फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) ड्यूटी के दौरान शराब पीने और लापरवाही बरतने के कारण दो बार बर्खास्तगी की सजा झेल चुके नगर निगम के दारूबाज़ क्लर्क सौरभ ने अपनी महिला बॉस जेई पूनम मलिक के आदेश का पालन नहीं किया और उनसे अभद्रतापूर्ण व्यवहार किया। पीडि़त महिला अधिकारी ने इसकी शिकायत नवागत निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा से की। नौकरी जाती देख नशेड़ी सौरभ दूसरे दिन ही बॉस मैडम के पैरों में गिर पड़ा, नाक रगड़ते हुए परिवार के पालन-पोषण की दुहाई देकर कर माफी मांगी। आइंदा ऐसी हरकत नहीं करने की हिदायत देकर सहृदय महिला ने उसे माफ कर दिया, लेकिन अन्य साथियों ने सौरभ से लिखित माफी मंगवाई तब जाकर उनका गुस्सा ठंडा हुआ।
महिला अधिकारी वर्तमान में एसटीपी प्रोजेक्ट की इंचार्ज हैं साथ ही उन्हें वाहन और स्टोर प्रबंधन का भी जिम्मा मिला हुआ है। 5 मई को निगमायुक्त व अन्य अधिकारियों ने जेई पूनम मलिक से सीईटीपी से जुड़ी कुछ जानकारियां अर्जेंंट मांगीं थी। उन्होंने अपने मातहत एचकेआरएन यानी ठेकेदारी क्लर्क सौरभ को सारे बिंदु समझाते हुए रिपोर्ट तुरंत बनाकर देने को कहा। इसके बाद उन्होंने दो तीन बार कॉल करके और वाट्सएप मैसेज करके भी सौरभ को प्राथमिक आधार पर रिपोर्ट बनाने को कहा लेकिन शराब-कबाब के शौकीन क्लर्क ने उनकी बातें हवा में उड़ा दीं। दूसरे दिन यानी छह मई को जेई पूनम अपने कार्यालय पहुंचीं और सौरभ को रिपोर्ट लेकर बुलाया लेकिन वह नहीं आया।
यह समझते हुए कि सौरभ किसी काम में मशगूल होगा इसलिए रिपोर्ट लेने खुद उसकी मेज पर चली गईं। वह रिपोर्ट मांगतीं इससे पहले ही सौरभ भड़क उठा और बोला कि लैटर नहीं बनेगा, मैं तेरे बाप का नौकर नहीं हूं। मज़दूर मोर्चा को मिले जेई पूनम के शिकायती पत्र के अनुसार यह पहला मौका नहीं था जब सौरभ ने उनसे अभद्रता की हो। वह समय-समय पर उनकी अवज्ञा करता रहा है और कोई भी कार्य सौंपे जाने पर सीधे मना करता रहा है। अधिकारी होने के नाते महिला सौरभ को उसकी हरकतों के लिए कई बार समझा भी चुकी हैं। उसकी हरकतों के कारण कार्यालय का काम ढर्रे पर नहीं आ पाता है।
शिकायती पत्र में यह भी बताया गया है कि ड्यूटी के दौरान कार्यालय में बैठकर शराब पीने के कारण ठेकेदारी क्लर्क सौरभ को दो बार नौकरी से निकाला जा चुका है, बावजूद इसके नितिन कादियान जैसे अधिकारियों ने, जिनके लिए सौरभ शराब और गांजा आदि की व्यवस्था करता था, सिफारिश पर उसे फिर से नौकरी दिलवा दी। इसके बाद भी वही हरकतें दोहरा रहा है। अहम बात यह भी है कि संघी-भाजपाई प्रधानमंत्री मोदी का बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा नगर निगम जैसी सरकारी संस्था में ही जुमला साबित हो रहा है। मोदी हों या खट्टर-सैनी, बेटी बचाओ का ढिंढोरा हमेशा पीटते रहते हैं जबकि उनके ही नगर निगम में पुरुषवादी मानसिकता वाले दागी क्लर्क सौरभ और उसके जैसे अन्य कर्मचारी महिला अधिकारी से अभद्रता कर रहे हैं। ऐसे अभद्रतापूर्ण और अवज्ञाकारी माहौल में एक महिला अधिकारी का स्वाभिमानपूर्ण और असुरक्षित ढंग से काम करना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने छह मई को निगमायुक्त को पत्र लिख कर क्लर्क सौरभ के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। दो बार नौकरी से टर्मिनेट होने के इतिहास वाले सौरभ को जैसे ही पता चला कि इस बार जेई ने उसकी शिकायत कर दी है वह नगर निगम में अपने आकाओं से मिला, लेकिन इस मामले में कोई उसका साथ देेने को तैयार नहीं हुआ, यहां तक कि जिस अनिल मेहता के दम पर सौरभ उछलता है, वह अनिल भी कन्नी काट कर निकल लिया। एचकेआरएन क्लर्क यूनियन का सचिव होने के नाते सौरभ ने सभी पदाधिकारियों और सदस्यों से भी साथ देने की अपील की लेकिन उसका पुराना रिकॉर्ड देखते हुए यूनियन के कई पदाधिकारी उसके विरोध में दिखे। यूनियन में दरार पड़ते और भाईचारा खत्म होते देख प्रधान रणजीत शुक्ला ने भी पल्ला झाड़ते हुए राज्य प्रधान से हस्तक्षेप और मदद करने की अपील की लेकिन बात वहां भी नहीं बनी।
मरता क्या न करता, नौकरी पर बात आती देख सौरभ के सिर से शराब और संरक्षण देने वाले आकाओं का नशा उतरा, और सीधे जेई पूनम मलिक के पास पहुंचा और पैरों में लोट कर परिवार को बचाने की गुहार लगाने लगा। नाक रगड़ते हुए आइंदा ऐसी हरकत नहीं करने की कसमें खाईं। महिला अधिकारी ने माफ कर दिया लेकिन उनके अन्य सहयोगियों ने सनद के तौर पर लिखित माफीनामा देने को कहा। प्रोजेक्ट रिपोर्ट लटकाए रखने वाले सौरभ ने तुरंत ही लिखित माफी मांग ली। इस पर पूनम मलिक ने निगमायुक्त के यहां उनके द्वारा दिए गए शिकायती पत्र पर कार्रवाई न करने का एक और पत्र लिखा।
इस संबंध में जेई पूनम मलिक से पूछा गया तो उन्होंने घटना से ही इनकार कर दिया। पत्रकार ने मामले की पक्की जानकारी होने की बात बताई तो बोलीं कि मामले में समझौता हो गया है। सौरभ ने भी बताया कि उसने मैडम से माफी मांग ली है जिस पर उन्होंने शिकायत वापस ले ली है। समझने वाली बात यह है कि चलो जेई ने शिकायत वापस ले ली लेकिन दारूबाज़ सौरभ ने लिखित माफी मांग कर यह कुबूल कर लिया है कि उसने अपनी बॉस से अभद्रता की है। सरकारी विभाग अनुशासन से ही चलते हैं, ऐेसे में भले ही पीडि़ता ने शिकायत वापस ले ली लेकिन क्या निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा को सौरभ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करनी चाहिए? क्या वह सरकारी द$फ्तर को मयखाना बनाने वाले हरामखोरों को दो-दो बार नौकरी पर वापस रखने के कारणों की जांच कराएंगे। निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटाको ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य मेें कोई कर्मचारी अपने अधिकारी या आम आदमी से अभदता करने की हिम्मत न जुटा पाए। से अभद्रता करने की हिम्मत न जुटा पाए।