मोदी सरकार में शिष्टाचार हो गया है भ्रष्टाचार

मोदी सरकार में शिष्टाचार हो गया है भ्रष्टाचार
February 14 07:12 2026

अशोक शर्मा
आज बात होगी भ्रष्टाचार की। मोदी सरकार और उनकी जो राज्य सरकारें हैं उनका हमेशा दावा रहता है कि भाजपा बड़ी ईमानदार पार्टी है। इसके राज्य में घोटाले नहीं होते हैं। इसके पहले की सरकारें बहुत भ्रष्ट थीं। 2जी, 3जी, 4 जी, 5जी पता नहीं कौन-कौन से जी, कोयला घोटाला और तमाम तमाम सारी चीजें आपने सुनी हैं जिसको मोदी जी बार-बार दोहराते रहते हैं। संसद में जितनी बार बोलते हैं इन सबका नाम लिए बिना तो उनका काम नहीं चलता। इस बार तो अमित शाह जी ने बाकायदा नारे लगवाए। ये अलग बात है कि जब नारे लग रहे थे तो ज्योतिरादित्य सिंधिया चुपचाप बैठे हुए थे। अगर जिन लोगों को 2014 याद होगा उनको मालूम होगा कि ये सारे तथाकथित घोटाले कैसे बाहर आए थे। सीएजी की रिपोट्र्स आईं थीं और उन रिपोट्र्स से यह सारी चीजें निकली थीं। बाद में पता चला कि उस समय जो सीएजी के चीफ थे विनोद राय जी वो बाद में बड़े-बड़े पदों पर गए। लेकिन जिन घोटालों का आरोप लगा था 9 साल में नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार मिलकर एक चिडिय़ा को भी उन घोटालों में जेल नहीं भेज पाई। अब वही सीएजी, यानी काँप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल जब अपनी रिपोट्र्स लेकर आते हैं तो एकदम शांति हो जाती है।

घोटाले छिपाने में मोदी के लिए कवर फायरिंग करती है गोदी मीडिया
दरअसल मोदी राज्य में घोटाले होते हैं लेकिन उन घोटालों की मीडिया में कहीं रिपोर्टिंग नहीं होती है। मैंने सोचा कि टीवी चैनल वाले भाई साहब और बहन जी तो बोलेंगे नहीं तो अपन ही बोलते हैं, बात जहां तक पहुंचे। इस बार संसद में जो सीएजी की रिपोर्ट आई उसमें कई कई बड़े घोटाले सामने आए हैं। पहला घोटाला है आयुष्मान भारत का। आयुष्मान भारत आप जानते हैं खूब शोर मचाया जाता है। खूब विज्ञापन लगते हैं। जहां जाते हैं प्रधानमंत्री जी आयुष्मान के बारे में बोलते हैं कि जनता के लिए 5 लाख का इलाज फ्री कर दिया गया है। आपको कोई दिक्कत नहीं है। आप अस्पताल में जाइए अपना इलाज कराइए। पांच लाख रुपये तक के इलाज का भुगतान गवर्नमेंट करेगी। अच्छी बात है, जनता के इलाज की जिम्मेदारी तो सरकार की है ही। आयुष्मान योजना का स्वागत होना चाहिए। किसी ने विरोध भी नहीं किया। लेकिन सीएजी जो बता रहे हैं वो बेहद खतरनाक है। सांस रोक कर सुनिए। सीएजी का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना में एक तरफ तो मर चुके लोगों का इलाज हुआ। यानी ऐसे लोगों के इलाज के लिए उन खातों में पैसे दिए गए जो पहले ही मर चुके थे। और दूसरी तरफ एक ही मोबाइल नंबर से लाखों लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ है।

आयुष्मान भारत योजना में आप रजिस्ट्रेशन कराने जाएंगे तो आपको मोबाइल नंबर देना पड़ेगा। एक मोबाइल नंबर से लाखों लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। चलो चार पांच लोगों का होता तो हम मान लेते कि मान लो एक ऐसा परिवार है जिसमें एक ही आदमी के पास मोबाइल है तो उसने अपने पूरे परिवार का एक ही नंबर से रजिस्ट्रेशन करा दिया। लेकिन यहां तो एक-एक नंबर से लाखों लाखों लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। आप समझ सकते हैं कि यह किस तरह का तमाशा हुआ है। यह पूरी योजना मैंने आपको बताया कि इसमें 5 लाख तक का इलाज मुफ्त में कराए जाने का दावा किया गया है। इस स्कीम का नाम भारतीय जन आरोग्य योजना यानी पीएम जेएवाई है। इस योजना का लाभ लेने के लिए लोगों को आयुष्मान कार्ड बनवाना पड़ता है। जिसके बाद योजना के तहत लिस्टेड लोगों को लिस्टेड हॉस्पिटल्स में इलाज कराने की सुविधा दी जाती है। इसका उद्देश्य करोड़ों गरीबों के उद्धार का बताया गया लेकिन ऐसा लगता है कि गरीबों का उद्धार तो हुआ ही नहीं। इस घोटाले में सरकारी लोगों का और ऊपर बैठे मंत्रियों का या फिर पॉलिटिकल लोगों का उद्धार हुआ है। सीएजी कहता है कि इस स्कीम के तहत पैसा गबन करने के उद्देश्य से मर चुके लोगों का इलाज भी रिकॉर्ड किया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि जिस मोबाइल नंबर से करीब 7 लाख लोगों का रजिस्ट्रेशन कराया गया। उस नंबर का कोई सिम कार्ड ही नहीं है।

एक ही मोबाइल नंबर पर साढ़े सात लाख लाभार्थी
एक तो एक ही मोबाइल से सात साढ़े सात लाख लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ और वो मोबाइल नंबर ऐसा है जिसका सिम कार्ड उपलब्ध ही नहीं है। बीआईएस के डेटाबेस में जब एनालिसिस हुई तब पता चला कि कितने सारे फर्जी रजिस्ट्रेशन हुए हैं। रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि करीब 1,39,300 लोग एक नंबर से जुड़े हुए हैं। वो नंबर है 88 88 88 88 यानी 10 बार आठ लिख दीजिए। वहीं 96460 यानी तकरीबन 1 लाख लोग मोबाइल 9000000000 से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा भी करीब 20 नंबर ऐसे सामने आए हैं जिनसे 10,000 से लेकर 5000 लाभार्थी जुड़े हुए हैं। और ये सारे नंबर ऐसे हैं जो उपलब्ध ही नहीं है। जो नंबर है ही नहीं यानी फर्जी नंबर पर फर्जी लोगों को रजिस्टर किया गया। आप समझ लीजिए कि अगर 1 लाख लोग रजिस्टर हैं हर इलाज के लिए 5 लाख जारी हुआ तो आप समझ सकते हैं कि कैसे करोड़ों रुपए इधर से उधर कर दिए गए।

डाटा चेक करने पर सीएजी ने यह बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के दौरान 8876 मरीजों की मौत हुई। जबकि सिस्टम में 2,24,923 दावों का भुगतान दिखाया गया। इनमें 3446 मरीजों को 6 करोड़ 97 लाख का भुगतान किया गया। यह सारा भुगतान फर्जी है। आप अंदाज लगा सकते हैं कि आयुष्मान भारत में इतना बड़ा घोटाला सीएजी सामने लेकर आता है लेकिन ना तो संसद में इस पर बहस होती है न ही टीवी चैनलों पर पैनल बिठाकर कोई पूछता है कि मोदी सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय में इतना बड़ा घोटाला कैसे हुआ? अब आते हैं दूसरे घोटाले पर। दूसरे घोटाले पर आने से पहले कबीर दास से माफी मांगते हुए उनका एक दोहा थोड़ा पलट कर पढ़ता हूं। राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट अंतकाल पछताएगा जब सत्ता जाएगी छूट। राम मंदिर जो कि सबसे बड़ा प्रोजेक्ट बताया जाता है जिसके बारे में तमाम लोग बातें करते हैं। अमित शाह ने यहां तक कह दिया था कि राम मंदिर नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बन रहा है। जैसे कि सुप्रीम कोर्ट नरेंद्र मोदी के कहने पर काम करता है। यह खुद स्वीकार कर रहे हैं।

मोदी राज में राम नाम की लूट है
जब राम मंदिर प्रोजेक्ट का मामला शुरू हुआ था। तभी न्यूज़ लाँड्री नाम की वेबसाइट ने तमाम सारे किस्से पब्लिश किए थे, कि किस तरह से जैसे ही वह प्रोजेक्ट आया उसके आसपास की जमीनों की खरीद-फरोख्त का बड़ा घोटाला शुरू हो गया, जिसमें राम मंदिर निर्माण से जुड़े हुए लोग शामिल हैं। अब एक और घोटाला सामने आया है। असल में अयोध्या डेवलपमेंट प्रोजेक्ट स्वदेश दर्शन योजना के तहत रामायण सर्किट का हिस्सा है। इसके लिए 27 सितंबर 2017 को 127 करोड़ 21 लाख की मंजूरी दी गई थी। इसमें से 115 करोड़ रुपये अभी तक जारी भी किए जा चुके हैं। रामायण सर्किट के तहत अयोध्या के अलावा चित्रकूट, श्रंगवेरपुर का भी विकास किया जा रहा है। यह पूरा एक सर्किट बनाया जा रहा है।

सीएजी ने जनवरी 2015 से लेकर मार्च 2022 के बीच स्वदेश दर्शन योजना की परफॉर्मेंस ऑडिट की, 9 अगस्त को यह रिपोर्ट लोकसभा में पेश की गई। रिपोर्ट में सीएजी ने बताया कि इस योजना के तहत छह राज्यों में जो छह प्रोजेक्ट चल रहे हैं उनमें ठेकेदारों को 19 करोड़ 73 लाख का अनुचित लाभ पहुंचाया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रोजेक्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड को जो गवर्नमेंट का है, ठेके की 5 प्रतिशत राशि गारंटी के रूप में जमा करनी थी, यह राशि बनती है 3 करोड़ 1 लाख रुपये लेकिन उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड ने सिर्फ 1 करोड़ 86 लाख रुपये ही जमा किए और इसके लिए कोई कारण नहीं बताया। जाहिर है कि लगभग 1.15 करोड़ का नुकसान हुआ। यही नहीं सीएजी ने बताया कि अयोध्या के गुफ्तार घाट पर 14 हिस्सों में काम होना था। यह काम अलग-अलग ठेकेदारों को दिया गया था। सीएजी ने बताया कि सिंचाई विभाग ने ठेकेदारों द्वारा जो बिड दी जाती है उसका कोई आकलन ही नहीं किया और ठेके आवंटित कर दिए गए जिससे विभाग को 19 लाख 13 हजार रुपयों का नुकसान हुआ। रिपोर्ट यह भी बताती है कि राज्य सरकार ने स्वत: संज्ञान लेते हुए तीन ठेकेदारों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था। जिनका रजिस्ट्रेशन रद्द हुआ या पहले से था उनको भी जीएसटी की राशि मिली। जाहिर है वह ठेकेदार जीएसटी लेने के हकदार नहीं थे। बावजूद इसके एक ठेकेदार को 1 लाख, 57 हजार रुपये का अनियमित भुगतान किया गया। बाकी दो ठेकेदारों का जीएसटी भुगतान भी विभाग द्वारा काटा नहीं गया। यही नहीं ठेकेदारों को उन कामों के लिए भी भुगतान कर दिया गया जो उन्होंने किए ही नहीं। जाहिर है कि अयोध्या के नाम पर यह जो प्रोजेक्ट है इसमें जबरदस्त घोटाला हुआ है। अब यह घोटाला हुआ है तो फायदा किनको हुआ होगा यह आप खुद समझ सकते हैं।

पेंशन के नाम पर भी हुई लूट मार्र
बात इन्हीं दो घोटालों पर खत्म नहीं होती। एक और बड़ा घोटाला है। इसको नाम दीजिए पेंशन घोटाला। सीएजी ने जांच में यह पाया कि मिनिस्ट्री ऑफ रूरल डेवलपमेंट यानी केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अपनी ही कुछ अन्य योजनाओं के प्रचार के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के लिए आवंटित धनराशि का उपयोग किया। 2017-18 से 2020-21 तक के एनएसएपी की परफॉर्मेंस रिपोर्ट 8 अगस्त को लोकसभा में पेश की गई थी। आपको बता दूं एनएसएपी में नॉर्मल पेंशन दी जाती है, उसके अलावा वृद्धावस्था पेंशन भी शामिल है। रिपोर्ट कहती है कि राज्यों केंद्र शासित प्रदेशों को एनएसएपी की विभिन्न उपयोजनाओं के तहत पेंशन के वितरण के लिए राशि आवंटित की गई थी। कुल आवंटन निधि का केवल तीन प्रतिशत ही कोई राज्य या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनिक व्यय यानी प्रचार या बाकी सारी चीजों पर खर्च कर सकता है।

ऑडिट के दौरान पाया गया कि एनएसएपी के लिए जो धन आवंटित हुआ था उसमें से जबरदस्त तरीके से हेरफेर किया गया जिसमें मिनिस्ट्री और स्टेट दोनों शामिल हैं। रिपोर्ट बताती है कि जनवरी 2017 में मिनिस्ट्री ऑफ रूरल डेवलपमेंट ने अपने कुछ कार्यक्रमों योजनाओं को पूरे देश में होर्डिंग्स के माध्यम से प्रचारित किया। इस प्रचार के लिए जून 17 और अगस्त 17 में 39 लाख 15 हजार और 2 करोड़ 44 लाख रुपया स्वीकृत किया गया था। इन योजनाओं में ग्राम समृद्धि और स्वच्छ भारत पखवाड़ा समेत अनेक योजनाएं शामिल थी। रिपोर्ट बताती है कि जून और सितंबर 2017 में डीएवीपी को कार्य आदेश जारी किए गए थे। प्रचार अभियान सितंबर 2017 से शुरू किए जाने थे। उक्त अभियान की मद में व्यय किए जाने के लिए अनुमोदित धन सक्षम प्राधिकारी द्वारा राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत उपलब्ध कराना बताया गया था। हालांकि ऑडिट में पाया गया कि असल में जो धन था वह सामाजिक सुरक्षा कल्याण यानी कि एनएसएपी योजनाओं से खर्च किया गया था।

बहुत सीधा सा मामला है सरकार के लिए पेंशन महत्वपूर्ण नहीं थी, प्रचार महत्वपूर्ण था। जो पैसा कर्मचारियों के पेंशन में, वृद्धावस्था पेंशन में खर्च होना था उससे सरकार ने अपनी योजनाओं का प्रचार किया। आप समझ सकते हैं 2017-18 में यह प्रचार जब किया गया तब 2019 का चुनाव सामने था। कहा जा सकता है कि चुनावी फायदे के प्रचार के लिए पेंशन फंड का पैसा लगा दिया गया। अब ये सारी चीजें सीएजी लेकर आई है। यह वही सीएजी है जिसके रिपोर्ट पर पूरे देश में तमाशा मच गया था, असल में 2014 में अगर कांग्रेस गवर्नमेंट गई तो इसी रिपोर्ट की वजह से। मैं किसी को डिफेंड नहीं कर रहा हूं, अगर उस समय सीएजी की जो रिपोर्ट आई थी, उसके हिसाब से भ्रष्टाचार हुआ था, तो जांच होनी चाहिए थी और भ्रष्टाचार करने वालों को जेल में भेजा जाना चाहिए था। लेकिन बाद की तमाम सारी एनालिसिस बताती है कि रिपोट्र्स के साथ छेड़छाड़ की गई थी। रिपोट्र्स में जानबूझकर भ्रष्टाचार दिखाने की कोशिश की गई थी, जबकि वो भ्रष्टाचार नहीं था। इसका सबसे बड़ा उदाहरण मिला कोल परियोजनाओं में, कहा गया कि कोल के ठेके असली कीमत से कम में दिए गए। मान लिया सीएजी सही थी। लेकिन जब बाद में एनडीए की सरकार आई तो उसने उससे भी कम पैसे पर कोल के ठेके दिए थे। और अब वही सीएजी भाजपा-एनडीए राज में रिपोट्र्स लेकर आई है तो चारों तरफ खामोशी है।

भाजपाई राज्यों में भी भ्रष्टाचार चरम पर
यह किस तरह से भ्रष्टाचार है इसकी जानकारी बिजनेस लाइन में 31 जुलाई को हरियाणा के संबंध में छपी हुई एक रिपोर्ट बताती है। आपको समझ में आ जाएगा कि राज्य सरकारों में किस स्तर का भ्रष्टाचार है। बिजनेस लाइन में 31 जुलाई 2023 को एक रिपोर्ट छपी है जिसमें बताया गया है कि यही काँप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया ने हरियाणा गवर्नमेंट में एक बड़ा स्कैम पकड़ा है। स्कैम यह है कि फरीदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने 13 करोड़ रुपयों का पेमेंट कई सारे इंस्टॉलमेंट्स में दिया हुआ है और यह सारा का सारा पैसा एक ही व्यक्ति को दिया गया है। यानी वहां पर एक ही व्यक्ति को लगातार ठेके दिए गए। बिजनेस लाइन की रिपोर्ट बताती है कि काँप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल का कहना है कि एक कॉन्ट्रैक्टर हैं सतबीर सिंह जो फरीदाबाद के रहने वाले हैं, को बिना किसी नियम कानून के 2015 के बाद अगले 5 सालों तक यानी 2020 तक बिना ई टेंडरिंग के, बिना किसी गाइडलाइन का पालन किए हुए लगातार ठेके दिए गए। 588 वाउचरों के तहत 183 करोड़ 83 लाख का उनको भुगतान हुआ है। लेकिन जहां पहले सीएजी की रिपोर्ट आने के बाद तमाशा मच जाता था, तहलका मच जाता था, अखबारों में रिपोर्ट छपती थी, टीवी चैनलों पर बहस चलती थी, चौराहों पर बहस चलती थी, वहां इन रिपोट्र्स के आने के बाद शांति है।

तो कहा जा सकता है कि मोदी सरकार में घोटाले होते तो हैं लेकिन रिपोर्ट नहीं होते। मोदी सरकार के घोटालों को बताने में हमारा मीडिया शर्माता है और एक झूठी इमेज बनाता है कि बड़ी ईमानदार सरकार है। हर चीज की कीमत बढ़ी है। टैक्स बढ़ा है। हर चीज पर टैक्स लग गया है। बैंक से अपना पैसा निकालो या जमा करो या विदेश जाओ सब पर टैक्स, ढेर सारे नए-नए नियम, जीएसटी बन गया, फलां बन गया, सब कुछ बन गया और इतने सबके बावजूद सरकार को जो इनकम मिल रही है वह कहां जा रही है कुछ पता नहीं है। आयुष्मान भारत योजना की बात की गई कि जनता को हम फ्री इलाज दे रहे हैं। आप देख रहे हैं कि उसमें भयानक भ्रष्टाचार है। पेंशन देने के लिए जो पैसा दिया गया वो प्रचार में खर्च हो जा रहा है। जब कोविड चल रहा था आप जानते हैं अच्छी तरह से कोई सुविधा जनता को नहीं मिल रही थी। तो यह सवाल आपको भी आगे आकर पूछना पड़ेगा कि यह सारे पैसे जो हमारी जेब से निकाले जा रहे हैं वह जा कहां रहे हैं और जब आप यह सवाल पूछेंगे और थोड़ी तलाश करेंगे तो मालूम होगा कि भ्रष्टाचार लगातार हो रहा है। बस उसकी रिपोर्ट नहीं हो रही है और गोदी मीडिया उसको दिखा नहीं रहा है। अगर वह लोग नहीं दिखाएंगे तो हमारा तो फर्ज बनता है कि कम से कम हम आप तक सच्चाई पहुंचाएं।
(लेखक द क्रेेडिबल हिस्ट्री चैनल के संपादक हैं)

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Mazdoor Morcha
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