फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) दिनांक तीन दिसम्बर को बडखल गांव में हुई तोडफ़ोड़ को लेकर जनता के आक्रोश को कुचलने के लिए चार थानों की पुलिस को बुलाना पड़ा मामले की जांच-पड़ताल करने पर इस संवाददाता ने पाया कि गांव के सरकारी स्कूल के निकट पंडितों ने अपनी कुछ जमीन पर करीब 100-100 गज के प्लॉट काट कर, 30 हजार प्रति गज के भाव से बेच दिए थे। किसी जमाने में इस जमीन पर पंडित परिवार खेती-वाड़ी किया करते थे। आवादी बढऩे के चलते खेती करना सम्भव नहीं रह गया था वहीं लोगों को घर बनाने के लिए जगह की जरूरत पडऩा भी स्वाभाविक ही था। लिहाजा सलमा नामक मुस्लिम महिला ने यहां एक प्लॉट खरीदकर अपना छोट सा घर बना लिया था। इसके अलावा अन्य कुछ हिन्दुओं ने भी दुकाने व मकान आदि बना रखे हैं। जिन्हें केवल नगर निगम ने नोटिस देकर खानापूर्ति कर ली।
नगर निगम का तर्क यह बताया जाता है कि उक्त जमीन जंगलात की है। दूसरे मकान का नक्शा भी पास नहीं कराया गया था। गौरतलब है कि वहीं पर बने सरकारी स्कूल का तो क्या गांव में किसी भी मकान का नक्शा आज तक पास नहीं हुआ है। दूसरे जिन लोगों ने प्लॉट बेचे हैं, वे पुश्त-दर-पुश्त इस पर खेती करते आए हैं, कभी जंगलात विभाग ने इस पर अपना कब्जा नहंी जताया। मामले को समझने के लिए उक्त स्थान की भौगोलिक स्थिति को समझना भी जरूरी है। बडखल गांव से अनखीर को जाने वाली चार लेन सड़क पर बने भारत सरकार के वित्तीय प्रबंधन संस्थान के सामने से जब गांव में प्रवेश करते हैं तो उसी गली में उक्त स्कूल व घटनास्थ है। जिसे किसी भी तरह जंगलात के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
कुल मिला कर नगर निगम की इस कार्रवाई को उचित नहीं ठहराया जा सकता। यदि निगम को यहंा जंगल ही बनाना था तो उसने आज तक इसे क्यों नहीं बनाया? दूसरे, क्या उसे किसी की निजी जमीन पर इस तरह की कारर्वाई करने का अधिकार हो सकता है? बिल्कुल नहीं, उक्त कार्रवाई विशुद्ध रूप से निगम की गुंडागर्दी के अतिरिक्त कुछ भी नहीं थी।