फुर्सत में दो शब्द

फुर्सत में दो शब्द
September 29 17:32 2025

डॉ. रामवीर
यूं तो ‘दो शब्द’ शीर्षक पुस्तकों की भूमिका के लिए रूढ़ हो चुका है जिसमें दो शब्द के नाम से दो हजार शब्द भी परोसे जा सकते हैं। अपनी ‘रिलिजिअसली ऑनेस्ट’ छवि के दृष्टिगत लेखक दो शब्दों की ही बात कर रहा है। पहला है विकास। प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जहां देखो विकास ही विकास दिखाई/सुनाई देता है। लगता है शब्दों का भी भाग्य होता है, कब किसका भाग्योदय हो जाए कहा नहीं जा सकता। वि उपसर्गपूर्वक कस धातु से निष्पन्न संस्कृत शब्द विकास का अर्थ होता है खिलना, जैसे पुष्पविकास:(फूल का खिलना) विकसितं पुष्पम् (खिला हुआ फूल)।

थोड़ा अर्थविस्तार हुआ तो मुस्कुराते चेहरे वाली सुन्दरी के लिए विकसद्वदना/विकसितवदना जैसे विशेषण भी प्रचलित हुए। कल पोती से विकास का अर्थ पूछा तो बोली सड़क। इंग्लिश माध्यम के विद्यालयों में पढऩे वाले विद्यार्थियों के हिन्दी ज्ञान पर चिन्ता हुई। सभी विषयों के पढऩे/पढ़ाने का माध्यम इंग्लिश होने के कारण अन्य विषयों और हिन्दी विषय का रिश्ता कुछ ऐसा हो गया है जैसे समाज में सवर्णों और पिछड़ों का! बच्चों की गलती नहीं है, बच्चे वातावरण से ही सीखते हैं। बच्चे सुनते हैं विकास हो रहा है और देखते हैं सड़कें बन रही हैं तो बालमन मान लेता है कि सड़कें ही विकास हैं। चलो छोडि़ए, बच्चों की बातें बच्चों की होती हैं। विचारणीय वे बूढ़े बच्चे हैं जो विकास पर विचार करने से बचते हैं।

वास्तविक विकास क्या होता है जैसे प्रश्न उनके ऊषर मस्तिष्क में उगते ही नहीं। असल में तो प्रश्न ही विकास के बीज होते हैं। जो समाज प्रश्न पूछने को निरुत्साहित करता है वह अविकसित रहने के लिए अभिशप्त होता है। मानव के अद्यावधि विकास का इतिहास बताता है कि कुछ प्रश्नों के उत्तर खोजने के प्रयास की परिणति ही विकास है। अतीत की अतिरंजित उत्कृष्टता और भविष्य की आनुमानिक श्रेष्ठता में रमने वाला मन वर्तमान की चुनौतियों से आंखें चुराने में ही राहत देखता है। ऐसे मनोलोक के वासी लोग समाज को ‘चढ़ जा बेटा सूली पर भली करेंगे रामÓ वाली राह दिखाने में भलाई देख सकते हैं। राजनीतिक क्षेत्र में विकास शब्द का प्रयोग भी रोचक है। वैसे तो हर दल और हर नेता विकास को वीअरिंग ऑन द स्लीव्स की तरह बरतता है पर जब कोई नेता अपने दल में असुविधाजनक स्थिति में आता है तो नया दल बनाने के लिए विकास का बहाना बनाता है।

हरियाणा के विकास पुरुष कहाने वाले चौधरी बंसीलाल का जब कांग्रेस में दम घुटने लगा तो उन्होंने हरियाणा विकास पार्टी (हविपा) बना ली। जनता जानती है कि यहां विकास एक गिमिक की तरह था। हविपा और भाजपा दोनों ने मिल कर निजी राजनीतिक उल्लू तो सीधा कर लिया पर विकास उससे चौथाई भी नहीं हुआ जितना चौ. बंसीलाल ने कांग्रेस में रहते हुए अकेले किया था। अमुक नगर में इतने करोड़ के विकास की घोषणा जैसे समाचार सुन कर जनता सुविधाएं बढऩे का स्वप्न देखने लगती है उधर नेता अधिकारी और ठेकेदार अपनी कमाई का एस्टीमेट लगा कर टीम वर्क में जुट जाते हैं। विकास शब्द का दुर्भाग्य देखें कि खिलना जैसे सामान्य अर्थ से यात्रा शुरू करने वाला यह शब्द भ्रष्टाचार वाचक हो जाने की पीड़ा झेलने को मजबूर है !

व्यक्ति वाचक नामों का वर्ग पृथक् है। विकास नाम वाले मित्र अन्यथा न लें, विकास बड़ा प्यारा नाम है। लेखक की मित्र मण्डली में न्यू एंट्री है श्री विकास शर्मा, अभी परिवीक्षाधीन हैं, देखते हैं मैत्री भाव के ग्राफ का विकास किस ऊंचाई तक जाता है। दो शब्द शीर्षक से लिखना प्रारम्भ करते हुए एक ही शब्द स्मृति में था, अब जब उसका किस्सा पूरा हुआ तो दूसरा शब्द सूझा है प्रकाश। लघु लेख में प्रकाश पर प्रकाश डालने का अवकाश (स्कोप) तो नहीं बचा, इतने से काम चलाएं कि गत मास प्रकाश नामा पुराने मित्र का बीस साल बाद फोन आया था। ओल्ड फ्रैंड्स स्मैल लाइक विंटेज वाइन! लेखक टीटोटलर है, हां अल्कोहलिक्स के मुहावरों का शौकीन हैं। अगली फुर्सत में प्रकाश पर बात होगी।

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Mazdoor Morcha
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