फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नई सरकार ने अभी तक किसी परियोजना की घोषणा नहीं की है लेकिन एफएमडीए के अधिकारी लूट कमाई की संभावनाओं को तलाशते हुए ईस्ट वेस्ट कनेक्टिविटी परियोजना का राग फिर से अलापने लगे हैं। एफएमडीए के चीफ इंजीनियर रमेश बागड़ी ने तो दावा कर दिया कि एक सप्ताह में काम शुरू कराने के लिए अधिकारियों को टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का आदेश भी उन्होंने दे दिया है। सरकार दस साल में मंझावली पुल प्राजेक्ट, ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे, बल्लभगढ़ रेलवे ओवरब्रिज फोर लेन प्रोजेक्ट आदि महत्वपूर्ण कार्य तो पूरे करा नहीं सकी है। ईस्ट-वेस्ट प्रोजेक्ट की अभी न तो डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनी, न ही बजट पास हुआ है, ऐसे में बागड़ी किस आधार पर टेंडर जारी करवाना चाह रहे हैं समझ के परे ही है।
साढ़े चार साल तक भ्रष्टाचार, लूट मार करने वाली सरकार चुनाव के मद्देनजर अंतिम छह महीनों में जनता को सुनहरे ख्वाब दिखाने के लिए बड़ी बड़ी परियोजनाएं शुरू करने के जुमले उछालती है। जुमलेबाज़ प्रधानमंत्री मोदी से यह कला सीखने वाले सीएम नायब सैनी ने जुलाई 2024 में घोषणाओं की झड़ी लगा दी थी। इसमें से एक 1350 करोड़ के फरीदाबाद ईस्ट-वेस्ट कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट की मंजूरी दिए जाने घोषणा भी है। बताया गया था कि बडख़ल रूट पर पांच फ्लाईओवर, पांच यू-टर्न और अनखीर चौक (सूरजकुंड की तरफ से) पर कनेक्टिंग फ्लाईओवर बनाया जाएगा। इसके साथ, एप्रोच रोड, सर्विस रोड और ड्रेनेज सुविधाओं को पूरा किया जाएगा। इसी तरह बाटा रूट के प्रॉजेक्ट में चार फ्लाईओवर, तीन यू-टर्न, एक अंडरपास और मस्जिद चौक पर मुल्ला होटल की ओर कनेक्टिंग फ्लाईओवर बनाया जाएगा। एप्रोच रोड, सर्विस रोड और ड्रेनेज सुविधाओं को पूरा किया जाएगा।
यह तो बताया गया था कि क्या बनाया जाएगा लेकिन इसके लिए जरूरी जमीन उपलब्ध है या नहीं यह नहीं बताया गया, प्रोजेक्ट के रास्ते में आने वाली अड़चनों का अध्ययन भी अभी तक नहीं किया गया है। जिस तरह बल्लभगढ़ आरओबी की घोषणा कर दी गई थी लेकिन आज तक कुछ हो नहीं सका क्योंकि प्रोजेक्ट के लिए जरूरी जमीन की व्यवस्था नहीं हो सकी है। इस प्रोजेक्ट में भी इस तरह की अड़चनें न हों, बागड़ी ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
रमेश बागड़ी के अनुसार बाटा आरओबी से राष्ट्रीय राजमार्ग की तरफ उतरते हुए स्लिप रोड का निर्माण किया जाएगा। ये स्लिप रोड नीलम पुल की ओर उठती जाएगी और नेशनल हाईवे को पार करते हुए यूटर्न लेते हुए कोर्ट रोड से जुड़ेगी। यहीं से एक एलिवेटेड सड़क बल्लभगढ़ की तरफ नेशनल हाईवे को जोड़ेगी और यहीं से बाटा आरओबी से जोड़ी जाएगी। सुनने में तो यह अच्छा लगता है लेकिन थोड़ी सी दूरी के लिए एल या यू प्रकार का एलिवेटेड मार्ग बनाने के लिए सड़क के कोणीय चढ़ाव (एंगुलर एलिवेशन) का कैसे निर्धारण किया गया है इसकी कोई जानकारी नहीं दी। इसी तरह बडख़ल रूट पर एलिवेटेड रोड बनाने की बात की जा रही है, इसे बडख़ल आरओबी से कैसे जोड़ा जाएगा और कैसे आगे नेशनल हाईवे फ्लाईओवर व एलिवेटेड मेट्रो ट्रैक पार किया जाएगा, यह भी तय नहीं हुआ है।
यदि अनखीर से सेक्टर 28 वाली स्मार्ट रोड तक नया एलिवेटेड रोड बनाया जाना है तो उसके लिए रेलवे से सामंजस्य बनाया गया है या नहीं क्योंकि रेल ट्रैक के ऊपर का हिस्सा तो रेलवे ही बनाती है। यह इसके बाद इस एलिवेटेड रोड को नेशनल हाईवे व मेट्रो ट्रैक भी पार करना होगा। यह एलिवेटेड रोड स्मार्ट रोड पर उतारा कहां जाएगा, यह भी तय नहीं है। हालांकि रमेश बागड़ी ड्राइंग तैयार होने का दावा कर रहे हैं लेकिन उसे दिखा नहीं रहे। बागड़ी जी प्रोजेक्ट के सुनहरे ख्वाब तो दिखा रहे हैं लेकिन यह बिना किसी रुकावट के पूरा हो सकेगा इसका दावा नहीं कर पाएंगे।
सब जानते हैं कि सैनी ने विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस प्रोजेक्ट को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी जिसे धरातल पर उतारने में अभी बहुत अड़ंगे नजर आ रहे हैं। दस साल तक खट्टर ने खूब घोषणाएं कीं शिलान्यासों का पाखंड किया लेकिन फरीदाबाद ही नहीं पूरे प्रदेश को कोई आधारभूत संरचना नहीं दे सके। मेडिकल कॉलेजों की स्थापना हो, सीवेज सिस्टम दुरुस्त करना हो, सड़क-पुल हों, बिजली प्रोजेक्ट या कोई और विकास कार्य आज तक पूरे नहीं हुए, ऐसे में ईस्ट-वेस्ट फरीदाबाद प्रोजेक्ट पूरा होना तो दूर शुरू होना ही मुश्किल नजर आ रहा है।
इतना ही नहीं पूर्व सीएम खट्टर ने चार साल पहले बल्लभगढ़-पलवल-गुडग़ांव मेट्रो की घोषणा की थी। जून 2023 में फिर से प्रोजेक्ट को मंजूरी देने का जुमला उछाला गया। सीएम के जुमले को सच्चा साबित करने के लिए बकायदा जमीन पर काम करने का नाटक तक किया गया था। 25 जुलाई 2023 को मेसर्स राइट्स नाम की सरकारी कंपनी के अधिकारियों की टीम द्वारा रूट अलाइनमेंट का अध्ययन करने का नाटक भी किया गया था। चुनाव में भी इसका खूब ढिंढोरा पीटा गया, खट्टर-सैनी से लेकर जुमलाजीवी प्रधानमंत्री मोदी भी इस प्रोजेक्ट की एक बार और घोषणा कर गए।
अंदरखाने खट्टर से लेकर मोदी तक सबको पता है कि घाटे का सौदा होने के कारण डीएमआरसी इन परियोजनाओं को पूरी तरह नकार चुकी है फिर भी भाजपाई गाहे बगाहे, खास कर चुनाव के मौसम में इसका ढोल जोर जोर से पीटत रहते हैं। जो हाल बल्लभगढ़-पलवल, गुडग़ाव मेट्रो का हुआ है वही ईस्ट-वेस्ट फरीदाबाद परियोजना का भी होने वाला है।