नाराज़ आका रवि भगत ने जेई परवेज आलम को खुड्डे लाइन लगवाया

नाराज़ आका रवि भगत ने जेई परवेज आलम को खुड्डे लाइन लगवाया
April 27 16:25 2026

ऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बल्लबगढ़ नगर निगम के ठेका जेई परवेज आलम को निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा ने कमाई वाली एन्फोर्समेंट एंड सर्वे शाखा से हटा कर खुड्डे लाइन यानी सेंट्रल स्टोर भेज दिया। बताया जा रहा है कि आलम पर यह गाज उसके आक़ा पार्षद रवि भगत ने गिरवाई है। कारण बताया जा रहा है कि आलम नौकरी जाने के डर से कुछ समय से भगत के उल्टे सीधे काम करने से कन्नी काट रहा है। चेले आलम से नाराज भगत ने आक़ा विधायक मूलचंद के पैर पकड़े और उसे अपने वार्ड से ही नहीं बल्लबगढ़ विधानसभा क्षेत्र से हटवाने की गुहार लगाई।

पाठकों को बताते चलें कि बल्लबगढ़ विधानसभा क्षेत्र में तोडफ़ोड़ और सर्वे का जिम्मा जेई परवेज आलम के पास था। मिलकर लूट कमाई करने के लिए परवेज आलम और भगत में गाढ़ी दोस्ती तब से है जब वह पार्षद नहीं था, बस मूलचंद-टिपरचंद का कार्यकर्ता हुआ करता था। भगत ने अपने वार्ड में होने वाले सभी अवैध निर्माणों का जिम्मा लिया, यानी पुराने वार्ड दो और वर्तमान तीन में जो अवैध निर्माण होते आलम नोटिस जारी करता और भगत सौदेबाजी करवाता। इसमें मोटी रकम पीटी जाती। पाठकों को याद दिला दें कि मुजेसर फाटक के पास आलम और भगत द्वारा चार लाख रुपये के एवज में लाला जी की अवैध इमारत बनवाई गई थी। मज़दूर मोर्चा ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद भगत ने इस संवाददाता को खबर न छापने के एवज में प्रति अवैध निर्माण परवेज आलम से दस हजार रुपये दिलाने का प्रस्ताव दिया था। तब उन्होंने जेई परवेज आलम की तारीफ के पुल बांधे थे और बहुत ही होनहार सहयोगी बताया था।

निगम सूत्रों के अनुसार भगत की लगातार मांगें बढऩे से जेई आलम बीते कुछ समय से उससे कन्नी काटने लगा है। आलम को अपने साथियों में यह कहते हुए सुना गया कि अगर भगत की मान कर काम करता रहा तो नौकरी चली जाएगी, अधिकारियों को जवाब तो उसे देना होगा, भगत को नहीं। बताया जा रहा है कि आलम के इस रुख से पार्षद रवि भगत नाराज हो गया, जेई के भ्रष्टाचार की शिकायत तो कर नहीं सकता था, क्योंकि जांच होने पर वह भी फंसता। ऐसे में दबाव बनाने के लिए कुछ दिन पहले पत्तलपाड़ मीडिया से वार्ता कर आरोप लगाया कि वह जन प्रतिनिधि है लेकिन जेई परवेज आलम बैठकों में उसे नमस्कार नहीं करता और सम्मान नहीं देता।

सच्चाई यह है कि भगत मुजेसर गांव में एक अनुसूचित जाति के कार्यकर्ता कन्हैया की दीवार सार्वजनिक नाली पर बनवा रहे हैं, गांव के सुखबीर आदि अनेक लोगों ने इसकी शिकायत निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा सहित सीएम विंडो पर कर रखी है। तोडफ़ोड़ का जेई होने के कारण जेई आलम की जवाबदेही है और अधिकारी लगातार उससे कार्रवाई की रिपोर्ट मांग रहे हैं। तोडफ़ोड़ नहीं करने पर निलंबन या अनुशासनात्मक कार्रवाई के डर से आलम कन्हैया पर दबाव बना रहा था। इस पर भगत ने विधायक मूलचंद के निठल्ले भाई टिपरचंद से नगर निगम के आला अधिकारियों को फोन कर कन्हैया के अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं करने का दबाव बनवाया था।

निगम सूत्रों के अनुसार अधिकारी तो मान जाते लेकिन सीएम कार्यालय से जवाब तलब होने पर खुद को बचाने के लिए आलम पर कार्रवाई रिपोर्ट देने का दबाव बनाया गया। एक ओर कुत्ता तो दूसरी ओर भेडिय़े के बीच फंसा होने की स्थिति में आलम ने नियमानुसार कार्रवाई करने की तैयारी शुरू कर दी। इसकी जानकारी होने पर भगत नाराज हो गया, करीबियों के अनुसार रवि भगत का कहना था कि मुजेसर गांव वालों ने चुनाव में उसका साथ नहीं दिया था, इलाके में कन्हैया ने ही खुल कर उसका साथ दिया था, इसलिए गलत हो या सही उसका अवैध निर्माण गिरने नहीं दिया जाएगा। इधर परवेज आलम तोडफ़ोड़ की तैयारी कर रहा था, इस पर रवि भगत ने आक़ा मूलचंद शर्मा के पैर पकड़ कर अवैध निर्माण बचाने की गुहार लगाई, बस फिर क्या था, भाजपाइयों के हाथ की कठपुतली बने निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा ने मूलचंद- रवि भगत की मंशा के अनुरूप परवेज आलम से लूट कमाई वाला एन्फोर्समेंट एंड सर्वे शाखा छीन कर सेंट्रल स्टोर भेज दिया। आलम की ही तरह नेताओं की चरणवंदना करने वाले निगम के अन्य कर्मचारी- अधिकारियों को भी समझ लेना चाहिए कि जब तक इनके लिए कमाई करते रहोगे इनके प्रिय रहोगे, अन्यथा कॅरियर बर्बाद करने में भी ये नहीं हिचकते। बेहतर है कि नियमानुसार अपनी नौकरी की जाए, क्योंकि जांच होने पर साफ रिकॉर्ड ही बचा पाएगा, नेता नहीं।

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Mazdoor Morcha
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