फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) हाल ही में घोटालेबाज ओमदत्त की जगह ओल्ड फरीदाबाद नगर निगम एक्सईएन का चार्ज संभालने वाले नरेंद्र कुमार सुहाग ने वहां चल रही अव्यवस्थाओं पर शिकंजा कसा तो भ्रष्टाचारियों का सारा अमला उनसे चिपट गया। भ्रष्टाचारी पूर्व एक्सईएन ओमदत्त का चेला कंप्यूटर ऑपरेटर मुकेश शर्मा, महिला ड्राफ़्टमैन अन्नू बाला, जेई शिव कुमार, संयुक्त आयुक्त द्विजा गठवाल, पार्षद संजीव कुमार वाल्मीकि से लेकर नगर पालिका सफाई कर्मचारी संघ के प्रदेश स्तरीय नेता नरेश शास्त्री और अनेक पार्षदों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। झगड़े की जड़ डिवीजन पांच के 24 गांवों की वो फाइलें हैं जिनमें लूट की दास्तां छिपी हैं। एक्सईएन नरेंद्र सुहाग तो भ्रष्टाचारियों के आगे नहीं झुके, लेकिन निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा ने हरामखोरों का साथ देते हुए उनसे जोन पांच का चार्ज ले लिया। माना जा रहा है कि खडगटा ने नरेंद्र सुहाग से 24 गांवों का चार्ज केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के इशारे पर छीना है, क्योंकि वह उनके कथित ‘पुत्र भ्रष्टाचारी ओमदत्त के घोटालों का खुलासा कर देते।
यमुना नगर से तबादले पर आए एक्सईएन नरेंद्र कुमार ने 12 मई को नगर निगम ओल्ड फरीदाबाद जोन ज्वाइन किया था। उन्हें मंत्री विपुल गोयल का डिवीजन तीन और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर व मंत्री राजेश नागर के अधिकार क्षेत्र वाले डिवीजन पांच का जिम्मा सौंपा गया। डिवीजन पांच वर्तमान में नगर निगम में सबसे ज्यादा लूट कमाई वाला डिवीजन गिना जाता है क्योंकि 24 गांव होने के कारण यहां सबसे ज्यादा विकास कार्य चल रहे हैं। संदर्भ वश बताते चलें कि इन गांवों में विकास के नाम पर लूट किए जाने के कारण पूर्व चीफ इंजीनियर बीरेंद्र कर्दम को निलंबित कर चार्जशीट किया गया था। मज़दूर मोर्चा ने मार्च 2025 के अंक में ‘मंत्री के ‘बेटे ओमदत्त की भेंट चढ़ गया चीफ इंजीनियर बीके कर्दम शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर ओमदत्त की करतूतों का खुलासा किया था। ओमदत्त का तो ट्रांसफर हो गया लेकिन ओल्ड नगर निगम में उसका दाहिना हाथ व वसूली एजेंट कंप्यूटर ऑपरेटर मुकेश शर्मा, फर्जी एस्टीमेट, बिल बनाने में महारत हासिल कर चुका जेई शिव कुमार, बेलदार की काबिलियत रखने वाले एसडीओ, महिला ड्राफ्टमैन अन्नू बाला, संयुक्त आयुक्त द्विजा गठवाल वहीं जमे हुए हैं और 24 गांवों में लूट कमाई जारी है।
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार नरेंद्र सुहाग ने चार्ज संभालते ही सबसे पहले कर्मचारियों की उपस्थिति और रिकॉर्ड चेक करना शुरू किया। बताया जाता है कि ओल्ड जोन के 30-35 कर्मचारी तो ऐसे थे जिनका अटेंडेंस रजिस्टर में नाम ही नहीं चढ़ा था लेकिन तनख्वाह पूरे महीने की उठा रहे थे। कुछ की अटेंडेंस तो उपस्थिति रजिस्टर की जगह लॉग बुक में दर्ज की जा रही थी। नरेंद्र कुमार ने यह गड़बड़ी ठीक कराई तो उपस्थिति दिखा कर गायब रहने वाले अनेक हरामखोर कर्मचारियों को भारी पडऩे लगा। उनमेें तो कुलबुलाहट थी ही, नरेंद्र ने बतौर कंप्यूटर ऑपरेटर ओमदत्त के वसूली एजेंट मुकेश शर्मा के भी पेंच कस दिए।
सूत्रों के अनुसार सुहाग ने आते ही मुकेश से ओल्ड जोन के सारे विकास कार्यों की फाइलें तलब कर लीं, वह बहाना बनाने लगा। उन्होंने मुकेश को औपचारिक पत्र लिख कर डिवीजन तीन और पांच में विकास कार्यों के लिए चल रही टेंडर प्रक्रिया, चल रहे विकास कार्य, एस्टीमेट, बिल आदि की जानकारी मांगी। इस पर मुकेश शर्मा ने कार्यालय आना ही छोड़ दिया, तीन-चार दिन तक नहीं आने पर उन्होंने मुकेश की अनुपस्थिति दर्ज कर दी। ओल्ड कार्यालय को अपना अभ्यारण्य मानने वाला मुकेश अनुपस्थित किए जाने से तिलमिला उठा और उसने जाकर एक्सईएन से अभद्रता की। अपने स्टैंड से टस से मस नहीं हुए एक्सईएन ने मुकेश से सारी फाइलें देने को कहा। मामला न बनता देख मुकेश ने अपने आका ओमदत्त से मदद मांगी। ‘मंत्री पुत्र ने नगर निगम के आला अधिकारी से सुहाग को फोन करवा दिया कि फाइलें कंपाइल करने में समय लगेगा इसलिए मुकेश से कम के कम चार-पांंच दिन कुछ न बोले। अधिकारी की बात सुन कर नरेंद्र चुप हो गए।
सूत्रों के अनुसार मुकेश को समय इसलिए दिलवाया गया था कि शायद चार दिन बाद किसी अन्य एक्सईएन को चार्ज दे दिया जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। समय बीतने के बाद सुहाग ने फिर से फाइलें तलब कीं तो मुकेश ने पैंतरा खेलते हुए संयुक्त आयुक्त द्विजा गठवाल के पैर पकड़ लिए और अपनी सीट बदलवाने का आग्रह किया। मार्च 2025 के मज़दूर मोर्चा अंक में हम बता चुके हैं कि विकास कार्यों में द्विजा मैडम ने कैसे अपना कमीशन आधे से बढ़ा कर एक प्रतिशत कर दिया और मुकेश शर्मा ही वसूली कर रकम उन तक पहुंचाता है। कमाऊ पूत को बचाने के लिए द्विजा मैडम ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाते हुए उसे कंप्यूटर ऑपरेटर से तोडफ़ोड़ दस्ते में भेज दिया। बताया जाता है कि एक्सईएन नरेंद्र कुमार ने सारी फाइलें उन्हें सौंपे जाने के बाद ही मुकेश को रिलीव करने की शर्त रख दी। मरता क्या न करता, बीते शुक्रवार की शाम कार्यालय बंद होने से पहले मुकेश करीब साढ़े तीन सौ फाइलें लेकर पहुंचा और एक्सईएन के सामने पटक दीं। नरेंद्र कुमार ने वो सारी फाइलें एक्सईएन कार्यालय के कंप्यूटर वाली अलमारी में रखवा कर उसमें ताला लगा दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मुकेश ने कार्यालय मेंं रखा कंप्यूटर अपनी निजी संपत्ति बता कर उठा ले जाने की कोशिश की। सवाल यह है कि जब नगर निगम का अपना कंप्यूटर व नेटवर्क है तो फिर किसने मुकेश को निजी कंप्यूटर लगाने की अनुमति दी। खैर, सुहाग ने यह कहते हुए बात खत्म कर दी कि इसमें नगर निगम की फाइलें हैं इसलिए फिलहाल कंप्यूटर यहीं रहेगा, बाद में अधिकारियों के निर्देश पर इसका निपटारा किया जाएगा।
हुआ ये कि मुकेश फाइलें तो फेक कर चला गया लेकिन उसमें उसके आका ओमदत्त की कई ऐसी फाइले भी थीं भ्रष्टाचार और लूट कमाई का बड़ा सुबूत थीं। मुकेश को गुमान था कि फाइलें एक्सईएन के कमरे में रहेंगी तो वह जब चाहे तब उन्हें उठा लेगा, लेकिन उसे तब तगड़ा झटका लगा जब एक्सईएन ने फाइलों को अलमारी में बंद कर ताला लगा दिया। पांच बजे छुट्टी होने के बाद सारे कर्मचारी घर चले गए लेकिन नरेंद्र कुमार पेंडिंग काम निपटाने के लिए कार्यालय में ही रुके रहे, उनके साथ सहायक और कार्यालय का चपरासी भी रुके रहे। इधर मुकेश को अपनी गलती का अहसास हुआ तो उसने तुरंत ही जेई शिव कुमार से मदद मांगी। थोड़ी देर बाद उसने एक्सईएन को फोन कर कहा कि कुछ पुरानी फाइलें रह गई हैं जिनका इन फाइलों से कोई लेना देना नहीं है। एक्सईएन ने कहा कि अब तो कार्यालय बंद हो चुका है अगले दिन आओ, लिस्ट से टैली कर लिया जाएगा जो फाइल एक्स्ट्रा होगी वह आप ले जाना।
क्योंकि फाइलें तो तगड़े घपले वाली थीं इसलिए मुकेश बुरी तरह से घबरा गया और किसी भी सूरत में उन्हें तुरंत हासिल करने के षणयंत्र रचने लगा। सूत्रों के अनुसार इनमें पूर्व एक्सईएन ओमदत्त के समय की कुछ डबल पेमेंट की फाइलें और कुछ ऐसी फाइलें हैं जिनका भुगतान तो किया जा चुका है, लेकिन उनका रनिंग बिल निकला हुआ है और फाइनल पेमेंट रुका हुआ है। यदि ये गड़बडिय़ां पकड़ी गईं तो निगम में फिर करोड़ों के घोटाले का खुलासा हो सकता है, इस डर से उसने तुरंत ही जेई शिव कुमार से मदद मांगी। शिव कुमार को एक्सईएन का स्वभाव मालूम था क्योंकि दो दिन पहले ही उन्होंने छोटे से संप-वेल में चार मोटरें लगाने की लूट कमाई वाली उसकी फाइल पर हस्ताक्षर करने से मना किया था। इस पर उसने पार्षद संजीव कुमार वाल्मीकि से संपर्क किया।
पार्षद संजीव कुमार ने शाम करीब सात बजे एक्सईएन सुहाग को फोन कर उनके गांव में बनने वाली कॉलोनियों की गलियों की जानकारी मांगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुहाग ने जानकार नहीं होने की बात कहते हुए एसडीओ या जेई से बात करने का निवेदन किया। पार्षद अड़ गए तो एक्सईएन को कुछ गड़बड़ होने की आशंका हुई। उन्होंने पार्षद से कहा कि वह इसकी गारंटी ले लें कि कोई फाइल गुम नहीं होगी तो वे मुकेश को बुला कर अलमारी खुलवा देंगे, इस पर पार्षद महोदय पीछे हट गए।
वह कार्यालय में बैठे थे कि करीब आधे घंटे बाद महिला ड्राफ्टमैन अन्नू बाला आ गई। उन्होंने छुट्टी के बाद कार्यालय आने का कारण पूछा तो अन्नू बाला ने बताया कि पार्षद संजीव कुमार का फोन आया था और वह उनके गांव की गलियों की जानकारी मांग रहे हैं। समझने वाली बात यह है कि अन्नू बाला पार्षद के प्रति नहीं बल्कि अपने अधिकारी के प्रति जवाबदेह होनी चाहिए। दरअसल वह भी ओमदत्त की भ्रष्टाचारी टीम का हिस्सा हैं और जेई शिव कुमार की बहुत करीबी भी। खास बात यह है कि अन्नू बाला निगम कार्यालय के अंदर थीं और जेई शिव कुमार व मुकेश बाहर आस पास मौजूद थे। पार्षद का इतना दबाव और महिला कर्मी के आने के कारण एक्सईएन ने कंप्यूटर कक्ष का ताला खुलवा दिया। इसके बाद मैडम ने अलमारी का ताला खोल कर फाइल निकाली। सूत्रों के अनुसार उस फाइल में किसी गली विशेष का तो उल्लेख था ही नहीं, कॉलोनी की सभी 52 गलियां बनाए जाने की बात लिखी थी, यह बात पार्षद को बता दी गई।
कार्यालय बंद करने की बारी आई तो अन्नू बाला ने लघुशंका का बहाना बनाया। इस पर एक्सईएन व उनका सहयोगी कमरे से बाहर निकल गए और चपरासी को दरवाजे पर खड़ा कर दिया। शौचालय में से अन्नू बाला ने किसी को फोन किया और बाहर निकल कर अलमारी से दो तीन फाइलें निकाल कर अपने बैग में रख कर तेजी से निकल गईं। कमरे का ताला बंद करने के बाद चपरासी ने एक्सईएन को बताया कि मैडम दो-तीन फाइलें ले गई हैं। इस सब में महज दो तीन मिनट लगे होंगे, उन्होंने तुरंत ही फोन कर अन्नू बाला को कार्यालय लौटने और फाइल वापस करने को कहा।
अन्नू कोई फाइल नहीं होने के बहाने बनाती रही। पंद्रह बीस मिनट बीत जाने पर भी जब अन्नू नहीं लौटी तो एक्सईएन ने 112 पर कॉल कर पुलिस को बुला लिया। दस मिनट में पुलिस पहुंच गई और उसने भी अन्नू को फोन कर लौटने को कहा। करीब पौन घंटे बाद अन्नू आई और पुलिस के सामने दो फाइलें निकाल कर एक्सईएन को सौंपीं। पुलिस सूत्रों के अनुसार अन्नू ने जो फाइलें सौंपीं उनमें किसी जेई, एसडीओ, एक्सईएन आदि के हस्ताक्षर नहीं थे। देखने से ही लग रहा था कि नई नोटिंग लगाकर पुराने दस्तावेज बदले गए हैं। समझा जा सकता है कि अन्नू एंड कंपनी ने हेराफेरी वाली फाइलें बदल कर फर्जी फाइल थमा दीं। अन्नू ने पुलिस को बताया कि ये फाइलें कंप्यूटर पर चढ़ानी थीं इसलिए साथ ले गई थी। लेकिन जल्द ही उसका झूठ सामने आ गया, उसने खुद ही बताया कि उसके घर में कंप्यूटर नहीं है, फिर लैपटॉप का बहाना बनाया, पता चला कि लैपटॉप भी किसी मेडिकल स्टोर में चलाया जा रहा है। समझा जा सकता है कि नगर निगम के कंप्यूटर होने के बाद भी यदि मैडम मेडिकल स्टोर के लैपटॉप या निजी कंप्यूटर पर डेटा अपलोड कर रही थीं इसका अर्थ है निगम की भीतरी जानकारियां लीक की जा रही हैं।
मुकेश और शिव कुमार ने जब यह देखा कि एक्सईएन ने पुलिस बुला ली है और उनकी खास चेली अन्नू के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज हो सकता है तो तुरंत ही जेई यूनियन, सफाई कर्मचारियों के नेता नरेश शास्त्री, पार्षद संजीव कुमार और चाय-पकौड़े खाकर एक तरफा रिपोर्टिंग करने वाले पत्तलपाड़ों को बुला लिया। इन सबके आने से पहले अन्नू बाला ने पुलिस के सामने ऑफिस से बिना अनुमति फाइलें ले जाने की लिखित स्वीकारोक्ति कर ली थी। पूरे लूट गिरोह को मालूम था कि एक्सईएन सुहाग का पलड़ा भारी है तो किसी तरह मामला समझौता करवा कर मामले को रफा दफा किया गया। महिला का अपने अपने गुनाहों का लिखित कुबूलनामा, जिसकी प्रति मज़दूर मोर्चा के पास है, को भी फड़वा दिया गया।
रात की घटना से पार्षद, जेई से लेकर कर्मचारी नेताओं तक को समझ में आ गया था कि एक्सईएन नरेंद्र कुमार उनकी लूट कमाई होने नहीं देगा और गड़े मुर्दे भी उखाड़ेगा। यदि वह रहा तो इन सब का भ्रष्टाचारी गठबंधन चल नहीं पाएगा। कर्मचारियों को भी काम करना पड़ेगा, यह नहीं होगा कि हाजिरी लगाई और चाय-पानी, गप्प-सड़ाका करने निकल लिए।
इसी के मद्देनजर शनिवार को नगर निगम अधीक्षक अभियंता ओमबीर के कार्यालय में अनेक पार्षद, जेई यूनियन के पदाधिकारी आदि इकट्ठा हो गए और एक्सईएन नरेंद्र सुहाग पर दबाव बनाया गया। पार्षद संजीव कुमार ने आरोप लगाया कि एक्सईएन ने उन्हें जातिसूचक शब्द कहे। एक्सईएन ने इनकार करते हुए बताया कि जन प्रतिनिधियों से किस तरह बात की जाती है उन्हें अच्छी तरह मालूम है। नरेश शास्त्री ने यह जानते हुए कि आरोप झूठे हैं, एससी एसटी एक्ट का पत्ता खेलते हुए एक्सईएन को धमकी दी कि तुम्हारे खिलाफ केस दर्ज करवाया जाए या माफी मांगते हो। जेई यूनियन ने भी आरोप लगाया कि सुहाग ने जेई नाजिम को चार दिन पहले घूंसा मारा था इसलिए लिखित माफी मांगे, हालांकि जेई नाजिम ने कहा कि वो गलतफहमी थी जो सुलझा ली गई है। करीब ढाई घंटे के नाटक के बाद भी सुहाग नहीं झुके और बैठक बेनतीजा रही।
सुहाग को सबक सिखाने के लिए हरामखोरों और भ्रष्टाचारियों का शातिर गिरोह निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा से मिला और डिवीजन तीन व पांच का चार्ज उनसे छीनने की सिफारिश की। खडगटा ने भी भ्रष्टाचारियों का साथ देते हुए नरेंद्र सुहाग को बलि का बकरा बना डाला। जिन तीन और पांच डिवीजनों का भ्रष्टाचार उजागर हो सकता था वो उनसे न केवल छीन लिए बल्कि उन्हें पर्यावरण संरक्षण, सीएंडडी वेस्ट, सेंट्रल स्टोर, कैटल डंग मैनेजमेंट, हॉर्टीकल्चर वेस्ट मैनेजमेंट, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट आदि ऐसे काम सौंपे काम जो कभी भी पूरे न हों और दंडित करने के मौेके हमेशा बने रहें। खटगटा ने ऐसा करके यह साबित कर दिया कि वह भी इस शातिर गिरोह से अलग नहीं हैं।
यह सब डकैतियां उन्हीं विपुल गोयल की नाक के नीचे हो रही हैं जो इस महकमे के मंत्री हैं, क्या उन्हें यह सब नजर नहीं आ रहा, आ रहा है तो क्या उन्होंने खुद इन सबको लूट का लाइसेंस जारी कर रखा है।
एक्सईएन को भी हिस्सापत्ती के खेल में शामिल करना चाहते थे भ्रष्टाचारी नगर निगम ओल्ड जोन सूत्रों के अनुसार जिस तरह ओमदत्त के एक्सईएन रहते हुए यहां खुली लूट मची हुई थी उसी भ्रष्टाचार के आदी जेई शिव कुमार और कंप्यूटर ऑपरेटर मुकेश ने नए एक्सईएन नरेंद्र कुमार को भी शीशे में उतारना चाहा। उनके चार्ज संभालने के चार-पांच दिन बाद शिव कुमार एक संप वैल में मोटरें लगाने की फाइल लेकर उनसे पास कराने पहुंचा था। सूत्रों के अनुसार 8 फीट गुणा 7 फीट के संप वैल में पहले से ही एक मोटर लगी हुई है जो अच्छी तरह काम कर रही है। बावजूद इसके वहां तीन और मोटरें लगाने के नाम पर रुपये हड़पने की तैयारी थी।
एक्सईएन ने फाइल देख कर सवाल उठाए कि चार मोटरों की जरूरत क्यों और कैसे? शिव कुमार के पास कोई जवाब नहीं था तो बोल दिया कि बरसात में मोटरें खराब हो जाती हैं। सूत्रों के अनुसार एक्सईएन ने सलाह दी कि जितने भी संप वैल है उनके लिए स्पेयर मोटर खरीद कर रखी जा सकती है लेकिन वो देख कर मक्खी नहीं निगलेंगे, जहां जरूरत ही नहीं है वहां मोटर लगाने के लिए बेवजह की फाइल पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। फर्जी डिग्री वाले एक्सईएन भ्रष्टाचारी ओमदत्त से लूट कमाई के गुर सीखे शिव कुमार ने इस पर भी जिद नहीं छोड़ी तो नरेंद्र ने एसई या निगमायुक्त से स्वीकृति मिलने के बाद हस्ताक्षर करने की बात कह उसे टाला।
मोटर के नाम पर मुफ़्त में मोटी कमाई की लालच में जेई शिव कुमार ने पार्षद संजीव कुमार से फोन करवा दिया। पार्षद ने एक्सईएन को समझाया कि शिव कुमार बहुत ही होनहार जेई है, वह बड़ी मुश्किल से उसे अपने वार्ड में लाए हैं, उसकी फाइलों को देखा मत करो सीधे साइन कर दिया करो। जानकारों के अनुसार सुहाग जहां भी रहे हैं वहां फाइल को बिना पूरा जांचे परखे हस्ताक्षर नहीं करने का उनका नियम रहा है, ऐसे में उन्होंने पार्षद महोदय को विनम्रता पूर्वक मना कर दिया। इस तरह एक्सईएन महोदय जेई, पार्षद और निगम के खाऊ कर्मचारियों की आंख की किरकरी बन गए।
नरेश शास्त्री अवसरवादी दलित नेता दलितों के मसीहा बने फिरते नरेश शास्त्री इस लूट गिरोह की मदद मेें तो तुरंत आ खड़े हुए लेकिन उस वक्त क्या उनके मुंह में दही जमी हुई थी जब बिजली विभाग के एसडीओ के साथ मंत्री विपुल गोयल ने खूब जमकर बदतमीजी की थी, जाति सूचक शब्द कहे थे, कान पकड़वा कर माफी मंगवाई थी, तब इनका दलित प्रेम कहां सो रहा था। शास्त्री जैसे घटिया किस्म के नेता प्रत्यक्ष में तो दलितों की वकालत करते दिखते हैं और पर्दे के पीछे अफसरों और राजनेताओं के चरणचुंबन करते हैं। ये मज़दूरों को बहला फुसला कर उनके चंदे से शान की जिंदगी जीते हैं और सत्ता के खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं करते। ऐसे ही लोग, दलितों की सुरक्षा के लिए बने एससी एसटी एक्ट का दुरुपयोग करके कानून को बदनाम करते हैं।
कनिष्ठ अभियंताओं से मधुर संबंध रहे हैं महिला ड्राफ्टमैन के महिला ड्राफ्टमैन अन्नू बाला भी भ्रष्टाचार के दलदल में गहरे उतरी हुई बताई जाती हैं। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार उनके जेई शिव कुमार से ही नहीं कई अन्य भ्रष्टाचारी कनिष्ठ अभियंता, एसडीओ और एक्सईएन से भी प्रगाढ़ व मधुर सम्बंध रहे हैं। उनका पद तो ड्राफ्टमैन का है लेकिन महंगी लाइफस्टाइल दाल में कुछ काला होने का संकेत देते हैं। भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि जेई शिव कुमार और मुकेश के फ्लैट से ही मैडम भी भ्रष्टाचार का व्यापार चलाती हैं। यदि मोबाइल की लोकेशन जांची जाए तो अधिकतर समय दोनों या तीनों की एक ही जगह पाई जाएगी।