फरीदाबाद (म.मो.) यूं तो शहर भर में बनी पार्किंग समस्या शासन-प्रशासन की असफलता का जीता-जागता उदाहरण है, परन्तु सेक्टर 12 स्थित अनेकों सरकारी कार्यालयों के लिये बनी पार्किंग समस्या सरकार की अक्ल के दीवालियेपन का एक बेहतरीन नमूना है।
सन् 1985 में यहां लघु सचिवालय के लिये छ: मंजिला भवन का निर्माण किया गया था जिसे बाद में न्यायिक परिसर बना दिया गया। कुछ वर्ष बाद इसी के साथ नया छ: मंजिला लघु सचिवालय, ‘हूडा’ कार्यालय व हाल ही में कराधान विभाग का कार्यालय भी बन कर तैयार हो गया। इसी बीच बहुमंजिला नई न्यायिक ईमारत भी बनकर तैयार हो गई। यानी ईमारत के बाद ईमारत बनती चली गई, जिनमें हजारों कर्मचारियों के अलावा प्रति दिन हजारों नागरिक अपने-अपने कामों के लिये आने-जाने लगे।
सैंकड़ों करोड़ की ईमारतें खड़ी करके उनमें दफ्तर चलाने वाली सरकार के कुंदजहन अधिकारियों ने कभी यह सोचने की जरूरत नहीं समझी कि इन दफ्तरों में आने-जाने वाले लोग अपने वाहनों को खड़ा कहां करेंगे? दरअसल दुरदर्शिता के अभाव में इन अफसरों को पार्किंग के लिये आस-पास खुले मैदान नज़र आ रहे थे। उन अफसरों में यह समझ पाने की क्षमता नहीं थी कि खुले पड़े मैदान सदैव ही खुले नहीं रहेंगे। हुआ भी यही। समय के साथ-साथ खुले पड़े मैदान में सरकार के विभिन्न कार्यालय बनते चले गये। ये कार्यालय कोई एकायक नहीं बन गये। ‘हूडा’ के मास्टर प्लान में ये सारे मैदान किसी न किसी सरकारी कार्यालय के लिये तय कर दिये गये थे।
लिहाज़ा ज्यों-ज्यों खुले मैदान घटते चले गये त्यों-त्यों आसपास की सडक़ों पर वाहनों की पार्किंग होने लगी। यह पार्किंग इस हद तक बढ़ गई कि सडक़ों पर वाहनों का चलना तक दूभर हो गया। यदि सरकार चलाने वालों की अक्ल से दुश्मनी न होती और दुरदर्शिता का लेशमात्र भी उनमें होता तो प्रत्येक ईमारत के नीचे एक या दो मंजिला बेसमेंट केवल वाहन पार्किंग के लिये बनाई होती तो आज वाहन पार्किंग की समस्या इस कदर विकराल होकर सामने न आती। आज इस समस्या को हल करने के लिये सरकार मल्टीपार्किंग बनाने के लिये टेंडर निकाल रही है
लेकिन उन्हें लेने के लिये कोई आगे नहीं आ रहा। दरअसल टेंडर निकालने और उस पर काम कराना भी अपने आप में किसी घोटाले से कम नहीं रह गया है। इसलिये वही पार्टी टेंडर पकड़ेगी जिसका लेन-देन का सौदा शासकों से तय हो जायेगा।
बेहतरीन पार्किंग व्यवस्था का नमूना इसी शहर में देखना हो तो तीन नम्बर स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में देखा जा सकता है। इसकी बेशमेंट में 2500 से अधिक गाडिय़ां आराम से खड़ी की जा सकती हैं।