पार्षद की खाल में दलाल साबित हो रहा रवि भगत

पार्षद की खाल में दलाल साबित हो रहा रवि भगत
September 29 19:48 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) कथनी (जीरो टॉलरेंस) और करनी (भ्रष्टाचारियों को संरक्षण) में अंतर करने वाली भाजपा में भ्रष्ट-कमीशनखोर, दलाल, भूमाफिया प्रकार के लोगों को सांसद, विधायक से लेकर पार्षद तक बनाया गया। जनता के वोट से सत्ता पाने के बाद ये लोग जनता की गाढ़ी कमाई न केवल लूट रहे हैं बल्कि लूट कमाई में सहयोग करने वाले अधिकारियों को भी संरक्षण देने में भी लगे हुए हैं। ताजा मामला सैनी शासन के होनहार पार्षद रवि भगत का बताया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि एक घटिया काम के लिए निगमायुक्त आईएएस धीरेंद्र खडगटा ने जेई प्रवीण शर्मा को चार्ज शीट करने का आदेश जारी कर दिया। लूट कमाई कर हिस्सापत्ती देने वाले जेई पर आंच आते ही भगत जी यानी पार्षद रवि कश्यप को उस पर दया आ गई। चर्चा है कि जेई से महज पचास हजार रुपये चढ़ावा राशि वसूल कर भगत जी ने आईएएस खडगटा को कार्रवाई नहीं करने का उपदेश दे दिया। आईएएस अधिकारी होने के बावजूद भगवाधारी पार्टी के चिंटुओं की तरह काम कर रहे धीरेंद्र खडगटा ने घटिया निर्माण को दरकिनार कर अपने आदेश पर मौखिक स्थगनादेश जारी कर दिया। क्योंकि इस तरह के मामलों मेंं न तो देने वाला कहता है कि उसने दिया और न ही लेने वाला कुबूल करता है कि उसने मोटी रकम डकारी है लेकिन परिणाम से इस तरह के लेनदेन का होना आसानी से समझा जा सकता है।

निगम सूत्रों के अनुसार वार्ड नंबर तीन की न्यू जनता कॉलोनी में शांति निकेतन स्कूल जाने वाली सड़क लंबे समय से जर्जर थी। करोड़ों रुपये खर्च कर पार्षद पद हथियाने वाले जनप्रतिनिधियों के खर्च की भरपाई कराने का दबाव भी नगर निगम पर है। ऐसे में शहर की सड़कों को मरम्मत के नाम पर तोड़ कर बनाने का खेल चल रहा है। जनता की नजर में मरम्मत कार्य किया जा रहा है और अधिकारी-जनप्रतिनिधियों की जेब भी भर रही है। तो वार्ड नंबर तीन में भी जर्जर सड़कों की मरम्मत का काम खोजा गया। चर्चा है कि भगत जी को रूटीन से कुछ ज्यादा ही हिस्सापत्ती चाहिए थी, ऐसे चेले जेई प्रवीण शर्मा ने आका की बात सुनते ही निर्माण सामग्री में जमकर कटौती कर डाली और दिखावे के लिए पैचवर्क कर डाला।

दुर्भाग्य से निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा ने खुद ही मौका मुआयना कर घटिया निर्माण की पोल खोल दी। पैचवर्क इतना घटिया हुआ था कि सड़क की गिट्टियां बाहर निकली हुई साफ नजर आ रही थीं। निर्माण के नाम पर सीधे सीधे पूरी रकम हड़पने जाने के खेल से नाराज निगमायुक्त ने सख्त नाराजगी जताते हुए प्रवीण शर्मा को तगड़ी लताड़ लगाई और सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर ओमबीर को प्रवीण शर्मा के खिलाफ चार्जशीट जारी करने व पैचवर्क दोबारा कराने का आदेश दिया। चार्जशीट जारी होते ही रवि भगत ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उसने जेई के खिलाफ कार्रवाई करवाई है और जनता से शाबाशी लूटी। इधर चार्जशीट जारी किए जाने की जानकारी होते ही जेई प्रवीण शर्मा भाग कर पार्षद रवि भगत के पास पहुंचा और रोया कि भगत जी आपकी खुशी के लिए माल में कटौती की लेकिन निगमायुक्त ने तो मुझे ही काट लिया।

काली मंदिर में बैठकर ‘लक्ष्मी’ की भगती करने वाले रवि को मामले में मोटी कमाई की संभावनाएं नजर आईं। बताया जा रहा है कि पार्षद महोदय ने जेई की जेब टटोलनी शुरू की, मामला डेढ़ लाख रुपये से शुरू होकर पचास हजार रुपये पर रुका। पचास हजार रुपये अंटी में आते ही भगत जी ने निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा को फोन कर जेई प्रवीण शर्मा के खिलाफ कार्रवाई बंद करने का हुक्म सुना दिया। उन्होंने भी एक अच्छे ताबेदार की तरह उसका हुक्म मानते हुए चार्जशीट रुकवा दी। इस तरह भगत ने एक और खुद को जनता का हित करने वाला पार्षद दर्शाया तो पिछले दरवाजे से आधा लाख रुपये भी अंटी में खोंस लिए।

भगत और जेई प्रवीण शर्मा का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। दिन भर इस तरह के न जाने कितने मामले होते रहते हैं और आयुक्त महोदय, उन छुटभैये नेताओं की ताबेदारी करने में जरा भी कोताही नहीं करते हैं। ऐसे में निगम की प्रशासनिक व्यवस्था का बेड़ा गर्क नहीं होगा तो क्या होगा।

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Mazdoor Morcha
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