फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) लूट कमाई में अभ्यस्त नगर निगम के भ्रष्टाचारी अधिकारियों का आत्म विश्वास इतना बढ़ चुका है कि विकास के नाम पर जनता की आखों में धूल झोंक कर करोड़ों रुपयों पर खुले आम डाका मारने लगे हैं। चंद महीने पहले ही स्टॉर्म वाटर लाइन बिछाने के लिए एक प्रोजेक्ट पर 1 करोड 80 लाख रुपये डकार लिए गए अब उसी प्रोजेक्ट का नाम सीवर लाइन बिछाना बता कर दो करोड़ का बजट बनाया गया है। यह सारा खेल खुद को नगर निगम का सबसे ईमानदार एक्सईएन बताने वाले नितिन कादियान का रचाया हुआ है। उसकी ईमानदारी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह पूर्व निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास के लिए कभी पांच लाख का लहंगा तो कभी सोने के बिस्कुट तो कभी लेटेस्ट आईफोन का इंतजाम कर उनकी सेवा करता था।
सुनने में आया है कि नए निगमायुक्त धीरेेंद्र खडगटा किसी से कोई मांग तो नहीं रखते लेकिन वह भ्रष्ट अफसरों की नकेल कसने में भी नाकाम नजर आ रहे हैं, अगर उनमें जरा भी रीढ़ होती तो एक ही काम के दो प्रोजेक्ट बनाने के लिए नितिन कादियान के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते। मीडिया में प्रकाशित खबर के अनुसार नगर निगम द्वारा वार्ड नंबर दस डबुआ कॉलोनी के फागना चौक से जैन मंदिर तक 900 एमएम की, यहां से हार्डवेयर-प्याली चौक तक मुख्य नाले से जोडऩे के लिए 1200 एमएम व 1600 एमएम की आरसीसी पाइप लाइन डाली जाएगी। इस प्रोजेक्ट की लागत दो करोड़ रुपये रखी गई है और निर्माण का समय दस महीने निर्धारित किया गया है। मज़़दूर मोर्चा ने गतांक में जरा सी बारिश में बह गए स्टॉर्म वाटर लाइन के 1 करोड़ 80 लाख शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर बताया था कि स्टॉर्म वाटर लाइन के नाम पर किस तरह नगर निगम ने करीब पौने दो करोड़ रुपयों की लूट-बांट कर डाली।
सुधी पाठकों को याद दिला दें कि एक्सईएन नितिन कादियान ने बीते मई महीने में मीडिया के सामने डबुआ कॉलोनी के जलभराव को दूर करने की योजना प्रस्तुत की थी। तब बताया गया था कि बारिश में इन इलाकों में तगड़ा जलभराव हो जाता है, उससे निपटने के लिए यहां स्टॉर्म वाटर ड्रेन बनाई जाएगी। यह स्टॉर्म वाटर ड्रेन भी फागना चौक से जैन मंदिर तक 900 एमएम की होनी थी, फिर जैन मंदिर से प्याली चौक तक 1200 और 1600 एमएम की होनी थी। इस प्रोजेक्ट की लागत 1 करोड़ 80 लाख रुपये रखी गई थी। चालाकी यह की गई कि इसमें प्रोजेक्ट पूरा होने की कोई समय सीमा बताई ही नहीं गई। बारिश शुरू होने से चंद दिन पहले फागना चौक-जैन मंदिर से भोजपुरी समाज धर्मशाला तक जेसीबी लगवा कर नाले की आधी-अधूरी सफाई करवाई गई। भोजपुरी समाज से लेजरवैली पार्क के समानांतर चलते हुए प्याली चौक तक गए नाले की सफाई कराई ही नहीं गई।
बारिश आई और सारा डबुआ खास कर फागना चौक से जैन मंदिर और भोजपुरी समाज की पुलिया तक खूब जलभराव हुआ और अनेक दो पहिया-चार पहिया वाहन खराब हुए। लोग परेशान होते रहे और नगर निगम के होनहार अधिकारियों ने एक करोड़ 80 लाख रुपये खत्म कर दिए। अब यही नाले नालियां सीवर लाइन के नाम पर दो करोड़ में बनाने का पाखंड किया जा रहा है। आसानी से समझा जा सकता है कि फागना चौक से जैन मंदिर तक जो सीवर लाइन डाली जाएगी उसे पहले प्रोजेक्ट की स्टॉर्म वाटर ड्रेन बताया जाएगा। इसी तरह जैन मंदिर से प्याली चौक तक डाली जाने वाली 1200 और 1600 एमएम की सीवर लाइन को पहले प्रोजेक्ट की स्टॉर्म वाटर लाइन बताया जाएगा। मज़दूर मोर्चा ने पहले ही आशंका जता दी थी कि स्टॉर्म वाटर लाइन कहीं डाली नहीं जाएगी और पूरा पैसा हजम कर लिया जाएगा। समझने वाली बात यह भी है कि इस प्रोजेक्ट की लागत दो करोड़ रखी गई है जो कि काफी ज्यादा बताई जा रही है, यानी हरामखोर अधिकारियों-ठेकेदारों की मोटी कमाई के बंदोबस्त किए गए हैं। यह तो तय है कि किसी एक प्रोजेक्ट की पूरी की पूरी रकम डकारी जाने वाली है। इस खुली लूटमार का कारण निगम के मक्कार, निकम्मे और खाऊ अधिकारियों में कार्रवाई होने का भय खत्म हो जाना है।
दरअसल, ये अधिकारी भी इस तरह के प्रोजेक्ट अपने दम पर नहीं बनाते, बल्कि विधायक भ्रष्टाचारी धनेश अदलखा के इशारे पर या दस करोड़ की जमीन देकर विधायकी खरीदने वाले सतीश फागना जैसे जन प्रतिनिधियों के इशारे पर ही बनाते हैं। नगर निगम में हुए दो सौ करोड़ के घोटाले में पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक मूलचंद शर्मा भी फंसे थे लेकिन खट्टर सैनी की नौकरी करने वाले विजिलेंस ने जांच से उन्हें बाहर निकाल दिया, समझा जा सकता है कि जब विजिलेंस ने भ्रष्टाचार और लूट की कडिय़ां ही ठीक से नहीं जोड़ीं तो अपराधियों का छूटना तय है। सरकार और सत्ताधीशों यानी विधायक-मंत्रियों की इसी मंशा के अनुरूप दो दो करोड़ के घोटाले किए जा रहे हैं, आखिर नेताजी को चुनाव में हुआ खर्च भी तो वसूलना है। जनता तो बारिश में जलभराव, गर्मी में पेयजल समस्या, टूटी सड़कों, उफनती सीवर लाइनों के बीच जीवन गुजारने की आदी हो ही चुकी है। उसे अपनी गाढ़ी कमाई की हो रही लूट मार की जब तक चिंता नहीं होगी और सवाल करने की हिम्मत नहीं जुटाएगी तब तक ऐसे ही लुटती-पिटती रहेगी।