फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार का ‘सुशासन उसके चुने हुए प्रतिनिधियों के भ्रष्टाचार के रूप में आए दिन सामने आ रहा है। पहले गायत्री देवी, फिर रवि भगत और अब वार्ड पंद्रह के भाजपा पार्षद सरदार जसवंत सिंह। मानो, भाजपा ने इन सबको वार्ड का विकास करने के लिए पार्षद का टिकट नहीं दिया था बल्कि चुनने वाली जनता की गाढ़ी कमाई लूटने के लिए नगर निगम भेजा है।
सुधी पाठकों को मालूम ही है कि बडख़ल विधायक धनेश अदलखा ने अपने इलाके एनआईटी एक, दो, तीन और पांच में अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान का नाटक किया हुआ था। इस तेजी के पीछे का कारण अवैध निर्माणकर्ताओं को अपना रसूख दिखाना और उनसे वसूली करना बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि घोटालेबाज, भ्रष्टाचारी, भगोड़े विधायक के तेवर और मिलने वाले नजराने देख कर वार्ड नंबर पंद्रह के पार्षद सरदार जसवंत सिंह को भी जोश आ गया। उन्होंने भी अपने इलाके में अवैध निर्माण की तलाश शुरू कर दी।
उन्हें कामयाबी भी जल्दी मिल गई एनआईटी पांच फ्रूट गार्डन इलाके में उनका एक सजातीय मकान निर्माण करवा रहा था। बस फिर क्या था करीब दो सप्ताह पहले पार्षद महोदय ने उसको फोन कर दिया और ‘मिलने’ के लिए बुलाया। भाजपा का वोटर होने के कारण उसने पार्षद महोदय की बात पर ध्यान नहीं दिया। पार्षद ने दूसरे दिन फोन किया और कहा कि तू मकान बना रहा है मुझसे आकर मिल वरना तेरा मकान बन नहीं पाएगा। केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर को नमस्कारी ठोंकने के कारण उस व्यक्ति ने सरदार जी की बात को हवा में उड़ा दिया। इससे नाराज होकर सरदार जी ने दूसरे दिन जेसीबी भिजवा कर मकान तोड़े जाने की धमकी दिलवा दी। मकान टूटता देख व्यक्ति ने पार्षद के एक दलाल से संपर्क किया और मीटिंग फिक्स की गई।
अगले दिन दलाल व्यक्ति को लेकर पार्षद महोदय के यहां पहुंचा। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार जसवंत सिंह उन दोनों को अपने दफ्तर में ले गए, वहां दबाव बनाने के लिए व्यक्ति को हड़काया कि तूने मेरे फोन को हल्के में लिया अब तुझे पांच दिन सुबह शाम यहां हाजिरी देनी होगी इसके बाद कोई बात होगी। घबराए हुए व्यक्ति ने तीन दिन तक सरदार जसवंत सिंह के दरफ़्तर के चक्कर लगाए और दलाल से माफ करवाने की गुजारिश की। लोहा गर्म देख दलाल ने पांच लाख रुपये की मांग कर दी, कहा लाखों रुपये का बेशकीमती मकान बचाना है तो पार्षद जी को नजराना तो देना ही पड़ेगा। काफी मांडवाली होने के बाद सौदा डेढ़ लाख रुपये मेें तय हुआ।
अवैध निर्माणकर्ता ने डेढ़ लाख रुपये तो दे दिए लेकिन उसे यह बता कचोटती रही कि उसकी ही बिरादरी के पार्षद ने नहीं छोड़ा, यह भी कि वह केंद्रीय मंत्री की चरणवंदना में कोई कसर नहीं छोड़ता, जब उसके जैसे अंधभक्त को ही भाजपाई लूट रहे हैं तो आम आदमी के साथ क्या करते होंगे। किसी की सलाह पर वह केंद्रीय मंत्री गूजर के यहां शिकायत करने पहुंचा। पहले तो उसने बताया कि कि उसने किस किस चुनाव में भाजपा के लिए कितना काम किया है, खुद वोट दिया और लोगों को वरगला कर उनसे भी भाजपा को वोट दिलाया। यहां तक कि सरदार जसवंत सिंह को भी वोट दिया, लेकिन उन्होंने ही उससे डेढ़ लाख रुपये हड़प लिए।
करोड़ों की कमीशनखोरी और बेशकीमती जमीनें हड़पने के आदी मंत्री गूजर को सरदार जसवंत सिंह द्वारा डेढ़ लाख रुपये लेना टुच्चापन लगा। उन्होंने पार्षद को बुलाकर अपना स्तर सुधारने की सख्त हिदायत देते हुए अंधभक्त भाजपाई मकान मालिक के डेढ़ लाख रुपये लौटाने का फरमान सुना दिया। मजबूर होकर सरदार जसवंत सिंह ने हाथ आई रकम मन मसोस कर मालिक को लौटा दी। बताया जा रहा है कि अपनी बेइज्जती से नाराज सरदार जसवंत सिंह उसे सबक सिखाने के दूसरे रास्ते तलाश रहे हैं जिसमें उनका नाम न आए और काम भी हो जाए।
नगर निगम में चर्चा है कि सरदार जसवंत सिंह का यह नया कारनामा नहीं है, पिछले कार्यकाल में भी उन्होंने अवैध कार्य करने वालों से जमकर उगाही की थी। यहां तक कि उन्होंने विधायक सीमा त्रिखा के करीबियों को भी नहीं छोड़ा था। यही कारण है कि सीमा त्रिखा उन्हें बुरी तरह नापसंद करती थीं। नगर निगम चुनाव में सीमा ने सरदार जसवंत सिंह का टिकट कटवाने के लिए पूरा जोर लगा दिया था लेकिन अवसरवादी जसवंत सिंह भ्रष्टाचारी विधायक अदलखा का सूरज चढ़ता देख उसकी गोद में जा बैठा। अदलखा ने भी देखा कि सरदार जी दुश्मन के दुश्मन हैं और उनमें भी उसकी तरह भ्रष्टाचार, वसूली, उगाही करने वाले गुण हैं तो तुरंत ही टिकट दिलवा दिया। पार्षद बनकर सरदार जसवंत सिंह भी संघ-भाजपा की लूट कमाई की परंपरा का ही निर्वहन कर रहे हैं।
जसवंत सिंह द्वारा उगाही किए जाने का खुलासा होने से आश्चर्य नहीं होना चाहिए। जिस भाजपा में भ्रष्टाचार ही शिष्टाचार बन चुका हो, ऊपर वाले ही उगाही करते चले आ रहे हों तो फिर जसवंत सिंह, गायत्री देवी, रवि भगत आदि जैसे प्यादों से ईमानदारी की अपेक्षा बेमानी होगी। केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर से सड़क मंत्रालय इसलिए ही तो छिना था कि उन्होंने गडकरी के करीबी ठेकेदार से शहर से गुजर रहे हाईवे के लिए दस टका कमीशन यानी साठ करोड़ मांग लिया था। धनेश अदलखा जैसे निकृष्ट और भ्रष्टाचारी को खट्टर-गूजर ने टिकट ही इसलिए दिलवाया था कि उसने नगर निगम में दो सौ करोड़ के घोटाले को सफलतापूर्वक अंजाम दिलाया था, हरियाणा फार्मेसी काउंसिल चेयरमैन रहते हुए पंजीकरण, नवीनीकरण के नाम पर अभ्यर्थियों से मोटी वसूली की थी।
यहीं पांच करोड़ का घपला करने के बाद आका खट्टर की बदौलत गिरफ्तारी से बच गया था। सीमा त्रिखा तो भूमाफिया- अवैध निर्माणकर्ताओं, जमीनों पर कब्जा करने वाले माफिया की प्रिय थीं। तिगांव विधायक राजेश नागर तो अपने पिता रूप सिंह के साथ बड़े इलाके में अवैध कालोनियां काट कर डीलर केंद्रीय मंत्री गूूजर के लिए चुनौती साबित हो रहे हैं, यानी ऊपर से लेकर नीचे तक लूट कमाई चल रही है, अब जनता को समझना होगा कि वह किन लोगों को चुन कर अपने सिर पर बैठा रही है।