करनाल। हैफेड में 34 लाख रुपये के गबन की जांच का मामला फाइलों में ही दब कर रह गया है। 7 मई को सिविल लाइन थाना में दर्ज की गई एफआईआर में अब तक कोई भी पहलू नया सामने नहीं आया है। नामजद आरोपियों के बयान तक दर्ज नहीं किए हैं, हैफेड स्टाफ पर जताई गई आशंका पर भी कोई पूछताछ नहीं की गई है।
इससे हैफेड के अधिकारी भी केस दर्ज करवाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं और पुलिस अब तक किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंची है। इससे आरोपियों को बचाव करने का पूरा मौका मिल रहा है। हेड ऑफिस में भी स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही बरतने की रिपोर्ट जा चुकी है। हैफेड के मीनार रोड स्थित सेल पॉइंट पर 30 अप्रैल को फिजिकल वेरिफिकेशन की गई थी। जिसमें गबन होने का संदेह जताया गया। हैफेड के अधिकारियों ने मामले में 34 लाख रुपये के गबन का केस दर्ज करवा दिया। अब हैफेड के अधिकारियों ने सेल पॉइंट पर अन्य स्टाफ सदस्यों की ड्यूटियां लगा दी हैं। पहले अस्थाई कर्मचारी के भरोसे करोड़ों का सामान बेचा जा रहा था, अब विभाग के इंस्पेक्टर के नेतृत्व में हैफेड के प्रोडक्ट बेचे जा रहे हैं। अस्थाई कर्मचारी वीरेंद्र सिंह का आरोप था कि हैफेड के अधिकारी पैसे दिए बगैर ही सामान मंगवाते थे। जब अधिकारियों ने खुद को फंसता देखा तो स्वयं के बचाव के चलते जबरदस्ती रिकॉर्ड ले लिया और उन पर ही केस दर्ज करवा दिया गया।
हैफेड के 5 गोदामों में 7 लाख 98 हजार 979 बैगों में गेहूं की चेकिंग अप्रैल में की गई। जिसमें गेहूं खराब मिला। हैफेड की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि करनाल जिले के गोदामों में 10 से 12 प्रतिशत गेहूं कम है। गेहूं खराब करने में 5 से माह का समय लगा है। हैफेड के मुख्य अधिकारी और निगरानी एजेंसी को जिम्मेदार हैं। गेहूं में सुरसुरी चलती मिली है। गेहूं का आटा बना हुआ था। जांच रिपोर्ट पंचकूला हेड ऑफिस जाने के बाद भी अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारी एक दूसरे पर लापरवाही का आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। एसएचओ थाना सिविल लाइन श्रीभगवान ने बताया कि हैफेड में 34 लाख रुपये गबन करने के मामले में दर्ज किए गए केस की जांच जारी है। फिलहाल इस केस में किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। जांच के आधार पर कार्रवाई करेंगे।