‘हूडा’ द्वारा 44 करोड़ की लागत से बनाई गई इमारत का कब्जा सरकार ने लिया बल्लबगढ़ (मज़दूर मोर्चा) बीते करीब 20 साल से यहां नर्सिंग कॉलेज बनाने का ड्रामा विभिन्न सरकारें करती रही हैं। रोते-पीटते इस वर्ष के शुरू में ‘हूडा’ विभाग ने 44 करोड़ की लागत से इसके लिए बेहतरीन बिल्डिंग का निर्माण कार्य पूरा कर दिया था। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद हरियाणा सरकार का मेडिकल एजुकेशन विभाग इसका कब्जा लेने को तैयार नहीं था। वह तरह-तरह से टाल-मटोल करके इससे बचता रहा। ‘हूडा’ की ओर से अत्यधिक दबाव डालने से बीते शुक्रवार तीन अक्टुबर को हरियाणा सरकार के नरेश कुमार नामक किसी ओएसडी ने इसका औपचारिक कब्जा लेकर अपने चौकीदार तैनात कर दिए है।
समझने वाली बात यह है कि इतनी भारी-भरकम रकम खर्च करके केवल चौकीदार नहीं बैठाए जाने चाहिए। जिस नर्सिंग कॉलेज के लिए इसका निर्माण किया गया है वह क्यों नहीं शुरू किया गया? विदित है कि राज्य में इस तरह के कॉलेजों की सख्त जरूरत है। इससे न केवल युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे बल्कि अस्पतालों में इनकी कमी भी दूर हो पाएगी। परन्तु राज्य सरकार को इन सब बातों से क्या लेना-देना? यदि सरकार की जनहित में कोई रुचि होती तो समय रहते नर्सिंग कॉऊंसिल में इसके लिए आवेदन दायर किया जाता और कॉऊंसिल के निरीक्षण से पहले पूरा स्टाफ, फैकल्टी व अन्य आवश्यक साजो-सामान यहां लगा दिया जाता।
नर्सिंग कॉऊंसिल के नियमानुसार इस तरह के कॉलेज के साथ किसी बड़े अस्पताल का होना जरूरी होता है। सरकारी होने के चलते इस कमी को छांयसा स्थित अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज से जोड़ कर काम चला लिया जाएगा, परन्तु यह सब तो तब होगा न जब नर्सिंग कॉलेज चलाने की बाकि कवायद पूरी कर ली जाए। जाहिर है इस तरह की कवायद पूरी करने यानी तमाम तरह की भर्तियां व साजो-सामान खरीदने के लिए पैसा खर्च होता है लेकिन सरकार के पास इस तरह के जन उपयोगी काम के लिए सदैव ही पैसे का आभाव रहता है। हां, बर्बाद करने के लिए सरकार के पास कभी भी पैसे की कोई कमी नहंी रहती। इसके लिए तो हरियाणा सरकार कर्ज लेने में भी कतई नहंी हिचकती। विदित है कि 2014 में जब भाजपा ने सत्ता सम्भाली थी तो राज्य पर मात्र 45 करोड़ का कर्ज था जो अब बढ़ कर करीब 250 करोड़ हो गया है। गौरतलब है कि नवम्बर 1966 में बने हरियाणा पर 2014 तक मात्र 45 करोड़ कर्ज हुआ और भाजपा के 11 वर्षों में 200 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज हो गया। इस इतने भारी-भरकम कर्ज से भाजपा सरकार ने कोई काम किया हो, वह तो नजर आता नहीं, जाहिर है कि ऐसे में इतनी बड़ी रकम भाजपाई नेता व इनके लगुए-भगुए डकार गए।
इस नर्सिंग कॉलेज के अलावा ऐसे ही एक और नर्सिंग कॉलेज की चर्चा अरूआ गांव में बनाए जाने की चल रही है। इस तरह की चर्चाएं चलाना नेताओं द्वारा केवल इसलिए जरूरी होती है कि स्थानीय लोग नेताओं के आगे-पीछे घुमते रहें। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस गांव में नर्सिंग कॉलेज की आधी-अधूरी बिल्डिंग बन भी चुकी है। यह गांव मंझावली से तिगांव की ओर जाने वाली सड़क पर स्थित होने के चलते इस कॉलेज को भी अटल बिहार मेडिकल कॉलेज से जोड़ कर खानापूर्ति की जाएगी। वैसे यह नौबत भी कोई जल्दी आनेवाली नहीं है क्योंकि हरियाणा सरकार के पास इस तरह के नर्सिंग कॉलेजों को चलाने के लिए पैसा नहीं है।
संदर्भवश सुधी पाठक यह भी जान लें कि सिविल अस्पताल पलवल के परिसर में नर्सिंग कॉलेज की एक बिल्डिंग 2017 से बन कर तैयार खड़ी है लेकिन उसे चलाने की जरूरत सत्तारूढ़ नेताओं को कभी महसूस नहीं हुई। फिलहाल इस बिल्डिंग में सिविल सर्जन का दफ्तर चल रहा है और आगे भी चलता रहेगा।