फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) पति संदीप जोशी के प्रदेश भाजपा महामंत्री रहने की कीमत पर भाजपा के टिकट पर मेयर बनीं प्रवीण बत्रा जोशी ने कुर्सी संभालने के बाद ही नगर निगम के कमाई वाले विभागों से सीधे जानकारी मांगी है। हालांकि निगम के घाघ और निकम्मे अधिकारी उन्हें पिछली कठपुतली मेयर सुमनबाला की तरह ही टरकाने में लगे हैं। अब देखना यह है कि पहली बार सीधे जनता के मत से मेयर बनीं प्रवीण बत्रा इन अधिकारियों को किस तरह साधेंगी और पार्षदों का क्या रोल रहेगा।
भाजपा के जानकार बताते हैं कि संदीप जोशी पार्टी में शरीफ कार्यकर्ता माने जाते थे, उनकी पत्नी प्रवीण बत्रा पार्टी में बहुत सक्रिय नहीं थीं लेकिन यही कारण है कि टिकट मिलने से पहले तक उन्हें चंद लोग ही जानते थे। 24 मार्च को शपथ ग्रहण करने और चंद दिनों की ट्रेनिंग के बाद मेयर पद संभालते ही प्रवीण बत्रा ने सबसे पहले सभी जोन में अवैध निर्माण, कब्जे और अतिक्रमण की जानकारी मांगी। पाठकों को बताते चलें कि नगर निगम की ऊपरी कमाई में अवैध निर्माण से होने वाली वसूली सबसे ऊपर बताई जाती है। उन्होंने इसके साथ ही सभी जोन में नगर निगम द्वारा स्ट्रीट लाइट, पार्कों की लाइट आदि इलेक्ट्रिक उपकरण लगाए जाने के लिए हाल ही में जारी किए गए वर्क ऑर्डर की प्रतियां भी तलब कीं। नगर निगम के अधिकारियों की अकूत कमाई वाली विज्ञापन शाखा का भी पूरा हिसाब किताब मांग लिया। इसके साथ ही नगर निगम द्वारा कराए जाने वाले हर निर्माण कार्य विकास कार्य, नाला सफाई के टेंडर आदि की जानकारी भी तलब कर ली।
समझा जा सकता है कि निगम के सारे विभाग वही हैं जिनमें पिछले दस सालों में कई सौ करोड़ रुपये के घोटाले हो चुके हैं यानी मोटी कमाई का जुगाड़। पद संभालते ही इन सब विभागों का गहन ब्यौरा तलब किया जाना इस बात का इशारा है कि प्रवीण बत्रा को भी निगम की मोटी लूट कमाई की अच्छी जानकारी हो गई है। अब वह इसे खत्म करती हैं या इन्हीं अधिकारियों के साथ हो जाती हैं यह भविष्य बताएगा।
फिलहाल, निगम के भ्रष्ट अधिकारी मेयर के आदेश को ठेंगे पर रखने वाले अंदाज में कोई जवाब नहीं दे रहे। निगम सूत्रों के अनुसार मेयर प्रवीण बत्रा ने यह सारी जानकारी 16 अप्रैल को मांगी थी। सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर ओमबीर ने सभी संबंधित एक्सईएन को पत्र लिख कर यह सारी जानकारी दो दिन में सीधे मेयर को उपलब्ध कराने का आदेश दिया था। दो दिन तो क्या बीस दिन बीत गए लेकिन किसी ने भी कोई जानकारी नहीं दी। मेयर बेचारी एसई से जानकारी मांगती रहीं और एसई सभी एक्सईएन को 17 अप्रैल, फिर 24 अप्रैल और पांच मई तक रिमाइंडर भेजता रहा। समाचार लिखे जाने तक तो किसी भी एक्सईएन ने कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई थी। निगम के जानकार कहते हैं कि एक्सईएनों का रोना है कि पहले ही मैडम से लेकर एसीएमसी, एसई, चीफ तक हिस्सापत्ती पहुंचानी पड़ती है। पार्षद अलग परेशान करते हैं और अब मेयर को भी नजराना पहुंचाना पड़ेगा। सारी ‘कमाई इन्हीं लोगों पर लुटा देंगे तो उनके लिए क्या बचेगा। यह भी चर्चा होती है कि जिस तरह पूर्व की कठपुतली मेयर सुमनबाला को चुग्गा-पानी देकर बेवकूफ बनाया जाता था वैसा इस मेयर के साथ करना आसान नहीं होगा क्योंकि उन्हें भी कोई खांटी भ्रष्टाचारी ट्रेनिंग दे रहा है, यही कारण है कि पहली बैठक के बाद ही उन्होंने वो जानकारी मांगनी शुरू कर दी हैं जिनके बारे में जानने समझने में ही साल- छह महीने गुजर जाते हैं। अब देखना है कि मेयर निगम के भ्रष्ट अधिकारियों की नकेल कस कर वांछित परिणाम हासिल कर पाती हैं या अधिकारी मनमर्जी चलाते हुए उन्हें पूर्व मेयर की तरह खुश कर अपना काम चलाते रहेंगे।
रिवाजपुर डंपिंग यार्ड का मुद्दा गरमाएंगी मेयर मेयर ने कमाई वाले विभागों से जानकारी मांगने के साथ ही रिवाजपुर में ठोस कचरा प्रबंधन की स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की है। सुधी पाठक भूले नहीं होंगे कि नगर निगम ने अप्रैल 2023 में शहर के रिवाजपुर, पाली, मुजेड़ी, बीपीटीपी और प्रतापगढ़ में डंपिंग यार्ड बनाने की घोषणा की थी। रिवाजपुर और आसपास के गांव वालों ने रिवाजपुर सोशल वेलफेयर समिति का गठन कर इसका पुरजोर विरोध किया था। केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर ने इसे अपने मान सम्मान का प्रश्न बनाते हुए रिवाजपुर में ही डंपिंग यार्ड बनाने की जिद पकड़ ली थी।
लंबे संघर्ष के बाद गूजर को मुंह की खानी पड़ी थी और तिगांव विधायक राजेश नागर की सिफारिश पर सीएम ने रिवाजपुर में डपिंग यार्ड नहीं बनाए जाने का फैसला लिया था। तब से रिवाजपुर में कूड़ा नहीं डाला जा रहा था लेकिन अब भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार बन चुकी है इसलिए मेयर प्रवीण बत्रा जोशी ने रिवाजपुर डपिंग यार्ड का मुद्दा एक बार फिर गरमा दिया है। उन्होंने 15 अप्रैल को एसई से रिवाजपुर में ठोस कचरा प्रबंधन की विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी, जो समाचार लिखे जाने तक उन्हें उपलब्ध नही कराई गई है। मेयर रिवाजपुर डंपिंग यार्ड का काम दोबारा शुरू कराने का हुक्म सुना सकती हैं।
माना जा रहा है इसके पीछे केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर का शातिर दिमाग काम कर रहा है। वह रिवाजपुर वालों से अपनी बेइज्जती और हार का बदला लेकर खुद को श्रेष्ठ साबित करना चाहते हैं।