फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) घर को ही आग लग गई घर के चिराग से वाली कहावत चरितार्थ करने में जुटे हूडा अधिकारी प्राधिकरण की जमीनों पर अवैध कब्जा, अतिक्रमण करवाने में लगे हैं। आर्किटेक्ट और बिल्डरों की मिलीभगत से ये अधिकारी पहले ही मोटा पैसा कमा रहे थे अब अवैध निर्माण करने वालों से सीधे रिश्वत लेना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि जानकारी होने के बावजूद हूडा के सेक्टरों मेंं प्रशासक के आदेश के बावजूद अधिकारी न तो सर्वे करा रहे हैं और न ही कोई कार्रवाई की जा रही है।
हूडा के सेक्टर 21 सी मार्केट में दुकानदारों ने सार्वजनिक कॉरिडोर पर कब्जा कर उसे अपनी दुकान का हिस्सा बना डाला है। कई दुकानदार तो कॉरिडोर अड़ोस-पड़ोस से ऊंचा कर उसे निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, आम आदमी आसमान के नीचे चलने को मजबूर है। मार्केट में बूथ साइट प्लॉटों पर डीपीसी का जमकर उल्लंघन किया गया है, बारिश में जलभराव से बचने के बहाने दुकानदार मनमर्जी से डीपीसी लेवल बनवा रहे हैं इससे मार्केट समतल नहीं रह गई है। दुकानों की ऊंचाई में भी मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सत्ताधारी बल्लभगढ़ विधायक के रिश्तेदारों के मिलन रेस्टोरेंट के स्नैक्स काउंटर तो पब्लिक कॉरिडोर पर कब्जा करके ही बनाए गए हैं। यही नहीं पड़ोस में खाली पड़ी सरकारी जमीन का इस्तेमाल भी खुलेआम किया जा रहा है।
सेक्टर 21 सी मार्बल मार्केट का तो और भी बुरा हाल है, यहां खुलेआम कई दुकानो में 100 प्रतिशत बेसमेंट बनाई जा रही हैं। 81 गुणा 42 फीट की दुकान में 27 गुणा 12 फीट का ही बेसमेंट बनाने की अनुमति है वह भी करीब साढ़े चार लाख रुपये कंपाउंडेबल शुल्क जमा करने के बाद लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। समझा जा सकता है कि बिना कंपाउंडेबल शुल्क जमा कराए सौ प्रतिशत बेसमेंट आला अधिकारियों की सहमति के बाद ही बनाए जा सकते हैं। यहां डबल स्टोरी शॉप (डीएसएस) में एक मंजिल निर्माण के बाद ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। डीएसएस प्लॉट्स में डीपीसी से लेकर बिल्डिंग बॉयलॉज का खुला उल्लंघन चल रहा है। मार्केट में अनबिके पड़े हूडा के प्लॉटों पर अवैध कब्जे कर दुकानदार उन्हें बाकायदा गोदाम की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, इन प्लॉटों को बांस बल्लियों से घेर कर कब्जा कर रखा गया है, कई लोगों ने तो इन प्लॉटों को मोटे किराए पर उठा रखा है।
ऐसे ही हालात हूडा के अन्य सेक्टरों में भी हैं, अधिकतर मार्केटों में 27 गज के बूथ संचालकों ने पचास से सौ गज तक जगह घेर रखी है, इस जगह का इस्तेमाल वे अपना सामान रखने, ग्राहकों के लिए कुर्सी मेज बिछाने में करते हैं, इसके कारण आम आदमी का रास्ता बंद है। ऐसा नहीं है कि अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है। हूडा एडमिनिस्ट्रेटर अनुपमा अंजली को 23 दिसंबर को इसकी जानकारी दी गई थी, तब उन्होंने एसडीओ और जेई भेज कर कार्रवाई कराने की बात की थी, लगभग एक महीना होने वाला है लेकिन न तो एसडीओ दिखाई दिया न जेई। यही नहीं एओ नवीन कुमार ने भी बीते सोमवार सेक्टर 21 सी और 21सी मार्बल मार्केट में आनन फानन सर्वे और कार्रवाई कराने की बात कही थी लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। हूडा कार्यालय में चर्चा है कि अनुपमा मैडम मातृत्व अवकाश पर जाने वाली है, इसलिए उन्होंने मांग बहुत बढ़ा दी है।
जानकारी होने के बावजूद अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करना अवैध कब्जा धारकों, आर्किटेक्ट्स और अतिक्रमण कर्ताओं के साथ मिलीभगत होने का संदेह पैदा करता है। ग्रीन बेल्ट में अवैध निर्माण को बना रहने देने के लिए डेढ़ लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े गए जेई नरेश का उदाहरण इस संदेह को पुष्ट करता है कि हूडा में इस तरह का खेल चल रहा है। जेई जैसा अदना कर्मचारी अकेले डेढ़ लाख रुपये नहीं डकार सकता, समझा जा सकता है कि वह तो केवल रिश्वत की रकम से एक छोटा टुकड़ा रख कर सारी रकम आला अधिकारियों तक पहुंचाता होगा तभी तो हूडा सेक्टरों में जहां देखो वहीं अवैध निर्माण, कब्जेदारी, बिल्डिंग बायलॉज का खुला उल्लंघन हो रहा है।