नूंह। हरियाणा के नूंह जिले में सरकारी खजाने से 40.51 लाख रुपए के संदिग्ध भुगतानों का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह घोटाला महालेखाकार (सीएजी) हरियाणा द्वारा की गई लेखा परीक्षा के दौरान उजागर हुआ, जिसमें पाया गया कि वर्ष 2019 से 2020 के बीच नूंह सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय से ऐसे दर्जनों भुगतान किए गए, जो वास्तव में मौजूद ही नहीं रहने वाले व्यक्तियों के नाम पर जारी किए गए थे।
ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अगस्त 2019 से जून 2020 के बीच कुल 14 संदिग्ध भुगतान हुए, जिनकी कुल राशि 40 लाख 51 हजार रुपये थी। ये रकम 10 ऐसे व्यक्तियों के नाम पर जारी की गई, जिनके नाम तो विभागीय रिकॉर्ड से मिलते-जुलते थे, परंतु उनके यूनिक कोड, पैन नंबर, बैंक खाता संख्या और पते वास्तविक कर्मचारियों से भिन्न पाए गए। हैरानी की बात यह रही कि इन भुगतानों से संबंधित स्वीकृति आदेश और बिल-वाउचर फाइलें कार्यालय से गायब मिलीं।
ऑडिट टीम ने इस अवधि में कार्यरत तीन अधिकारियों की भूमिका को संदिग्ध माना है-तत्कालीन जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी सुरेश गुप्ता (सेवानिवृत्त), लेखा सहायक हीना विरमानी (वर्तमान में फरीदाबाद तैनात) और क्लर्क कृष्ण कुमार (वर्तमान में कोसली कार्यरत)। रिपोर्ट के अनुसार भुगतान प्रक्रिया में इन तीनों की सीधी संलिप्तता रही है। कुछ भुगतान बिना स्वीकृति आदेशों के किए गए, जबकि कुछ राशि ऐसे खातों में भेजी गई जिनके धारक वास्तविक कर्मचारी नहीं थे।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि उसी अवधि में एक कर्मचारी द्वारा भुगतान प्रक्रिया से संबंधित कार्य के बदले 60 हजार रुपये रिश्वत मांगने और प्राप्त करने की शिकायत भी सामने आई थी। इन अनियमितताओं के मद्देनजर जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी नूंह ने 13 अक्टूबर 2025 को थाना सिटी नूंह में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर नंबर 240 दर्ज करते हुए तीन अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 409 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर अजीत सिंह के अनुसार, “प्राथमिक जांच में ऑडिट रिपोर्ट के तथ्य सही पाए गए हैं। अब बैंक खातों, भुगतान विवरणों और संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ साक्ष्य एकत्र कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” इस वित्तीय घोटाले ने नूंह के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले की कडिय़ां चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय तक भी पहुंच सकती हैं, क्योंकि फर्जी खातों के लिए पे कोड वहीं से बनाए गए थे और बजट भी चंडीगढ़ से ही जारी हुआ था।