फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) प्रदेश की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने हाल ही में आदेश जारी किया है कि भूजल की कमी वाले प्रत्येक खंड में पांच-पांच जलाशय विकसित किए जाएंगे। इसी तरह जुमलेबाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अप्रैल 2024 में प्रत्येक जिले में 75 जलाशयों के पुनरुद्धार किए जाने की घोषणा की थी। मोदी के 75 तालाब तो आज तक पुनर्जीवित हो नहीं सके, देखना यह है कि श्रुति चौधरी कब तक नए जलाशय बनवा पाएंगी।
अरावली पहाडिय़ों की गोद में बसा फरीदाबाद शहर भूजल स्तर औसत से नीचे होने और दोहन के कारण वर्ष 2020 से पहले डार्क जोन में था। भूजल रिचार्ज करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के नाम पर खूब लूट-बांट हुई और आज तक कोई रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम चालू नहीं हो पाया। भूजल रिचार्ज तो हुआ नहीं अंधाधुंध दोहन जारी रहा। नतीजा यह हुआ कि 2020 में शहर को क्रिटिकल जोन में शामिल कर लिया गया यानी यहां भूजल रिचार्ज से लगभग दोगुना दोहन किया जा रहा है। 2021 में अटल भूजल योजना के तहत तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार उस वर्ष कुल 22,151. 60 हेक्टेयर मीटर जल दोहन किया गया जिसके विपरीत महज 11,034.07 हेक्टेयर मीटर ही पुनर्भरण हुआ।
कोढ़ में खाज जल माफिया साबित हुए, नगर निगम के भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से पूरे शहर में पांच सौ से ज्यादा ट्यूबवेल चलाए जा रहे हैं। नगर निगम भी 1450 ट्यूबवेल से भूजल का दोहन करता है। करीब दो हजार ट्यूबवेल 45 लीटर प्रति मिनट की दर से भूजल का दोहन करते हैं। भूजल रिचार्ज नहीं होने का दूसरा कारण प्राकृतिक जलाशयों का सूख जाना या अतिक्रमण द्वारा उनका समाप्त हो जाना रहा। नगर निगम रिकॉर्ड के अनुसार शहर में 150 से अधिक जलाशय थे जिनमें से 76 पूरी तरह सूख चुके हैं या समाप्त हो चुके हैं, इन तालाबों को पहले कचरे से भर कर सड़ाया गया, फिर सुखा कर नेता-भूमाफिया इन्हें बेच कर खा गए। जो बरसाती पानी इन तालाबों में भर कर भूजल रिचार्ज करता था वह गलियों में खड़ा हो घरों में घुस कर लोगों की मुसीबत बनता चला गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2024 में अमृत सरोवर का डंका बजाया था, इसके तहत शहर में 75 जलाशयों को पुनर्जीवित करने के नाम पर मोटे बजट, मोटे टेंडर छोड़ कर मोटी रकम डकारने का खेल खेला गया। नौ महीने बीत चुके हैं लेकिन योजना कागजों से बाहर नहीं निकल पाई है। लाज बचाने के लिए कुछ ऐसे तालाबों को शामिल कर लिया गया जिनमें पहले से ही पानी भरा हुआ था। ये तालाब पुनर्जीवित तो तब हों न जब इनकी जगह बची हुई हो। सेक्टर 55 में कुम्हारों के तालाब पर सरकार ने सड़क ही बना दी, बची हुई जगह पर अवैध कब्जे हो गए। अजरौंदा गांव का तालाब भी लापता हो चुका है, सबसे मशहूर ओल्ड फरीदाबाद स्थित बराही तालाब को भरने के बजाय उसे पर्यटन स्थल की तरह विकसित किया जा रहा है।
यह तब ही मुमकिन हो सकता है जब तालाब में कूड़ा और सीवर न डाला जाए। विदित है कि शहर के अधिकतम सीवर उफनते रहते हैँ और उनका गंध बह कर नीचे की ओर जाता है क्या बराही तालाब उससे बच पाएगा? नहीं बच पाएगा क्योंकि सीवर साफ करने वालों के लिए सबसे सरल उपाय पानी को तालाबों की ओर मोड़ देना ही होता है।
कुल मिला कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमृत सरोवर प्रोजेक्ट जुमला ही साबित हो रहा है। इस प्रोजेक्ट के पूरे होने के आसार नजर भी नहीं आ रहे और श्रुति चौधरी ने हर ब्लॉक में पांच नए जलाशय विकसित करने का शोशा उछाल दिया है। जिस शहर में सरकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त जमीन भी नहीं बची है और पुराने तालाब ही पुनर्जीवित नहीं किए जा पा रहे हैं वहां नए तालाब बनेंगे कहना मुश्किल है। हां, अधिकारियों की लूट बांट की संभावनाएं एक बार फिर बन गई हैं।