करनाल (मज़दूर मोर्चा)। करनाल जिले में धान मिलिंग से जुड़े घोटाले का दायरा अब और गहराता जा रहा है। जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि जिन राइस मिलों से फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान सरकारी धान गायब मिला था, अब उन्हीं मिलों में उत्तर प्रदेश और बिहार से सस्ती धान ट्रक भरकर लाई जा रही है। ये धान रोजाना दर्जनों ट्रकों में करनाल की राइस मिलों में पहुंच रहा है, जबकि प्रशासन का दावा है कि सीमाओं पर कड़ी नाकेबंदी की गई है और किसी बाहरी प्रदेश से धान लाने कीअनुमति नहीं है। जिले के सग्गा व सांभली गांव के पास कई राइस मिलों के बाहर इन दिनों ट्रकों की लंबी कतारें लगी दिखाई दे रही हैं। ये ट्रक उत्तर प्रदेश और बिहार से पीआर धान और चावल लेकर आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, शिनॉय राइस मिल, मित्तल राइस मिल सहित अन्य मिलों में हाल ही में प्रशासन की जांच में करीब 25 हजार कट्टे धान कम पाए गए थे, लेकिन अब इन्हीं मिलों में बाहरी धान की सप्लाई शुरू हो चुकी है।
जिले के सग्गा व सांभली गांव के पास कई राइस मिलों के बाहर इन दिनों ट्रकों की लंबी कतारें लगी दिखाई दे रही हैं। ये ट्रक उत्तर प्रदेश और बिहार से पीआर धान और चावल लेकर आ रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिनॉय राइस मिल, मित्तल राइस मिल सहित अन्य मिलों में हाल ही में प्रशासन की जांच में करीब 25 हजार कट्टे धान कम पाए गए थे, लेकिन अब इन्हीं मिलों में बाहरी धान की सप्लाई शुरू हो चुकी है। करनाल उपायुक्त ओर से दावा किया जा रहा है कि शेरगढ़ टापू और मंगलौरा नाके पर निगरानी कड़ी की गई है और यूपी से धान की एंट्री पर रोक है। जब शुक्रवार देर शाम को इन मिलों के बाहर का निरीक्षण किया तो तो इनके बाहर दर्जनों ट्रक यूपी की धान व चावल से भरे खड़े मिले। इनके अतिरिक्त भी जिले भर में हर रोज सैकड़ों ट्रक करनाल की सीमाओं में दाखिल होकर मिलों तक पहुंच रहे हैं।
इससे साफ तौर से स्पष्ट है कि या तो सीमाओं पर नाकेबंदी दिखावे की है या फिर उसमें अंदरूनी मिली भगत दर्शाती है। धान घोटाले का यह मामला तब चर्चा में आया जब प्रशासन ने खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान फिजिकल वेरिफिकेशन शुरू किया। जांच टीम ने पाया कि सलारू रोड स्थित मैसर्ज बटान फूड्स राइस मिल को मिलिंग के लिए दी गई सरकारी धान में 33,759 बैग यानी करीब 12,659 क्विंटल धान कम पाया गया। इस गायब धान की कीमत करीब 3 करोड़ 54 लाख 46 हजार 936 रुपए बताई गई। जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक अनिल कुमार की शिकायत पर थाना सदर करनाल में एफआईआर दर्ज कराई गई। इसमें बटान फूड्स के संचालक सतीश कुमार, घरौंडा मंडी के निरीक्षक यशवीर सिंह, जुंडला मंडी के निरीक्षक संदीप शर्मा, करनाल मंडी के निरीक्षक समीर वशिष्ठ, निसिंग के निरीक्षक लोकेश, तरावड़ी के सचिव संजीव सचदेवा और सब इंस्पेक्टर रामफूल को नामजद किया गया है। जांच में सामने आया कि इन सभी ने धान के स्टॉक का रिकॉर्ड फर्जी बनाया और वास्तविक मात्रा से अधिक स्टॉक दिखाया गया।
रिकॉर्ड के अनुसार, 25 अक्तूबर तक बटान फूड्स को 67,013 बैग पीआर धान (25,129.87 क्विंटल) अलॉट की गई थी। जब टीम ने जांच की, तो मिल परिसर में केवल 33,254 बैग मिले। वहीं, भाटिया ओपन प्लेंटी जुंडला में 30,853 बैग धान दिखाया गया, लेकिन उस प्लेंटी पर बटान फूड्स को स्टॉक रखने की कोई अनुमति नहीं थी। जब दोनों स्थानों का मिलान किया गया, तो पाया गया कि भाटिया प्लेंटी पर रखा स्टॉक बटान फूड्स का नहीं था मार्केट कमेटी जुंडला की रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा गया कि भाटिया प्लेंटी में बटान फूड्स का कोई स्टॉक नहीं है। दौराने जांच मिल संचालक सतीश कुमार मौके पर मौजूद था। उसने झूठे फर्जी दस्तावेज पेश कर जांच टीम को गुमराह करने की कोशिश की और अपने हस्ताक्षरों के साथ गलत जानकारी रिपोर्ट में लिखवाई। लेकिन जब गिनती और रिकॉर्ड का मिलान हुआ, तो पूरी सच्चाई सामने आ गई कि धान के स्टॉक में भारी गड़बड़ी हुई है।
इस मामले पर जिला उपायुक्त ने बताया कि कई शिकायतें मीडिया और नागरिकों के माध्यम से भी आई थीं कि कुछ गलत गेट पास काटे गए हैं और गलत खरीद हुई है। इसलिए सबसे पहले धान की फिजिकल वेरिफिकेशन करवाई गई। अब अतिरिक्त उपायुक्त के नेतृत्व में यह जांच भी चल रही है कि कितने गेटपास जारी हुए और कितनी गाडिय़ां वास्तव में धान लेकर आईं। इसके लिए सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है। इस प्रकरण में तरावड़ी सबयार्ड में भी गड़बड़ी, सचिव ने दी सफाई तरावड़ी मंडी के सग्गा सब यार्ड में भी धान के स्टॉक को लेकर विवाद है। डीसी ने बताया कि कुछ मिलों ने वहां पड़ा धान अपना बताया, जबकि फिजिकल जांच में पाया गया कि मिलों के दावे वास्तविक स्टॉक से अधिक हैं। उन्होंने कहा कि सचिव अपने स्तर पर स्टॉक रखने की अनुमति नहीं दे सकते, यह अधिकार उनके दायरे में नहीं आता।
सूत्रों के अनुसार, बटान फूड्स पहले भी डिफॉल्टर रह चुकी है। बावजूद इसके इस बार उसे अलॉटमेंट दे दी गई। जब इस पर उपायुक्त से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि यह बात उनके संज्ञान में नहीं है। अगर मीडिया के पास कोई सबूत या जानकारी है, तो उसे साझा करें-जांच के बाद कार्रवाई निश्चित की जाएगी। डीसी ने कहा कि शेरगढ़ टापू, मंगलौरा नाके के अलावा सोनीपत और पानीपत रूट पर भी नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने सभी एंट्री पॉइंट्स पर टीमें तैनात की है ताकि बाहर की बाहरी धान की एंट्री पूरी तरह से रोक लगाई जा सके। हालांकि जमीनी स्तर पर जो तस्वीर सामने आ रही है वह इसके बिलकुल विपरीत है। जिला प्रशासन ने इस घोटाले के बाद संबंधित अधिकारियों और मिलर से रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उपायुक्त ने कहा कि अभी यह जांच प्रारंभिक स्तर पर है और आगे की जांच में अगर और नाम सामने आते हैं तो उन पर भी कार्रवाई होगी। यह पूरा मामला सरकारी धन के गबन और फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने से जुड़ा है, जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इस घोटाले ने करनाल जिले के धान मिलिंग सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर प्रशासन यह दावा कर रहा है कि सभी मिलों की निगरानी कड़ी की गई है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं मिलों में बाहरी प्रदेशों से धान की आवक जारी है।
फिलहाल यह मामला केवल एक राइस मिल तक सीमित नहीं लग रहा। कई अन्य मिलों पर भी शक सुई घूम रही है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में अन्य मिलों की भी फिजिकल वेरिफिकेश की जाएगी ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके। करनाल जिले में धान मिलिंग के नाम पर हुआ यह बड़ा घोटाला सरकारी सिस्टम की पोल खोल रहा है। फिजिकल जांच में सरकारी धान की भारी कमी, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल और बाहरी प्रदेशों से सस्ती धान की सप्लाई- यह सब संकेत देते हैं कि भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हैं।