पलवल (मज़दूर मोर्चा) भाजपा के जुमलेबाज मुख्यमंत्री खट्टर-सैनी झूठी घोषणाएं कर जनता को छलते आ रहे हैं। पूर्व घोषणावीर सीएम खट्टर ने वर्षों पहले पेलक गांव में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की थी लेकिन अभी तक इसमें एक ईंट भी नहीं रखी गई है और संभावना भी नहीं दिख रही है। अब नये जुमलेबाज सीएम के कार्यकाल में बडोली ब्लॉक में आयुष्मान अस्पताल बनाने का बाजा बजाया जा रहा है। जनता भी समझ चुकी है कि भाजपाई सरकारें केवल चुनावों के समय मतदाताओं को वरगला कर वोट लूटने के कुत्सित इरादे से इस तरह की घोषणाएं करती हैं जो चुनाव समाप्त होने के बाद कभी परवान नहीं चढ़तीं।
भाजपा की डबल इंजन सरकारें बीते दस साल से हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोलने का ढिंढोरा पीटती आ रही हैं। दस साल में एक भी मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं हो पाया। फरीदाबाद-पलवल की सीमा पर स्थित छांयसा स्थित अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज तो चलता हुआ था लेकिन कर्महीन खट्टर उसे भी सुचारु नहीं चला सके, आज भी केंद्र और राज्य सरकारें नेशनल मेडिकल कमीशन से बार बार झूठे वादे कर किसी तरह रो-पीट कर उसे चलवा रही हैं। इस मेडिकल कॉलेज की दुर्दशा तो सुधारी नहीं गई, पूर्व सीएम खट्टर ने पेलक में एक और मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा कर दी। यह घोषणा जनता की सुविधा के लिए नहीं बल्कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले की गई थी। मेडिकल कॉलेज तो क्या बनना था लेकिन विधानसभा चुनाव में भी इस मुद्दे को भुनाया गया, जनता को बताया जाता रहा कि जमीन तलाश ली गई है चुनाव समाप्त होते ही काम शुरू हो जाएगा।
घोषणा के कई साल बाद सरकार ने पेलक गांव की 382 कनाल पंचायती जमीन मेडिकल कॉलेज की स्थापना के नाम पर कब्जा ली। संदर्भश सुधी पाठकों को याद दिलाते चलें कि बीते दस साल में खट्टर-सैनी सरकारों ने मेडिकल कॉलेज बनाने के नाम पर करीब आठ पंचायतों की जमीनों पर कब्जा किया हुआ है लेकिन शायद ही किसी पर ईंट लगाई गई हो। पेलक गांव की 382 कनाल जमीन को भी सरकारी कब्जे में लेने के लिए बाउंड्री से घेर दिया जाएगा, इसके बाद मेडिकल कॉलेज का इंतजार मोदी के अमृत काल की समाप्ति तक भी शायद न खत्म हो।
अब आयुष्मान अस्पताल का बाजा बजाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष चिकित्सा की घोषणा इस तरह की थी जैसे उनकी घोषणा के पहले भारत में आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी चिकित्सा मानो थी ही नहीं। मोदी की घोषणा के बाद अनेक राज्यों के जिला चिकित्सालयों में आयुष क्लीनिक खोल दिए गए लेकिन इनमें स्टाफ है या नहीं, दवाएं हैं या नहीं इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। मोदी सरकार आयुष चिकित्सा के प्रति कितनी गंभीर है इससे समझा जा सकता है कि उन्होंने जो आयुष मंत्रालय बनाया है उसकी दो सरकारी वेबसाइट https://ayush.gov.in/inde&hi.html#aboutus hi हैं जिन्हें खोलने पर नॉट फाउंड का मैसेज दिखता है। जिन सरकारों से आयुष्मान मंत्रालय की वेबसाइट नहीं चलाई जा रही वो अस्पताल क्या चलाएंगी। जानकारों का कहना है कि सरकार हर छोटी उपलब्धि का जमकर ढिंढोरा पीटती है, यदि मोदी के आयुष क्लीनिक जरा भी सफल होते तो चारों तरफ इसके गीत गूंज रहे होते। कोई उपलब्धि ही नहीं है इसीलिए वेबसाइट भी बंद पड़ी है।
समझने वाली बात यह है कि जो सरकार अपने बने बनाए सरकारी जिला अस्पतालों में स्टाफ, दवा, चिकित्सा उपकरण आदि सुविधाएं भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं करा पा रही है, कतई नहीं लगता कि वो आयुष अस्पताल चला पाएगी। हां, कभी मेडिकल कॉलेज तो कभी आयुष अस्पताल का शोर मचा कर जनता को वरगला कर अपना उल्लू सीधा करती रहेगी, जब तक जनता इस झांसे में आती रहेगी, संघी-भाजपाई सत्ता में बने रहेंगे।