नगर निगम में धड़ल्ले से जारी है लूट-मक्कारी

नगर निगम में धड़ल्ले से जारी है लूट-मक्कारी
June 23 09:01 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भ्रष्टाचार के गढ़ नगर निगम में लूट कमाई और हरामखोरी बदस्तूर जारी है। केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गूजर के भ्रष्टाचारी बेटे एक्सईएन ओमदत्त का मई 2025 को अंबाला ट्रांसफर हो चुका है लेकिन आज भी उसके नाम से टेंडर बिड जारी की जा रही हैं। ओमदत्त ने चहेते ठेकेदार को काम दिलाने के लिए दूसरी ठेका फर्मों को अनैतिक तरीके से बाहर करने का खेल खेला। एक फर्म को पिछली परफार्मेंस के आधार पर बाहर किया तो दूसरी के बारे में लिख दिया गया कि उसने खुद ही बोली वापस ले ली है। फर्म आपत्ति न दर्ज करा सकें इसलिए आधी रात करीब बारह बजे ठेका खोल दिया गया। भुक्तभोगी फर्म की ओर से इस हेराफेरी की शिकायत धीरेंद्र खडगटा से कर विजिलेंस जांच कराने की मांग की गई है।

मुख्यमंत्री नायब सैनी ने शासन पर अपनी पकड़ दिखाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का दिखावा करने की गरज से मई में कुछ आईएएस अधिकारियों से लेकर स्थानीय शहरी निकाय के एक्सईएन आदि अधिकारियों के तबादले किए थे। इसके तहत केंद्रीय मंत्री गूजर को पिता कहने वाले नगर निगम के हरामखोर और पूर्णतय: भ्रष्ट एक्सईएन ओमदत्ता का तबादला भी अंबाला कर दिया गया था। मई के तीसरे सप्ताह उसे रिलीव कर दिया गया था और उसने वहां चार्ज भी संभाल लिया था।

गूजर का भ्रष्टाचारी बेटा नगर निगम में नहीं है लेकिन हरामखोर ओमदत्त के नाम से आज भी टेंडर बिड जारी की जा रही हैं। हरियाणा इंजीनियरिंग वक्र्स पोर्टल (एचडब्ल्यूपी) पर नगर निगम की ओर से टेंडर आईडी 2025_HRY_435754_1 के तहत वार्ड नंबर 23 श्याम कॉलोनी की गली नंबर 39 से 99 व अन्य गलियों के लिए 80 एमएम मोटे इंटरलॉकिंग टाइल्स उपलब्ध कराने और बिछाने का टेंडर अप्रैल में जारी किया गया था। टेंडर आईडी 2025_HRY_435745_1 के तहत वार्ड नंबर 25 पंचशील कॉलोनी की गली नंबर 8 से 43 व अन्य गलियों में इंटरलॉकिंग टाइलें बिछाने का ठेका जारी किया गया। टेंडर आईडी 2025_HRY_434969_1 के तहत वार्ड नंबर 24 अगवानपुर गांव की सूर्याविहार कॉलोनी की विभिन्न गलियों में इंटरलॉकिंग टाइल्स और नाली बनाने का ठेका जारी किया गया। ये सारे काम एक एक करोड़ से अधिक लागत वाले हैं।

टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर कर मनपसंद कंपनी को टेंडर दिलाने में माहिर ओमदत्त तब यहीं तैनात था। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार ओमदत्त ने टेंडर डालने वाली क्राउन इन्फ्रा सर्विसेज कंपनी प्रबंधन को टेंडर दिलाने का ऑफर दिया। मोटे लेनदेन के बाद ओमदत्त ने ठेका क्राउन इन्फ्रा के नाम ही खुलने का वादा कर लिया। डील की बात में कितनी सच्चाई है, यह तो तब पता चलेगा जब टेंडर क्राउन इन्फ्रा के नाम खुलेगा। इन तीन काम के लिए आनंद काँट्रेक्टर, क्राउन इन्फ्रा एंड सर्विसेज कंपनी, एचसीके इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड, जेपी एंड ब्रदर्स, जयमल कंस्ट्रक्शन, मेसर्स ब्रह्मा कंस्ट्रक्शन आदि ने बोली लगाई। टेंडर प्रक्रिया चल ही रही थी कि ओमदत्त का ट्रांसफर हो गया।

ट्रांसफर तो हो गया लेकिन नगर निगम में अभी भी ओमदत्त की ही चल रही है, क्योंकि भ्रष्टाचार में उसका दाहिना हाथ कंप्यूटर ऑपरेटर मुकेश यहीं है। ये वही मुकेश है जो निगम में रहीं एडिशनल कमिश्नर रहीं आईएएस वैशाली के लिए दलाली करता था, उनके जाने के बाद से ही ओमदत्त के लिए काम कर रहा है। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार क्राउन इन्फ्रा के रास्ते में जेपी एंड ब्रदर्स और एचसीके इन्फ्राटेक आ सकते थे। क्योंकि सौदा पहले ही तय हो चुका था इसलिए ओमदत्त ने खेल कर दिया। श्याम कॉलोनी के टेंडर में ओमदत्त के इशारे पर चेले मुकेश ने एचसीएके इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड की बिड शुल्क नहीं जमा होने, तकनीकी विशेषताएं पूरा नहीं करने आदि के बहाने रद्द कर दी। निगम सूत्रों के अनुसार किसी ठेका कंपनी की तकनीकी विशेषताओं का मूल्यांकन करना एक्सईएन के अधिकार क्षेत्र में आता ही नहीं है लेकिन पैंतरेबाजी और सौदेबाजी में माहिर ओमदत्त ने यह कर दिखाया। समझने वाली बात यह भी है कि इसी नगर निगम ने एचसीके इन्फ्राटेक को तिलपत में करीब सवा करोड़ रुपये का काम दिया हुआ है, जाहिर सी बात है कि तकनीकी मानक पूरे करने के कारण ही कंपनी को तिलपत का ठेका मिला था, यानी ओमदत्त ने प्रतियोगिता खत्म करने के लिए उस पर झूठे आरोप गढ़ दिए।

इसी तरह जेपी एंड ब्रदर्स की बिड रद्द करने का कारण उस कंपनी द्वारा पहले किए गए कार्यों की परफार्मेंस बताया गया। निगम सूत्रों के अनुसार जेपी एंड ब्रदर्स को चारों विधानसभा क्षेत्र से कूड़ा उठाने का काम 12 करोड़ में दिया गया है। यदि उसकी परफार्मेंस खराब है तो कूड़ा उठाने का ठेका भी कैंसिल किया जाना चाहिए था, लेकिन खेल तो चहेते ठेकेदार को काम दिलाने के लिए खेला जा रहा था। बताया जा रहा है कि इस ठेके के लिए ओमदत्त के चहेते ठेकेदार की क्राउन इन्फ्रा के सामने आनंद कॉन्ट्रेक्टर नामक फर्म जिसे डमी भी बताया जा रहा है के अलावा मेसर्स ब्रह्मा कंस्ट्रक्शन ही बचे हैं, इस तरह क्राउन इन्फ्रा को ठेका मिलना पक्का किया गया।

इसी तरह पंचशील कॉलोनी का ठेका क्राउन इन्फ्रा को ही सुनिश्चत करने के लिए एचसीके इन्फ्राटेक की निविदा रद्द कर दी गई और कारण बताया कि कंपनी ने खुद ही रद्द करने का आवेदन किया था, निगम सूत्रों के अनुसार यह सफेद झूठ है, यदि जांच हुई तो ओमदत्त एंड कंपनी कंपनी की ओर से जारी ऐसा कोई पत्र दिखा नहीं सकेगी। जेपी एंड ब्रदर्स के लिए उसके पुराने कार्यों की परफार्मेंस का राग अलापा गया। इस काम के लिए भी एचसीके के सामने आनंद काँन्ट्रैक्टर और मेसर्स ब्रह्मा कंस्ट्रक्शन ही रह गए। बताया जा रहा है कि जब एचसीके इन्फ्रा के प्रबंधन को निविदा रद्द होने के कारणों की जानकारी हुई तो उन्होंने आपत्ति दर्ज करानी शुरू कर दी।

यह देख ओमदत्त के इशारे पर उसके चेले कंप्यूटर ऑपरेटर ने 18 जून की रात बारह बजने से चंद मिनट पहले ही नगर निगम कार्यालय खोला और निविदाएं खोल दीं। बताया जा रहा है कि कंपनी वालों ने रात में ही निगम के कई अधिकारियों को फोन लगा कर धांधली रुकवाने की गुहार लगाने का प्रयास किया लेकिन किसी का फोन ही नहीं उठा। समझा जा सकता है कि ये सारा खेल अंतिम दिन और अंतिम समय तक इसलिए अटका कर रखा गया कि रद्द किए जाने पर कोई कंपनी आपत्ति न उठा सके। अब यदि आपत्ति लगाई भी जाएगी तो समय सीमा समाप्त होने के कारण उसकी सुनी नहीं जाएगी। रात बारह बजे से ठीक पहले टेक्निकल बिड खोला जाना ही बता रहा है कि बिड प्रक्रिया में घोटाला है। भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि सौदा तय होने और लेन देन प्रक्रिया संपन्न होने के कारण बिड क्राउन इन्फ्रा एंड सर्विसेज कंपनी के नाम ही खुलना तय है, इसके वैधानिक बनाने के लिए प्रक्रिया पालन का पाखंड किया जा रहा है।

यदि ठेका क्राउन इन्फ्रा के नाम खुलता है तो समझा जाना चाहिए कि फर्जी डिग्री वाला एक्सईएन चाहे कहीं भी रहे लेकिन पिता समान मंत्री गूजर के आशीर्वाद से नगर निगम में लूट कमाई करता रहेगा। सीएम नायब सैनी की सीधी निगरानी में आने वाले एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारी इन हेराफेरी और घोटालों से अनभिज्ञ नहीं हो सकते लेकिन उसके ही कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े जाने लगें तो भ्रष्टाचार को रोकना केवल कागजी बातें ही रह जाएंगी। संदर्भवश बता दें कि जनवरी 2024 में एसीबी अंबाला के डीएसपी के रीडर अशोक कुमार (ईएचसी) और एसीबी थाने में तैनात इंस्पेक्टर सोमेश को एक लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ़्तार किया गया था। डीएसपी कार्यालय में तैनात हेडकांस्टेबल की इतनी औकात नहीं कि वह अकेले इतनी बड़ी रकम हजम कर लेता। यानी जब मुख्यमंत्री का एसीबी ही भ्रष्टाचार के दलदल में गहरे धंसा हो तो फिर नगर निगम क्या हर विभाग में लूट कमाई जारी रहेगी और भ्रष्टाचारी रिश्वत देकर बेदाग होते रहेंगे।

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Mazdoor Morcha
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