ज्ञान प्रकाश बागी करनाल : अपनी संपदा पर एक अति अहम अवैध कब्जे को लेकर करीब एक दशक बाद अचानक सक्रिय हुए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने यहां मंदिर परिसर में विलीन अपने पांच प्लाटों को वापिस ले लिया !
अधिकृत जानकारी के मुताबिक प्राधिकरण दस्ते द्वारा यह कार्रवाई स्थानीय सेक्टर 5 के अंतर्गत स्थापित “श्रीराम मंदिर सेवा सदन” से संलग्न एक हजार गज के परिसरीय क्षेत्र पर की गई ! इसके लिए पीले पंजे का इस्तेमाल कर तोड़ फोड़ की गई ! हालांकि यह कार्रवाई सांकेतिक रूप से अमल में लाई गई !
अवैध कब्ज़ा तोडऩे के उपरांत प्राधिकरण कार्यालय की ओर से ये दावा किया गया है कि अब सभी पांचों प्लॉट प्राधिकरण के कब्जे में हैं, जो कि दो दो सौ गज साइज के हैं ! प्राधिकरण के आधिकारिक सूत्र अपनी कार्रवाई के बावजूद ये स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं कि कब्जे से मुक्त करवाए गए प्लॉटों पर कायम छोटे मंदिरों, यज्ञशाला और खेड़े बाबा का क्या बनेगा ? ये यहां पहले से मौजूद थे अथवा कब्जे उपरांत निर्मित किए गए ?
दूसरी ओर मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रामपाल गर्ग ने ये कबूल किया कि परिसरीय भूखंड, प्राधिकरण की संपदा है ! उन्होंने बताया कि इस पर कुछ समय पहले आपसी सहमति हो जाने के बावजूद प्राधिकरण ने एकतरफा कार्रवाई करके स्थापित सहमति का उल्लंघन किया है ! इस सहमति के तहत मंदिर प्रबंधन ने दो प्लॉटों को छोड़, बाकि प्लॉटों का कब्जा लौटाने की हामी भरी थी ! इसके साथ ही मंदिर प्रबंधन दो प्लॉटों की कीमत भी एज पर पॉलिसी अदा करने को तैयार था !
रामपाल गर्ग के मुताबिक़ प्राधिकरण के प्लॉटों के ऊपर से हाई वोल्टेज बिजली सप्लाई की तारें गुजरती थी और ये प्लॉट अरसे से इसी कारण खाली पड़े थे ! जिन्हें मंदिर प्रबंधन अपनी सामान्य सुविधा एवं गतिविधियों के लिए इस्तेमाल में ला रहा था, लेकिन मंदिर प्रबंधन की यहां अवैध कब्जे जैसी कोई बदनीयत कभी नहीं रही ! प्रबंधन शुरू से ही इस मसले के सौहार्दपूर्ण समाधान के पक्ष में रहा है ! इस प्रकरण को लेकर एक बड़ा सवाल ये उभरता है कि जब प्राधिकरण की बेशकीमती संपदा पर बरसों से अनाधिकृत धार्मिक निर्माण अथवा गतिविधियां चल रही थी, तब प्रशासनिक प्रबंधन ने उन्हें क्यों नहीं रोका ? साथ ही एक और बड़ा सवाल ये भी है कि उक्त मंदिर के अलावा करनाल के जिन जिन अन्य सेक्टरों में इस प्रकार के समकक्षीय अवैध कब्जे, निर्माण और गतिविधियां पक्के तौर पर पहले से विवादास्पद रूप में उजागर हैं, वहां कोई ठोस कार्रवाई होगी ?