निगम कमिश्नर की निजी सचिव रवि को एक बार फिर से मिला एक्सटेंशन फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) घूसखोर-हरामखोरों का अड्डा नगर निगम में निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा की पर्सनल असिस्टेंट सेवानिवृत्त रवि वासुदेवा को दोबारा छह महीने का एक्सटेंशन दिया गया है। ऐसी बात नहीं है कि वह बहुत काबिल पीए हैं या उनके सेवानिवृत्त होने के बाद जो कर्मचारी पीए बनते वे अयोग्य हैं, इसलिए उन्हें एक्सटेंशन दिया गया है। हैं तो वह साधारण आईक्यू वाली ही पीए लेकिन उनमें जो खास गुण है वह अपने आक़ा यानी निगमायुक्त की इच्छा और जरूरतें मातहतों और ठेकेदारों के जरिए पूरी कराने का हुनर।
निगम में चर्चा है कि रवि वासुदेवा के दोबारा सेवाविस्तार का लेटर भी सरकार की ओर से निगम मुख्यालय पहुंच चुका है। बताते चलें कि रवि मैडम सरकारी नौकरी के नियमों के तहत 31 अगस्त 2025 को सेवानिवृत्त हो गई थीं। उनके ठीक नीचे काम कर रहे अन्य कर्मचारियों में उनके रिटायर होने से निगमायुक्त का पीए बनने का उत्साह था, कई ने तो वरिष्ठता के आधार पर पीए बनने की तैयारियां भी शुरू कर दी थीं। इन बेचारे कर्मचारियों ये तो मालूम था कि पैसे में बहुत दम है लेकिन उसका इस्तेमाल कर पद कैसे हड़पे जाते हैं इस हुनर में वह रवि मैडम को नहीं पा सके। रवि मैडम को विदाई की माला पहनाने की तैयारी की जा रही थी कि ईमानदारी का चोला ओढ़े निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा की सिफारिश पर उन्हें छह महीने का एक्सटेंशन मिल गया, बेचारे पीए बनने के उम्मीदवार कर्मचारी माला लिए खड़े ही रह गए।
निगम सूत्रों के अनुसार 200 करोड़ के छोटे घोटाले से लेकर विकास के नाम पर की गई अनेकों लूट और बंदरबांट का अनुभव रखने वाली रवि मैडम एक से एक भ्रष्ट, लूट कमाई करने वाले निगमायुक्त की पीए रह कर अपने कौशल को मनवा चुकी हैं। पाठकों को याद होगा कि पूर्व निगमायुक्त मैडम मोना ए श्रीनिवास को चाहे पांच लाख के लहंगे की जरूरत हुई या लेटेस्ट आईफोन की, तीन साढ़े तीन लाख रुपयों के गहनों का भुगतान कराने की या अस्सी-नब्बे हजार की फटीक की, उनकी ये सारी इच्छाएं रवि मैडम ही एक्सईएन, एसडीओ, जेई खास कर मोना मैडम के सबसे प्रिय नितिन कादियान तक पहुंचा कर भुगतान सुनिश्चित करातीं।
इसी तरह ठेकेदारों से भी अधिकारियों के लिए सीधी डीलिंग पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ करतीं। हरामखोरी के धंधे में इतनी ईमानदारी से काम करने के कारण मैडम मोना रवि वासुदेव से इतनी खुश हुईं कि पिछले वर्ष गणतंत्र दिवस पर उन्हें उत्कृष्ट सेवा का पुरस्कार भी दिलवा डाला और उन्हें ड्यूटी पर लाने और ले जाने के लिए सरकारी गाड़ी भी भेजी जाती थी हालांकि नियमानुसार उन्हें यह सुविधा नहीं दी जा सकती। इतना ही नहीं रवि मैडम कार्रवाई की फाइलें दबा कर या संबंधित अधिकारी या ठेकेदार को उसके खिलाफ होने वाली कार्रवाई की सूचना देकर उसे बचने के मौके उपलब्ध करा कर पैसा बनाने में शातिर हैं, हालांकि ये सारा खेल वह मैडम या सर के इशारे पर ही खेलती हैं, इसमें उनका तो भला होता है और अधिकारी को भी मनमाफिक परिणाम यानी जबराना मिल जाता है। रवि मैडम की इन सारी खूबियों के कारण ही ईमानदारी का चोला ओढ़े निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा ने भी उन्हें इसी पद पर बनाए रखा। एक साल में उनके काम से इतना खुश हुए कि रिटायर होने पर एक्सटेंशन पर एक्सटेंशन दिलाए जा रहे हैं। हालांकि उनके सेवा विस्तार से निगम में खुद को इस पद के योग्य मानने वाले कर्मचारियों में तगड़ा रोष है, ये लोग रवि मैडम को बार बार सेवा विस्तार देने के विरोध में सरकार का पत्र लिखने की तैयारी कर रहे हैं।
रवि के भी बाप मौजूद हैं रवि वासुदेव को तो सिर्फ दो बार ही सेवा विस्तार मिला है, नगर निगम में विशेष सलाहकार 86 वर्षीय सोहनलाल मदान 58 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होने के बाद से लगातार काम पर हैं। निगम के जानकार कहते हैं कि मदान को इसलिए बाहर नहीं किया जा रहा है क्योंकि यही वह शख्स है जिसने निगम में अधिकारियों से लेकर ठेकेदारों तक को बिना फंसे भ्रष्टाचार करने और लाखों करोड़ोंं रुपयों की बंदरबांट की तरकीबें सिखाई हैं। निगम जानकारों के अनुसार एसएल मदान लेटर ड्राफ्टिंग में माहिर है, यही कारण है कि चाहे जो भी निगमायुक्त हो लेटर ड्राफ्टिंग का काम मदान के पास ही रहता है। अधिकारी को जिस ठेकेदार या मातहत अधिकारी से वसूली करनी होती मदान उसका नोटिस तैयार करता, इसमें ठेकेदार या अधिकारी के काम की खामियां-कमियां गिनाई जातीं और कार्रवाई की धमकी दी जाती। इसके बाद सौदेबाजी होती, लेनदेन होने के बाद मदान ही उस ठेकेदार या मातहत अधिकारी की ओर से नोटिस का जवाब भी लिखता और मदान द्वारा स्पष्टीकरण में वे गलतियां गायब हो जातीं जो नोटिस में बताई जातीं।
दो सौ करोड़ का घोटाला हो या निगम में अनेकों करोड़ के अन्य घोटाले, मदान ने ड्राफ्टिंग कर अधिकारियों, ठेकेदारों की खूब कमाई करवाई और सबको साफ बचा भी लिया, यही कारण दो सौ करोड़ में तीन तीन आईएएस अधिकारियों का नाम आया लेकिन उनके लिए फील्डिंग सजाने वाले मदान का जिक्र तक नहीं है। रवि मैडम भी उसी परंपरा की कड़ी हैं। अधिकारियों के पीए कितने ईमानदार होते हैं इसका उदाहरण संयुक्त आयुक्त का पूर्व पीए प्रवीण कालरा है। कालरा ने संयुक्त आयुक्त के लिए ठेकेदार से मोटी रिश्वत की मांग कर डाली थी, उनके खिलाफ थाना एसजीएम नगर में केस भी दर्ज हुआ था लेकिन लेनदेन का खेल हर तरफ चलता है इसलिए कुछ दिन बाद मामला सेटल होने पर शिकायत वापस ले ली गई तो पुलिस ने भी एफआर लगा दी, आखिरकार ठेकेदार पानी में रहकर कब तक मगरमच्छ से बैर लेता, उसे भी तो कमाई करनी थी। हाल ही में संयुक्त आयुक्त की ठेका कर्मचारी मोनिका भाटिया को बीस हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जानकारों के अनुसार रिश्वतखोरी में रंगेहाथ पकड़े जाने पर ठेका कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी जानी चाहिए लेकिन मोनिका भाटिया पर भाजपाई सत्ता और सजातीय विधायक धनेश अदलखा का वरद्हस्त है इसलिए जमानत पर बाहर होते ही फिर से रिश्वतखोरी के लिए बहाल करने की कवायद चल रही है।