फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भ्रष्टाचारी सीटीपी सतीश पाराशर के लौटने के बाद नगर निगम में रेजिडेंशियल प्लॉटों को मोटा नजराना देकर कॉमर्शियल प्लॉट में तब्दील करने का धंधा जोरों पर है। यह धंधा सतीश पाराशर की देखरेख में प्लानिंग ब्रांच में तैनात एचकेआरएन कर्मचारी बिंटू चला रहा है। चर्चा है कि खुद को विधायक धनेश अदलखा का चेला बताने वाला बिंटू प्लानिंग ब्रांच में अधूरी बिल्डिंग के ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट से लेकर कोई भी अवैध काम कराने का शर्तिया ठेका लेता है। उसकी अगुवाई में एनआईटी एक, दो, तीन और पांच और सैनिक कॉलोनी में अवैध निर्माण, लैंड कन्वर्जन का खेल आदि धड़ल्ले से जारी है।
भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस का ढिंढोरा पीटने वाली भाजपा सरकार में हरामखोरी में अव्वल सतीश पाराशर को उसके भ्रष्टाचार सामने आने के बावजूद पदोन्नतियांं देकर चीफ टाउन प्लानर के पद से नवाजा गया, क्योंकि वह सत्तापक्ष के नेता और भूमाफिया, प्रॉपर्टी डीलरों की खुशी के लिए सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, नियमों को दरकिनार कर सीएलयू, प्लॉट अलॉट करता रहा है। 2018 में तो उसने पीएलपीए संरक्षित अरावली वन क्षेत्र में पांच फार्म हाउस को लेटर ऑफ इंटेंट एलओआई जारी कर भूमाफिया को लाभ पहुंचाया था और खुद भी करोड़ों के वारे न्यारे किए थे।
एलओआई का अर्थ बताया गया कि अस्थायी रूप से चेंज ऑफ लैंड यूज सीएलयू दिया जा रहा है, यदि कोर्ट या सरकार से मंजूरी नहीं मिली तो फिर सीएलयू रद्द कर दिया जाएगा। सतीश पाराशर ने सीटीपी बनते ही इस हथियार का इस्तेमाल अब शहर के रिहायशी इलाकों में शुरू कर दिया है।
अब रिहायशी इलाके में कोई प्लॉट या फ्लैट तोड़ कर उसमें व्यावसायिक निर्माण कराने के लिए सीटीपी कार्यालय से लैंड कन्वर्जन सर्टिफिेकेट जारी किया जा रहा है। विभाग में एटीपी, एसटीपी, एसडीओ के पद खाली होने के कारण सीटीपी सतीश पाराशर और बिंटू खुल कर भ्रष्टाचार करने में जुटे हैं। उसके बेखौफ होने का आलम इससे समझा जा सकता है कि निगमायुक्त आवास के ठीक पीछे सील पड़ी आवासीय बिल्डिंग को बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत में बना डाला गया और कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरटीआई कार्यकर्ता केएल गेरा कहते हैं कि रिहायशी इलाके में व्यावसायिक पूर्णतया प्रतिबंधित है बावजूद इसके नगर निगम में धड़ल्ले से एलओआई की आड़ में लैंड कन्वर्जन सर्टिफिकेट जारी किया जा रहा है। एनआईटी ईएसआई चौक से सैनिक कॉलोनी मस्जिद मोड़ और यहां से सैनिक कालोनी तक रिहायशी इलाका है लेकिन इस पर धड़ल्ले से कॉमर्शियल निर्माण किया जा रहा है। यही नहीं मस्जिद चौक से प्याली चौक के बीच और एनआईटी एक-दो के चौक से लखानी धर्मशाला के बीच पूरा रिहायशी इलाका व्यावसायिक में तब्दील हो गया है।
नगर निगम सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में सतीश पाराशर की देखरेख में बिंटू शहर में अवैध निर्माण करने वालों से मोटी मोटी डील कर रहा है। एनआईटी एक, दो, तीन के रिहायशी इलाकों में खाली पड़े प्लॉटों को मोटी रकम लेकर लैंड कन्वर्जन कराने की कवायद तेजी से चल रही है।
निगम सूत्रों के अनुसार खेल इस तरह होता है कि खाली प्लॉट या किसी फ्लैट की डील होने के बाद उसके प्लॉट/ फ्लैट और उसके आसपास की इमारतों पर नोटिस चस्पा किया जाता है जिसमें बताया जाता है कि अमुक प्लॉट का लैंड कन्वर्जन किए जाने का आवेदन मिला है, यदि किसी को आपत्ति हो तो पंद्रह दिन में दर्ज कराए। जानकार बताते हैं कि नोटिस में सरकार द्वारा दिसंबर 2023 को जारी की गई पॉलिसी का हवाला दिया गया है, जो खट्टर सरकार ने फरवरी 2023 में वापस ले ली थी, यानी वर्तमान में यह लागू ही नहीं है। केएल गेरा कहते हैं कि उन्होंने रिहाशयी इलाकों में व्यावसायिक प्रतिष्ठान खोलने से पार्किंग, जाम की समस्या, बिजली-पानी आपूर्ति ढांचे पर दबाव की आशंका व्यक्त की थी, सरकार हाईकोर्ट में इनका कोई समाधान नहीं बता पाई इसलिए न्यायालय ने 2021 में ही इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। उन्होंने कहा कि मई में होने वाली सुनवाई के दौरान वह नगर निगम के भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा उच्च न्यायालय के आदेशों की धज्जियां उड़ाए जाने की बात भी कोर्ट मेें रखेंगे।