सैनिक कॉलोनी में तोडफ़ोड़
फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम ने हाईकोर्ट के आदेश के नाम पर सैनिक कॉलोनी अंतर्गत अचीवर्स कालोनी में तोडफ़ोड़ तो कर दी लेकिन केवल उन्ही अवैध निर्माणों पर पीला पंजा चलाया गया जिनके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका डाली गई और जिनसे वसूली नहीं हो पा रही थी। निगम ने इसी सेक्टर 49 में अपने एक्सईएन पद्मभूषण की, बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन कर बनाई गई, अवैध पांच मंजिला इमारत और इसकी ही तरह सैकड़ों अवैध इमारतों को छोड़ दिया है। छोड़ी भी क्यों न जातीं जब निगम के अधिकारियों की जेबें भर-भर कर उनकी मिलीभगत से बिल्डरों ने यह अवैध इमारतें बनाईं हुई हैं।
नगर निगम को यह तोडफ़ोड़ लोकसभा चुनाव से पहले यानी अप्रैल 2024 में ही करनी थी लेकिन सत्ता की कठपुतली बने निगम अफसर न्यायपालिका को अंधेरे में रख कर इसे टालते रहे। लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव के कारण एक बार फिर कार्रवाई रोक दी गई। लगता है कि हाईकोर्ट भी सत्ता के जाल में फंस गया और निगम को चुनाव नतीजे आने के बाद कार्रवाई करने का समय दे दिया। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि अवैध निर्माण के खिलाफ की गई कार्रवाई का निरीक्षण उसके द्वारा गठित कमेटी 18 अक्तूबर को करेगी, इसके बाद अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इस आदेश के पालन में नगर निगम ने तोडफ़ोड़ की।
अचीवर्स कॉलोनी ही नहीं बल्कि पूरी सैनिक कॉलोनी में 420 फ्लैट स्टिल्ट पार्किंग की जगह पर कब्जा कर बनाए गए हैं जबकि कई में बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन कर तीन की जगह चार मंजिलें बनाई गई हैं, कई में नक्शे के अतिरिक्त भी निर्माण किया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह सारा खेल बिल्डर और सत्ता की मिलीभगत से खेला गया था। तत्कालीन सीएम खट्टर केंद्रीयमंत्री कृष्णपाल गूजर, विधायक सीमा त्रिखा और पार्षद धनेश अदलखा, राकेश भड़ाना, भाजपा नेता राजीव जेटली की सहमति से ही बिल्डर ने स्टिल्ट पार्किंग, नक्शे के अतिरिक्त निर्माण आदि अवैध काम किए। माना जाता है कि बिल्डरों को आश्वासन मिला हुआ था कि इस निजी कॉलोनी को नगर निगम में शामिल करा सब कुछ दुरुस्त करा दिया जाएगा। संभवत: इसी कारण राजस्व विभाग ने भी बिना एनओसी और जांच किए ही इन अवैध फ़्लैटों की बाकायदा रजिस्ट्री भी कर दी।
आरटीआई कार्यकर्ता कृष्णलाल गेरा ने 2016 में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सैनिक कॉलोनी में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। हाईकोर्ट ने इन अवैध निर्माण को तोडऩे का आदेश सितंबर 2017 में ही दिया था लेकिन खट्टर-गूजर के इशारे पर प्रशासन और निगम किसी न किसी बहाने इन्हें टालता रहा। जानकारों के अनुसार खट्टर ने इन अवैध निर्माणों को वैध करने के लिए जनवरी-फरवरी 2023 में एक महीने के लिए स्टिल्ट प्लस चार मंजिल वाले मकानों को रेगुलराइज करने का फरमान भी जारी किया था। हाईकोर्ट में केस होने के कारण अचीवर्स कॉलोनी को इसका लाभ नहीं मिल सका लेकिन सत्ता के चहेते अनेक बिल्डरों ने अपनी अवैध बिल्डिंगें रेगुलराइज कराई थीं। एक महीने बाद ही यह पॉलिसी वापस ले ली गई थी। 2024 में भी लोकसभा चुनाव में लाभ पाने के लिए खट्टर-सैनी सरकारों ने स्टिल्ट प्लस चार पॉलिसी का चुग्गा फेका था। बाद में हाईकोर्ट द्वारा आपत्ति दर्ज किए जाने पर इस पर चुप्पी साध ली गई थी।
अब हाईकोर्ट में कार्रवाई दिखाने के लिए निगम ने कॉलोनी में तोडफ़ोड़ शुरू कर दी है, जानकारों के अनुसार तोड़े तो पूरे 420 मकानों के अवैध निर्माण जाने हैं लेकिन जिस तरह कार्रवाई चल रही है उससे नहीं लगता कि सौ अवैध निर्माण भी टूट पाएंगे। यह भी आरोप लग रहे हैं कि निगम अधिकारी तोडफ़ोड़ भाजपाई और गैर भाजपाई की पहचान कर कर रहे हैं। अभी तक उन लोगों के मकानों पर हथौड़े चलाए गए हैं जिन्हें भाजपा विरोधी समझा जाता है या जिनकी सत्ता में कोई पकड़ नहीं है। सत्ता पक्ष के मकान वालों को अपने आप ही निर्माण ढहाने के आश्वासन पर छोड़ दिया जा रहा है।
सुधी पाठकों को बताते चलें कि नगर निगम केवल उन्हीं इमारतों की तोडफ़ोड़ करने का पाखंड कर रहा है जिनके खिलाफ हाईकोर्ट ने आदेश दिया है। 2016 से आज तक सेक्टर 49, सैनिक कॉलोनी और उसके आसपास सैकड़ों अवैध इमारतें बनाई गईं, यहां तक कि वर्तमान में भी बन रही हैं लेकिन निगम उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा। जानकारों के अनुसार सेक्टर 49 में सैनिक कॉलोनी से लगी हुई कृषि भूमि पर बिना सीएलयू, सब डिवीजन कराए ही पांच-पांच मंजिला इमारतें बनाई जा रही हैं, इन इमारतों का तीन मंजिल का नक्शा भी नगर निगम ने पास किया हुआ है। समझा जा सकता है अधिकारियों द्वारा मोटी रकम खाने के बाद ही नक्शा पास किया गया होगा। इन अवैध निर्माणों में नगर निगम के एक्सईएन पद्मभूषण की पारिवारिक सदस्य स्वाति नासवा की पांच मंजिला इमारत भी शामिल है। संयुक्त आयुक्त जीतेंद्र कुमार तो कई बार दावा कर चुके हैं कि यह इमारत तोड़ी जाएगी लेकिन सील भी नहीं करा पाए।
सर्वविदित है कि सैनिक कॉलोनी ही क्या पूरे शहर में बिल्डिंग बायलॉज की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पार्किंग की जगह पर दुकानें, बच्चा फ्लैट बना कर बेचे जा रहे हैं, तीन मंजिल पर चौथी और पांचवीं मंजिल भी बनाई जा रही हैं। गरीबों के अतिक्रमण और अवैध कब्जों को आनन फानन गिराने वाले नगर निगम के अधिकारियों को यह अवैध निर्माण इसलिए नजर नहीं आते कि बिल्डरों ने उनकी आंखों पर नोटों का मोटा चश्मा चढ़ा दिया है। सैनिक कॉलोनी में भी केवल उतने ही मकानों को चुन कर तोड़ा जाएगा जितने से हाईेकोर्ट संतुष्ट हो जाए। बहुत संभव है कि हाईकोर्ट में बैठे सत्ता का पक्ष लेने वाले जज निगम की कार्रवाई को पर्याप्त मान कर केस बंद कर दें।
यदि हाईकोर्ट वास्तव में ही अवैध निर्माणों का ध्वस्त अथवा समाप्त करना चाहता है तो उसे निगमायुक्त से एक शपथपत्र की मांग करनी चाहिए जिसमें वह घोषित करे कि उसके अधिकार क्षेत्र में कितने अवैध निर्माण बने हुए हैं, कब से बने हुए हैं और कितने निर्माणाधीन हैं, यदि हाईकोर्ट एसा एक आदेश जारी कर दे तो दूध का दूध पानी का पानी स्पष्ट हो जाएगा, और रोज रोज के ये खेल तमाशे करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।