प्रिंसेज पार्क सोसायटी की आरडब्ल्यूए सरकारी संरक्षण में रेजिडेंट्स की जेब पर डाल रही डाका

प्रिंसेज पार्क सोसायटी की आरडब्ल्यूए सरकारी संरक्षण में रेजिडेंट्स की जेब पर डाल रही डाका
December 23 05:11 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सेक्टर 86 प्रिंसेज पार्क सोसायटी की आरडब्ल्यूए में पिछले दस साल से कब्जा जमाए केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के लगुए-भगुए अब उन सोसायटी वासियों को चुन चुन कर परेशान करने और लूटने में जुटे हैं जिन्होंने लोकसभा चुनाव में गूजर का खुलकर विरोध किया था। मंत्री गूजर की शह पर आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी झूठे-सच्चे आरोप लगाकर भारी जुर्माने लगाकर उन्हें आर्थिक प्रताडऩा का शिकार बना रहे हैं। बागी तेवर वाले इन सोसायटी वासियों ने भी गूजर के लगुए भगुओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, पुलिस-प्रशासन से लेकर कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल से भी न्याय की गुहार लगाई गई है, विपुल गोयल ने मामले में दखल दी है।

प्रिंसेज पार्क सोसायटी में करीब 1100 फ्लैट हैं, एल ब्लॉक निवासी वयोवृद्ध रेजिडेंट एसके शर्मा के अनुसार सभी सोसायटी वासियों से आरडब्ल्यूए प्रतिमाह औसतन पांच हजार रुपये की दर से करीब 55 लाख रुपये मेंटिनेंस चार्ज वसूलती है। यह शुल्क सोसायटी में कॉमन सेवाएं दुरुस्त रखने, साफ-सफाई, सीवर लाइन मेंटिनेंस, पेयजल आपूर्ति, जल निकासी, सिक्योरिटी, लिफ्ट, पार्क आदि पर खर्च किया जाता है। इतना मेंटिनेंस चार्ज प्रतिमाह भुगतान इसीलिए किया जाता है कि किसी भी समस्या का तुरंत समाधान किया जाए लेकिन रेजिडेंट्स को शिकायत करने के बाद समस्या समाधान के लिए कई कई दिन कभी तो हफ्तों का इंतजार करना पड़ता है।

सोसायटी वासियों के अनुसार मंत्री गूजर के इशारे पर आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी चुनाव में कृष्णपाल का विरोध करने वाले रेजिडेंट्स को तरह तरह से परेशान करने में लगे हैं। सोसायटी के एल टावर में रहने वाले विरोधियों को निशाना बनाने के लिए पहले तो सीवर लाइन की मोटर बंद कर दी गई, इससे सीवर का गंदा पानी हूडा की लाइन तक नहीं पहुंचा और सीवर जाम हो गया। पांच दिसंबर को भूतल पर रहने वाले गिरीश शर्मा और विकास जैन के घरों में सीवर ओवरफ्लो का गंदा पानी भरने लगा, दोनों ने ही सिक्योरिटी, मेंटिनेंस और आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों को समस्या से अवगत करा जल्द से जल्द दुरुस्त कराने को कहा। छह दिसंबर की सुबह साढ़े आठ बजे समस्या इतनी बढ़ गई कि इन दोनों के घरों में सीवर का गंदा पानी भर गया, यहां तक कि घर से बाहर भी आ गया।

प्लंबिंग मैनेजर रिजवान को बताया गया तो उसने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि प्लंबर दस बजे आएंगे उसके बाद ठीक करवाया जाएगा। मजबूर होकर परिवार वालों ने अपने खर्चे पर सफाई कर्मियों से गंदा पानी घर के बाहर निकलवाया। इसी दिन ब्लॉक की लिफ्ट खराब हो गई।

आरडब्ल्यूए वालों ने तुरंत दूसरी चाल चली और विकास जैन व गिरीश शर्मा पर लिफ्ट में पानी डालने जिसके कारण उसके खराब होने का आरोप लगा दिया। लिफ्ट मरम्मत का खर्च 93,406 रुपये बता कर इन दोनों पर इसे भरने का दबाव बनाया गया। गिरीश शर्मा और विकास जैन का कहना है कि लिफ्ट उनके कारण नहीं बल्कि सिक्योरिटी और मेंटिनेंस स्टाफ की कमी के कारण खराब हुई है यदि समय रहते सीवर ओवरफ्लो की समस्या खत्म कर दी जाती तो कथित तौर से खराब हुई लिफ्ट में कोई समस्या नहीं आती। आरोप है कि इसके बावजूद आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी इन लोगों पर रुपया जमा करने का दबाव बना रहे हैं और उन्हें परेशान किया जा रहा है।

बुजुर्ग एसके शर्मा ने मंत्री विपुल गोयल से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई, इसके बाद पुलिस जांच करने सोसायटी में पहुंची। पुलिस को सूचना दिए जाने से नाराज आरडब्ल्यूए के प्रधान विनोद ने उन्हें फोन कर धमकाया कि मैं पुलिस से सुलट लूंगा, अब तुम देखना ( कि तुम्हारे साथ क्या होगा)। वाइस प्रेसिडेंड रमणीक चहल ने भी उन्हें थाने में ही निपट लेने की धमकी दी। इस पर बुजुर्ग ने डीसी फरीदाबाद को ईमेल कर सुरक्षा की गुहार लगाई है।

आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी विरोधियों पर छोटी मोटी गलती के लिए भी मोटे जुर्माने लगाते हैं जबकि चहेतों को कुछ भी करने की छूट दे रखी गई है। एक अन्य रेजिडेंट नमेंदर सिंह ने बताया कि सोसायटी के जिम का फर्श टूट कर ऊबड़ खाबड़ हो चुका है, फर्श को न तो सही कराया गया है और न ही रबड़ शीट डाली गई है। जिम में लगे शीशे भी टूटे-फूटे हैं, 10 अक्तूबर को वह जिम कर रहे थे, डंबल जमीन पर डाला तो खराब फर्श से टकरा कर डंबल शीशे में लग गया, जिससे शीशे का थोड़ा सा भाग टूट गया, खास बात यह है कि यह शीशा पहले से ही टूटा हुआ भी था।

दो दिन बाद आरडब्ल्यूए ने उनको 12 हजार रुपये का बिल भेज दिया, नमेंद्र के अनुसार यह शीशा दो से तीन हजार रुपये में बदलवा सकते थे लेकिन कई गुना अधिक की मांग की जा रही है, नहीं भरने पर 18 प्रतिशत ब्याज लगाया जा रहा है। सभी लोगों का कहना है कि कॉमन एरिया फैसिलिटी में गलती से हुई टूट फूट की मरम्मत हर महीने वसूले जाने वाले 55 लाख रुपये में से की जानी चाहिए, यदि किसी ने जानबूझ कर नुकसान पहुंचाया है तब ही उससे पूरी रकम वसूली जाए, नमेंद्र के मामले में भी यदि फर्श सही होता और रबड़ मैट पड़ी होती तो डंबल उछल कर शीशे से नहीं लगता।

मंत्री गूजर का वरद्हस्त होने के कारण ये पदाधिकारी मारपीट करने में भी नहीं हिचकते, 29 अप्रैल 2024 को सोसायटी के बुजुर्ग रेजिडेंट सुबोध ग्रोवर को विनोद चावड़ी, रमणीक चहल उनके सहयोगी गौरव मेहता, पुनीत गुजराल आदि ने सोसायटी के मेन गेट पर रोक कर इसलिए जमकर पीटा था कि वह उनकी करतूतों का विरोध कर रहे थे। पिटाई की शिकायत देने के बावजूद आज तक पुलिस ने कुछ नहीं किया है और आरोपी बेखौफ होकर सोसायटी वासियों पर दहशत कायम किए हुए हैं।

दरअसल, प्राइवेट सोसायटियों में मेंटिनेंस चार्ज, जेनरेटर से बिजली सप्लाई, सिक्योरिटी आदि से बहुत मोटी कमाई होती है, इन सारी सोसायटियों के सारे ठेके केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर ने अपने चेले चपाटों को दिलवा रखे हैं। गूजर के ये तमाम स्थानीय लफंटर चेले चपाटे ही सोसायटियों में आरडब्ल्यूए बनाते हैं। ये गुुंडे रेजिडेंट्स से वसूले जाने वाले मेंटिनेंस चार्ज पर ही पलते हैं और आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी उन्हीं से मारपीट करने, डराने धमकाने के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने जिस तरह नवाबों से मोटा शुल्क वसूल कर उनके ही खर्च पर उनकी ही रियासत में अपनी फौज खड़ी की थी। इस फौज का इस्तेमाल फिर नवाबों से उनकी रियासत छीनने में किया, उसी तरह मंत्री गूजर के चेलों की फौज आरडब्ल्यूए से खर्च वसूल कर उनका ही शोषण करने में लगी है।

जिस तरह ईस्ट इंडिया कंपनी ने दिखावटी नवाबों को गद्दी पर बैठा कर शासन अपने हाथों में ले लिया था उसी तरह आरडब्ल्यूए के कठपुलती पदाधिकारी भी गूजर के चेलों के इशारों पर नाच रहे हैं। पुलिस-प्रशासन पर गूजर के अंकुश के कारण बेचारे सोसायटी वासियों की कहीं भी सुनवाई नहीे हो रही। अब देखना है कि शरण में आए रेजिडेंट्स को कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल न्याय दिला पाते हैं या नहीं। इसके अलावा गौरतलब यह भी है कि जिस गूजर का चुनाव में इन्होंने विरोध किया था वह तो बदले लेने में लगा है लेकिन जिस कांग्रेसी पार्टी का पक्ष लिया था उसका कहीं अता पता नहीं, जबकि उसके नेताओं का फर्ज बनता है कि वे इनके समर्थन मेें आकर खड़े हों। फिलहाल जो भी हो देखना ये है कि मंत्री विपुल गोयल किस हद तक अपनी ही पार्टी के एक नेता के विरुद्ध खड़े रह पाते हैं।

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Mazdoor Morcha
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