फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मुजेसर के अवैध इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित कालकाजी लुब्रिकेंट नामक कंपनी की वर्कशॉप में रखे ज्वलनशील केमिकल के ड्रमों में बीती सोमवार शाम आग लगने से उसमें काम करने वाले 42 से अधिक मज़दूर व कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे में घायल वर्कशॉप मालिक के बेटे व एक अन्य व्यक्ति की इलाज के दौराना मौत हो गई। डीसी आयुष सिन्हा ने हादसे की विस्तृत जांच करने के आदेश जारी कर औपचारिकता पूरी कर दी। समझा जा सकता है कि जांच में कारखाना प्रबंधन पर लापरवाही का दोष मढ़ दिया जाएगा, लेकिन उन अधिकारियों का शायद ही नाम लिया जाए जिनकी हरामखोरी और लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ, और आगे भी होते रहेंगे। इस तरह के हादसों में न तो फैक्टरी मालिक का खास नुकसान होता है न प्रशासन के हरामखोर अधिकारियों को कुछ फर्क पड़ता है, तबाह केवल बेचारे कामगार और उनके परिवार होते हैं जो हादसे में अपंग होकर जीवन भर के लिए मोहताज हो जाते हैं।
मुजेसर गांव में बनाया गया यह अस्थायी इंडस्ट्रियल एरिया नगर निगम के वार्ड तीन में आता है। नगर निगम के हरामखोर, रिश्वतखोर अधिकारियों के कारण इस इस क्षेत्र में अवैध कब्जे, अतिक्रमण का बोलबाला है। हालात यह हैं कि 22-23 चौक से मुजेसर फाटक होते हुए गोंच्छी ड्रेन के साथ साथ पूरे इलाके में अवैध कब्जे हैं। पचास गज-सौ गज के शेड के आगे नगर निगम की दो सौ से तीन सौ गज तक जमीन घेर कर अवैध रूप से सामान, ज्वलनशील केमिकल, सेहत के लिए नुकसानदेह रसायन, कबाड़ आदि रखा जाता है। अतिक्रमणकारियों ने ग्रीन बेल्ट उजाड़ कर पार्किंग, माल लोडिंग-अनोलिंग करने के अड्डे बना रखे हैं। अतिक्रमण के कारण सड़कें संकरी हो चुकी हैं कि वाहनों की आवाजाही तक मुश्किल होती है। ये अवैध कब्जे, अतिक्रमण दरअसल विधायक मूलचंद शर्मा की शह पर हुए हैं। गांव वाले बताते हैं कि पूर्व निगमायुक्त यशपाल यादव ने अतिक्रमण और अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान चलाया था, मुजेसर में ग्रीन बेल्ट से अवैध कब्जे मुक्त कराने के लिए दस्ता पहुंचा तो पूर्व मंत्री मूलचंद शर्मा ने दस्ते को यह कहते हुए भगा दिया था कि चले जाओ, यह चंडीगढ़ नहीं बनेगा। समझा जा सकता है कि जब सत्ता का साथ हो तो फिर अतिक्रमण और अवैध निर्माण कोई कैसे रोक सकता है। निगम के हरामखोर अधिकारियों ने भी कब्जाधारकों पर कार्रवाई करने के बजाय वसूली में भलाई समझी। इनको सहयोग मिला पार्षद रवि कश्यप जैसे जनप्रतिनिधियों से जो खड़े होकर अवैध कब्जा करवाते रहे। हालांकि रवि भगत दावा कर रहे हैं कि उन्होंने अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कई बार की है। दावे के उलट इन्हीं पार्षद रवि भगत ने इस संवाददाता को अपने इलाके में होने वाले अवैध निर्माण की खबर नहीं छापने की सलाह देने के साथ प्रति अवैध निर्माण दस हजार रुपये देने का भी ऑफर किया था। मज़दूर मोर्चा ने मुजेसर गांव में लाला जी की अवैध दुकान-मकान निर्माण की खबर लिखी थी।
हालांकि दुकान-मकान सील किए गए लेकिन फिर डी सील कर दिए गए, लाला जी खुद घूम घूम कर लोगों को बता रहे थे कि पार्षद जी को चार लाख रुपये दिए हैं तब डी सील हुआ है, पार्षद जी ने आइंदा कोई कार्रवाई नहीं होने का पक्का आश्वासन भी दिया है। समझा जा सकता है कि नेताओं के खाने के दांत और हैं, दिखाने के और। खुद को काली का भगत कहने वाले पार्षद रवि भगत ने एक पत्रकार से दावा किया कि वह अतिक्रम (अतिक्रमण)हटाने के लिए सविधान (समाधान)शिविर में शिकायत करेंगे। इसके विपरीत उन्होंने मुजेसर के कोली मोहल्ले मेें कन्हैया नाम के युवक के घर का पिलर नाली पर खड़ा करवा दिया, उसे अभयदान दिया कि नगर निगम का कोई अधिकारी इधर नहीं आएगा। कन्हैया गांव में उनके लिए कार्यक्रमों में दरी बिछाने, वीडियो में बड़ाई करने का काम करता है। मुजेसर गांव के बूस्टर में भगत जी की कृपा से डेयरी चल रही है। यही नहीं उनके इलाके मेें हर सप्ताह संडे बाजार लगता है, यह मुफ्त मेंं नहीं लगता, मोटी वसूली होती है। यदि पार्षद महोदय, सच में मां काली के ईमानदार भक्त हैं तो पहले ये सारे धंधे बंद करवाएं, अतिक्रमण हटवा कर जनता को अपनी नीयत साफ होने का परिचय दें, अन्यथा झूठ न फैलाएं। नेता-निगम-प्रशासन की मिलीभगत का नतीजा यह रहा कि बिना नक्शे, सुरक्षा मानक, अग्निशमन व्यवस्था आदि ताक पर रख कर निर्माण हो रहे हैं। हरामखोरी का नतीजा सोमवार को अग्निशमन कार्य सुचारु ढंग से नहीं हो पाने के रूप में सामने आया। साठ फुट चौड़ी सड़क अवैध कब्जे अतिक्रमण के कारण महज दस फीट ही रह गई, इस कारण एंबुलेंस और फायर टेंडर को भी आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों का कहना है कि दमकल विभाग वाले भी शायद ही यहां कभी फैक्टरियों का निरीक्षण करते हों, अधिकतर कारखाने अग्निशमन या कैजुअल्टी के बिना या दिखावे के उपाय करके चलाए जा रहे हैं। यदि प्रशासन मानकों का सही ढंग से पालन कराता तो शायद यह हादसा नहीं होता।
लाचार हैं सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं मुजेसर में हुए अग्निकांड ने ट्रिपल इंजन सरकारों की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है। बीके सिविल अस्पताल में सिर्फ 13 मज़दूरों को ही भर्ती किया गया, गंभीर रूप से झुलसे करीब 25 मज़दूरों को एस्कॉर्टस फोर्टिस रेफर करना पड़ा। ये बताता है कि सरकार चाहे जितने बड़े दावे करे लेकिन सच्चाई यह है कि सरकारी अस्पताल में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के पर्याप्त इलाज तक की सुविधाएं नहीं हैं। सूरजकुंड अंतराष्ट्रीय मेले में झूला टूटने की घटना को चंद दिन ही हुए हैं लेकिन सरकार ने कोई सबक नहीं लिया। औद्योगिक नगरी होने के कारण हादसों की प्रोबेलिटी काफी बढ़ जाती है बावजूद इसके बीके सिविल अस्पताल को रेफर सेंटर से आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। सरकारी कार्यक्रम होने के कारण मुख्यमंत्री और न जाने कितने मंत्री नेता, अधिकारी सूरजकुंड मेले के घायलों का हाल जानने पहुंच गए थे, निजी कंपनी में हुआ यह हादसा उससे कम भयावह नहीं लेकिन घायल गरीब मज़दूरों की सुधि लेने कोई नेता-मंत्री नहीं पहुंचा, अधिकारी भी सहानुभूति के लिए नहीं अपनी ड्यूटी की औपचारिकताएं पूरी करने पहुंचे थे।