मज़दूर मोर्चा ब्यूरो निकृष्ट मोदी सरकार जनता को भ्रमित करने के लिए अपनी तरह-तरह की उपलब्धियां गाहे-बगाहे गिनवाती रहती है। इनमें से एक मेडिकल कॉलेजों में बढ़ाई जा रही सीटें भी हैं। बताया जा रहा है जहां पहले 51,348 एमबीबीएस सीटें हुआ करती थी वहीं अब इन्हें बढ़ाकर 1,18,098 कर दिया गया है। विदित है कि मनुष्यों के स्वास्थ्य से जुड़े इस अति गम्भीर मामले को मोदी सरकार ने मजाक बना कर छोड़ दिया है। डॉक्टरी पढ़ाई की गम्भीरता को देखते हुए दुनिया भर के देशों की तरह भारत में भी एमसीआई (मेडिकल काऊंसिल ऑफ इंडिया) स्थापित की गई थी। इसका काम डॉक्टरी पढ़ाई शुरू करने वाले मेडिकल कॉलेजों की कड़ी जांच के बाद ही उन्हें स्वीकृति प्रदान करना था। यह बात अलग है कि इस क्षेत्र के निजी व्यापारियों ने भ्रष्टाचार के दम पर एमसीआई की सख्ती को का$फी ढीला करा लिया था। लेकिन अब मोदी सरकार ने तो एमसीआई का नाम बदल कर एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) करते हुए इसके नियमों को और भी ढीला कर दिया है। दुख तो इस बात का है कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को तो छोडिय़े सरकारी मेडिकल कॉलेज तक भी इन ढीले नियमों का पालन करने के लिए तैयार नहीं हैं।
एमबीबीएस में सीटों की बढ़ोत्तरी दिखाने के लिए मोदी ने तमाम नियमों को ताक पर रखते हुए 100 सीटों वाले मेडिकल कॉलेजों को 150, 200 और 250 सीटों का करने का आदेश दे दिया। विदित है कि डॉक्टरी पढ़ाई के लिए तयशुदा नियम हैं कि कितने छात्रों पर कितने प्रोफेसर होंगे, कितनी लेबोरेट्री होंगी, कितने क्लास रूम होंगे और कितने हॉस्टल होंगे। लेकिन मोदी को इन नियमों से क्या लेना-देना, इनको तो केवल ताली बजवाने से मतलब रहता है, पढ़ाई का स्तर जाए भाड़ में।
उदाहरण के लिए छांयसा के निकट स्थित हरियाणा सरकार के अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज को देखा जा सकता है। यहां न तो कभी अस्पताल रहा न कभी पूरी फैकल्टी रही और न ही आवश्यक उपकरण आदि। इसके बावजूद यहां एमबीबीएस का चौथा वर्ष शुरू होने जा रहा है। इसी तर्ज के तीन और मेडिकल कॉलेज हरियाणा सरकार ने भिवानी, नारनौल और कैथल में शुरू कर दिए हैं। इनमें एनएमसी की कोई भी शर्त पूरी नहीं की जा रही है। इसके बावजूद यहां आठ लाख प्रति वर्ष प्रति छात्र से वसूली करके नकली डॉक्टर पैदा किए जाएंगे जो जनता के जीवन से खिलवाड़ करने को स्वतंत्र होंगे। देश भर में न जाने ऐसे कितने फर्जी मेडिकल कॉलेज नकली डॉक्टर पैदा करने में जुटे हैं।