फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) दिनांक 24 दिसम्बर को लघु सचिवालय में आयोजित निगरानी समिति की बैठक में बोलते हुए स्थानीय सांसद एवं केन्द्रीय सहकारिता मंत्री कृष्णपाल गूजर ने कहा कि एफएससीएल (फरीदाबाद स्मार्ट सिटी कम्पनी लिमिटेड) में तैनात अधिकारी निकम्मे व भ्रष्टाचारी हैं। उनके द्वारा किए गए कोई भी काम खरे नहीं उतर रहे। ये तमाम सेवानिवृत्त अधिकारी किसी काम के नहीं हैं।
उनके कारनामों को गिनाते हुए गूजर ने कहा कि पार्कों में लगे पत्थर, काम पूरा होने से पहले ही गिर गए। 20-20 लाख की लागत से बनाए गए 10 स्मार्ट टॉयलेट एक दिन भी इस्तेमाल हुए बगैर ही कंडम हो गए। उन्होंने इन टॉयलेटों का विवरण देते हुए बताया कि बडख़ल मेट्रो स्टेशन, सेक्टर 19 पुलिस चौकी, गोपी कॉलोनी, एनआईटी 5 थाने के सामने, सेक्टर 21डी मार्केट आदि के निकट ये टॉयलेट बनाए गए थे। दो करोड़ की लागत से बनाए इन टॉयलेटों का आज कोई अता-पता नहीं। उन्होंने इसे जनता के पैसे की लूटमारी बताते हुए सम्बन्धित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए इस लूटे गए धन की रिकवरी कराने की बात भी कही। इन अधिकारियों के निकम्मेपन का कारण मंत्री जी ने उनका रिटायर होकर कम्पनी में लगना बताया। अंत में उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि सारे का सारे खाने की बजाय आटे में नमक जितना ही खाना चाहिए।
मंत्री जी को यह नहीं भूलना चाहिए कि जिन रिटायर्ड अफसरों को वह आज निकम्मे-भ्रष्टाचारी बता रहे हैं उनकी तैनाती भी भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की जुमलेबाजी करने वाले खट्टर ने ही ठोंक बजा कर की थी। तैनाती के बाद से ही इन सबका निकम्मापन उजागर हो गया था। सवाल ये पैदा होता है कि सन 2018 में बनी इस कम्पनी के काले कारनामे मंत्री जी को सात साल बाद कैसे नजर आए? सर्वविदित है कि इस दौरान इन कम्पनी द्वारा करदाता के करीब छ: हजार करोड़ रुपए लगा दिए गए हैं। ‘मज़दूर मोर्चा’, कम्पनी के स्थापना दिवस से ही यह लिखता आ रहा है कि यह करदाता के साथ एक बहुत बड़ा धोखा होने जा रहा है। जिन इक्का-दुक्का कामों का विवरण आज मंत्री जी दे रहे हैं इससे अधिक विवरण तो ‘मज़दूर मोर्चा’ ने अपने अंकों में समय-समय पर प्रकाशित किया है।
मंत्री जी ने इन रिटायर, थके हुए, भ्रष्टाचार में निपुण अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा लूटे गए धन की रिकवरी के लिए मुख्य सचिव को पत्र लिखने की जो बात कही है, वह पूर्णतया निरर्थक है। ‘मज़दूर मोर्चा’ यह बात कई बार लिख चुका है कि इन रिटायर अधिकारियों के पास खोने को कुछ भी नहीं है और जो लूट लेंगे वह उनका अपना। यह भी किसी से छिपा नहीं है कि अधिकारी लूट कमाई नेताओं के बल-बूते पर ही करते हैं। लूट कमाई में से बड़ा हिस्सा राजनेताओं ने ही डकारा है। उस वक्त न तो मंत्री कृष्ण पाल कुछ बोले और न ही कोई अन्य विधायक आदि।
दरअसल शहर को स्मार्ट बनाने के लिए न तो किसी कम्पनी की जरूरत थी और न ही इसके द्वारा लूटे गए छ: हजार करोड़ रुपयों की। जरूरत है तो केवल हरामखोरी और रिश्वतखोरी समाप्त करने की। इससे न केवल एक शहर बल्कि पूरा देश ही स्मार्ट हो सकता है। मंत्री गूजर शहर को जाम मुक्त करने के उपाय की बात भी करते हैं। इसमें खोजने जैसी कोई बात है नहीं। शहर भर की तमाम सड़कों के दो तिहाई भाग पर कब्जे एवं पार्किंग रहने के कारण न तो फुटपाथ और न ही साइकिल ट्रैक बन पाए, इसी के चलते जाम की स्थिति बनी हुई है और बनी रहेगी।