फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नहरपार इलाके में भूमाफियागीरी करने और बाहुबल प्रदर्शन के लिए कृष्णपाल गूजर ने जो गुुंडे पाले हुए हैं उन्होंने बीते रविवार आरपीएस सवाना सोसायटी में दबंगई की और विरोध करने पर सोसायटी वासियों को जमकर पीटा। यह सब तब हुआ जब सोसायटी वाले दबंगों को समझा रहे थे कि हम भाजपा के वोटर हैं, हमने कृष्णपाल गूजर को वोट दिया है, अगर अभद्रता करोगे तो हम भाजपा के टॉप लेवल पर तुम्हारी शिकायत करेंगे। इतना सुनने के बाद तो भाजपा की दोगली रीति-नीति से वाकिफ गूजर के पालतुओं ने पुलिस वालों की मौजूदगी में चार पांच लोगों को दौड़ा दौड़ा कर जमीन पर पटक कर खूब पीटा।
बेचारी पुलिस गूजर के पालतुओं को रोकने की हिम्मत तो कर नहीं सकती थी, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बीच बचाव करने में दबंगों के लात घूंसे और धक्के पडऩे से दो तीन पुलिस वाले भी गिर गए लेकिन गुंडों के खिलाफ कुछ भी कार्रवाई करने की हिम्मत पुलिस में नहीं थी। सैकड़ों सोसायटीवासियों और पुलिस की मौजूदगी के बावजूद चंद दबंगों ने कुछ लोगों को पीटा और अपनी कारों में शान से चलते बने। हालात ये हैं कि समाचार लिखे जाने तक पीडि़त पक्ष यह ही तय नहीं कर पाया था कि जो लोग पिटे हैं उनसे थाने में शिकायत दिलवाई जाए या फिर पूरी सोसायटी की ओर से आरडब्ल्यूए शिकायत दे। यानी भाजपा की अंधभक्ति में जमीर और आत्मसम्मान बेच चुके सोसायटी के 13 हजार लोग अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। ऐसे कायर लोग रोज ही पिटते हुए अपना आत्म सम्मान धूल में मिलाते रहेंगे। ऐसे लोगों की दूसरे लोग मदद करने भी नहीं आ सकते।
सोसायटी वासी आकाश पटेल के अनुसार रविवार सुबह आरडब्ल्यूए की बैठक समाप्त हुई थी, पचास साठ लोग बैठक खत्म होने के बाद बाहर खड़े थे, इसी समय भाजपा का झंडा लगी तेज आवाज में हूटर बजाती एचआर 51 सीके 6744 फाच्र्यूनर खतरनाक गति से अंदर घुसी। इशारा करने पर भी नहीं रुकी तो सिक्योरिटी गार्ड ने मोबाइल से फाच्र्यूनर की फोटो खींच ली। कार में बैठे दबंगों ने यह देख लिया और उसी गति से रिवर्स गियर लगाकर सिक्योरिटी गार्ड के पास पहुंचे और उसे धमकाने लगे तथा फोटो डिलीट करने का दबाव बनाया। इस पर वहीं खड़े आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी भी सिक्योरिटी गार्ड का पक्ष लेकर खड़े हो गए। फाच्र्यूनर वालों ने सबको धमकाना शुरू किया और फोन कर अपने गिरोह के अन्य गुंडों को बुलाया। इधर आरडब्ल्यूए वालों ने बीपीटीपी थाने को फोन कर दिया, थोड़ी ही देर में पुलिस पहुुंच गई। इसके साथ ही कबूलपुर खादर सरपंच प्रतिनिधि रतन सिंह नागर आठ दस दबंगों को लेकर पहुंच गया। उसने पुलिस वालों के सामने आक्रामक रुख अपनाते हुए फाच्र्यूनर वाले से पूछा कि कौन कौन बोल रहा था, युवक ने जैसे ही दो-तीन लोगों की तरफ इशारा किया, रतन सिंह अपने गुंडों के साथ उन पर टूट पड़ा। चीख रहा था कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हो गई सरपंच रतन सिंह की गाड़ी रोकने की। पुलिस वाले हमलावरों को रोकने की हिम्मत नहीं जुटा पाए, हां बीच बचाव में चोटिल हो गए। करीब दस मिनट तक हंगामा करने, पुलिस के सामने जान से मारने की धमकियां देने के बाद सारे दबंग शान से गाडिय़ों पर बैठ कर चलते बने।
ताजा-ताजा पिटाई होने के कारण गुस्से से उबल रहे सोसायटीवासियों ने तुरंत ही बीपीटीपी थाने पर जाकर शिकायत दर्ज करने का जोश दिखाया लेकिन जैसे ही पता चला कि सारे दबंग भी थाने पहुंच रहे हैं, उनका गुस्सा और जोश काफूर हो गया। दबंगों के खिलाफ कोई रिपोर्ट लिखाने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाया। वैसे तो पुलिस आए दिन किसी न किसी को सार्वजनिक स्थान पर गुत्थम गुत्था हो माहौल खराब करने के जुर्म में गिरफ़्तार कर जेल भेजती रहती है, अवैध रूप से वाहन पर सायरन-हूटर बजाने वालों का मोटा चालान काटती है लेकिन आरपीएस सवाना में पहुंची बीपीटीपी थाने की पुलिस ने न तो सरपंच की गाड़ी में बज रहे सायरन का चालान किया न निजी संपत्ति में घुस कर मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने वालों के खिलाफ कोई केस दर्ज किया। पुलिस की हिम्मत ही नहीं है कि वह सरपंच रतन सिंह और उसके गुंडों से चूं भी बोल दे।
यह वही रतन सिंह है जिसने लोकसभा चुनाव के दौरान कृष्णपाल गूजर को अपने गांव बुलाकर उसके गले में एक लाख 11 हजार रुपये का पट्टा डाल कर स्वागत किया था। रतनपाल कृष्णपाल के विरोधी राजेश नागर का भी करीबी बताया जा रहा है। यानी सत्ता के दो मंत्रियों का साथ हो तो फिर कानून की ऐसी तैसी करने में हिचक कैसी। हालांकि सोसायटीवासी मंत्री राजेश नागर से मिलने की बात कह रहे हैं लेकिन घटना के तीन दिन बीतने के बाद भी थाने में शिकायती पत्र देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे तो समझा जा सकता है कि मंत्री गूजर-नागर के गुंडे कितने खतरनाक हैं। कानून व्यवस्था के नाम पर किसी भी के पास से चाकू-कट्टा बरामद कर जेल भेजने वाली पुलिस इस मामले की पूरी जानकारी होने के बावजूद दबंगों के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रही।
ऐसा ही भारत बनाना चाहते है संघ-भाजपा, जहां संघी तो भेडिय़े और जनता भेड़ बनकर रहे घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने पर हर्ष शर्मा नाम के यूजर ने कमेंट किया कि सोसायटी के लोग बड़े कमजोर हैं जो इतने सारे होकर भी कुछ लोगों का मुकाबला नहीं कर पाए, इसीलिए तो कहते हैं कि एक रहोगे तो सेफ रहोगे आज एक दो को मारा है इन लोगों ने, कल आपकी सोसायटी में आकर कई लोगों को मारेंगे, इसलिए एक होकर आएं और ईंट का जवाब पत्थर से दें।
हर्ष शर्मा ने बात तो बड़ी अच्छी लिखी है लेकिन वह यह भूल गए कि प्रधानमंत्री मोदी ने एक रहोगे तो सेफ रहोगे का चुनावी नारा देशवासियों को नहीं बल्कि भाजपा के अंधभक्त वोटरों को दिया था। प्रधानमंत्री ने अंधभक्तों को घुसपैठियों, ज्यादा बच्चे वालों के खिलाफ एक एक होने का संदेश दिया था। आरपीएस सवाना वाले खुद ही बता रहे हैं कि उन्होंने घुसपैठियों और ज्यादा बच्चे वालों से सेफ रहने के लिए ही भाजपा को वोट देकर जिताया था। अब हमलावर तो भाजपा मंत्रियों के करीबी हैं, इसलिए सोसायटी में इनकी घुसपैठ को घुसपैठ नहीं माना जाना चाहिए, न ही ज्यादा बच्चे यानी बीस पच्चीस हमलावरों को बुलाना कोई गलत बात है, अंधभक्त तो भाजपा से लुटने-पिटने और लतियाए जाने के लिए ही बने हैं। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री गूजर और संघ भाजपा ऐसा ही भारत बनाना चाहते हैं जिसमें अंधभक्त जूते खाकर भी उसे ही वोट देकर सत्ता में बैठाएं।