशि वसूल किए जाएं। साथ ही नियुक्त सभी जन सूचना अधिकारियों व प्रथम अपीलीय अधिकारियों को आरटीआई एक्ट -2005 की ट्रेनिंग दिलवाई जाए ताकि आम जनता को इस अधिकार लाभ मिल सके।