97 करोड़ की सड़क छ: माह मे ही उखड़ी, हार्डवेयर चौक व बाटा आरओबी की मरम्मत एक साल भी न टिकी
फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) विकास के नाम पर सार्वजनिक निर्माण करना राजनेताओं व अफसरों की लूट कमाई का एक बड़ा स्रोत बन चुका है। जनता को बेवकूफ बनाने के लिए नेता जब-तब घोषणा करते रहते हैं कि वे इतने करोड़ की सौगात जनता को दे रहे हैं। इन सौगातों के नाम पर कहीं 250 करोड़ रुपए खर्च करके अंतरर्राष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम इस कदर बर्बाद कर दिया जाता है कि वहां गुल्ली-डंडा भी न खेला जा सके। हिसार में 5200 करोड़ उस हवाई अड्डे पर खर्च कर दिए जाते हैं जिससे 5200 रुपये का भी लाभ जनता को नहीं हो पाता। कुल मिला कर विकास के ये काम जनहित के लिए न होकर राजनेताओं व उनके लगुओं-भगुओं के हित साधन के लिए होते हैं।
नि:संदेह खेड़ी पुल से मंझावली-यमुना पुल तक एक अच्छी चौड़ी सड़क की जरूरत जनता को है। इसे सौगात बताते हुए सरकार ने इस पर 97 करोड़ रुपये खर्च करके जो सड़क बनाई वह छ: महीने बाद ढूंढे से ही नहीं मिल रही। शुक्र यह है कि मौके पर रोड़ी-पत्थर आदि की वहां मौजूदगी यह बता रही है कि यहां सड़क बनाने का प्रयास तो किया गया था, वह बात अलग है कि उक्त 97 करोड़ का एक बड़ा भाग सम्बन्धित राजनेताओं व अफसरों की जेबों में चला गया। जाहिर है ऐसे में सड़क के निशान ही मौके पर मिलेंगे। वैसे इस शहर में नगर निगम द्वारा ऐसी-ऐसी कारीगरी भी की गई हैं जिनके कोई निशान ही नहीं मिलें।
शहर के बीचों-बीच स्थित अति महत्वपूर्ण हार्डवेयर चौक में पड़े खड्डों से निजात दिलाने के नाम पर चंद माह पूर्व 32 लाख से अधिक खर्च किए गए थे, इसके बावजूद आज भी वे खड्डे ज्यों के त्यों मौजूद हैं। इसी चौक से करीब आधा किलोमीटर दूर बाटा रेलवे ओवरब्रिज की मरम्मत पर लगभग हर साल, कभी एमसीएफ कभी पीडब्लूडी तो कभी एफएमडीए के चोर अधिकारी लाखों रुपये का बजट बना कर डकार जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप पुल पर खड्डे ज्यों के त्यों कायम रहते हैं। हां, मरम्मत के कुछ दिन तक तो ये खड्डे ढके रहते हैं लेकिन शीघ्र ही उधड़ कर बताने लगते हैं कि वे वहीं के वहीं कायम हैं। मजे की बात तो यह है कि शहर भर के तमाम नेता व अधिकारी इस पुल व हार्डवेयर चौक से आंखें मीच कर निकल जाते हैं। आखें खोल कर वे करें भी तो क्या करें क्योंकि हमाम में तो सभी नंगें हैं।