पुलिस द्वारा लगाये गए नाके की भेंट चढ़ गया युवक पवन

पुलिस द्वारा लगाये गए नाके  की भेंट चढ़ गया युवक पवन
November 24 13:49 2021

पलवल (म.मो.) 14 नवम्बर के अखबारों में खबर छपी थी कि सड़क दुर्घटना में मोटरसाइकिल सवार 21 वर्षीय पवन मारा गया व उसका 20 वर्षीय साथी विकास अति गंभीर रूप से घायल हो गया। सम्बन्धित गांव फिरोजपुर  वालों ने इस पर विरोध प्रदर्शित करते हुए करीब पांच घंटे तक हाईवे को जाम कर दिया था और निकट ही स्थित ट्रेफ़िक थाने पर धावा बोल दिया था। जिसके चलते तमाम पुलिस वाले थाना छोड़ कर भाग खड़े हुए। मौके पर पहुंचे पुलिस बल व एसडीएम द्वारा मृतक परिवार को पांच लाख रुपये बतौर मुआवजा व एक नौकरी देने का झांसा देकर जाम खुलवा दिया। लेकिन उसी दिन पुलिस ने बीसियों नामजद व सैंकड़ों अन्य ग्रामीणों के विरुद्ध सड़क जाम करने व अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया।

यह था कि गांव फिरोजपुर से निकल कर हाईवे पार करने के लिये वहां फ्लाईओवर बना हुआ है ताकी हाईवे के यातायात में कोई रुकावट डाले बगैर ग्रामीणों का आवागवन होता रहे। अब यहां समझने वाली असल बात, जिसे मीडिया ने छिपा लिया, यह है कि पलवल पुलिस ने इस फ्लाईओवर की बगल में, पलवल की ओर जाने वाली सर्विस लेन पर एक नाका लगा रखा है। कहने को यहां ट्रकों आदि को इसलिये रोका जाता है कि पलवल शहर में भीड़ न बढ़ जाये। ‘नो एंट्री’ टाईम पूरा होने के बाद इन ट्रकों को पलवल शहर पार करने के लिये छोड़ा जाता है। अपनी आदत एवं रवायत के अनुसार पुलिस वाले उन ट्रकों को भी ‘नो एंट्री’ टाइम में जाने देते हैं जो 100 रुपये बतौर ‘एंट्री फीस’ उन्हें दे जाये।

इस मामले में एक ट्रक ड्राइवर ने नाके पर रुकने की बजाय ट्रक को पूरी गति से सर्विस लेन पर पलवल की ओर दौड़ा दिया। गौरतलब है कि आधी सर्विस लेन पर ट्रक खड़े थे इसलिये भगोड़े ट्रक के लिये सविंस लेन पर पर्याप्त जगह नहीं थी। पुलिस द्वारा पकड़े जाने के भय से वह सरपट ट्रक को भगाता ले गया। उधर पवन अपने साथी विकास के साथ गांव की ओर से सर्विस लेन पर आकर पलवल की ओर करीब 80 मीटर तक निकल चुका था कि पुलिस डर के मारे भागते हुए ट्रक ने उन्हें पीछे से टक्कर मार कर दोनों को इस कदर कुचल दिया कि पवन न केवल मौके पर मारा गया बल्कि उसका शरीर ट्रक के पिछले पहियों में फंस कर रह गया जिसके चलते ड्राइवर ट्रक छोड़कर भाग गया।

कुल मिलाकर पुलिस को दिये जाने वाले 100 रुपये बचाने के चक्कर में ट्रक वाले ने उक्त कांड कर डाला। इसे यों कहना ज्यादा बेहतर होगा कि पुलिस ने अपनी वसूली के चक्कर में एक युवक की हत्या करवा दी व दूसरे को गंभीर रूप से घायल करा दिया। मौके पर पहुंची एसडीएम वैशाली ने ग्रामीणों को तात्कालिक रूप से संतुष्ट करने के लिये नाके पर मौजूद दो होमगार्डों व एक पुलिसकर्मी के खिलाफ नाम मात्र का मुकदमा दर्ज करा दिया। जिसमें होना-जाना कुछ नहीं। वास्तव में यह हत्या का मुकदमा एसपी पलवल के विरुद्ध दर्ज होना चाहिये था जिसके आदेश पर लूट-पाट का नाका लगा हुआ है। दूसरी ओर ट्रक वाले के खिलाफ भी कोई हत्या का मुकदमा तो दर्ज हो नहीं सकता, केवल दुर्घटना का ही केस बनता है। जिसमें अधिकतम तीन साल की सज़ा हो सकती है। सज़ा चाहे ज्यादा भी हो जाये, जिस घर का चिराग बुझ गया वह तो दोबारा जलने से रहा।

शहर में जाम क्यों रहता है?
इस जाम के लिये शासन-प्रशासन पूरी तरह से उत्तरदायी हैं। शहर के बीचों बीच से गुजरने वाली जीटी रोड पर जब अतिक्रमण व अवैध कब्जे होने से सड़क की चौड़ाई घटती चली गई तो वहां बाइपास का निर्माण किया गया। लेकिन प्रशासन की शिथिलता एवं भ्रष्टाचार के चलते चार लेन का बाइपास व उसके दोनो ओर बनी सर्विस लेन भी यातायात के लिये कम पडऩे लगी।

प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करके यातायात की व्यवस्था को सुधारने की अपेक्षा करीब पांच साल पहले एलिवेटीड बाइपास यानी बाइपास के ऊपर बाइपास निर्माण का कार्य शुरू किया गया था। इसके पूरा होने की फिलहाल कोई सम्भावना नज़र नहीं आ रही क्योंकि निर्माण कार्य लम्बे समय से बंद पड़ा है। इसके चलते वहां से यातायात का निकलना और भी दुभर हो गया है।

पवन के दादा पर क्या बीती होगी?
कुछ वर्ष पूर्व पवन के पिता का देहांत हो चुका था और उससे कुछ समय पूर्व उसकी दादी भी परलोक सिधार चुकी थी। बूढ़े दादा महेन्द्र का ले-देकर एक मात्र सहारा अब पवन ही बचा था जो इस क्रूर एवं भ्रष्टाचार में डूबी ब्यवस्था ने निगल लिया। सोचिये ज़रा जिस 85 वर्षीय बुजुर्ग ने एक ही साल के भीतर पहले अपनी पत्नी, फिर अपने बेटे के शव को कंधा दिया हो, उसने किस तरह अपने पोते के शव को कंधा दिया होगा? लेकिन इस संवेदनहीन शासन व्यवस्था को इससे क्या लेना-देना? लोग तो मरने के लिये ही होते हैं सो मरते रहते हैं।

दोषी हैं एसपी दुग्गल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुंसार इस नाके पर तैनाती पाने के लिये होमगार्ड 1000 रुपये प्रति दिन अपने अफसर को देता था। समझा जा सकता है कि जो 1000 देकर लगेगा वो कम से कम 2000 तो लूटेगा ही। नाका इंचार्ज पुलिस अधिकारी भी इस नाके का बाकायदा ठेका उठाकर यहां तैनाती पाता है। यदि सूत्रों की माने तो ठेके की यह रकम एक लाख रुपये मासिक बताई जाती है।

ऐसा ही एक नाका पलवल के होडल वाली साइड में भी लगा हुआ है, जो होडल साइड से आने वाले तमाम वाहनों को नो एंट्री के नाम पर लूटता है। यह ठेके कोई और नहीं पलवल जि़ले के एसपी राजेश दुग्गल द्वारा छोड़े जाते हैं। संदर्भवश सुधी पाठक जान लें कि दुग्गल साहब, सिरसा लोक सभा क्षेत्र से निर्वाचित सांसद सुनीता दुग्गल के पति हैं। सुनीता दुग्गल काफी हाथ-पैर जोड़कर इन्हें जि़ले की तैनाती दिलवाती हैं, लेकिन ये साहब कहीं भी दो-चार माह से अधिक टिकते नहीं क्योंकि ये तैनाती पाते ही एकदम ‘स्पीड’ पकड़ लेते हैं।

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Mazdoor Morcha
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