फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम अधिकार क्षेत्र में चार साल पहले शामिल किए गांवों में विकास कार्यों के नाम पर लूट कमाई तो खुद को केंद्रीय मंत्री गूजर का बेटा बताने वाले नगर निगम के एक्सईएन ओमदत्त ने की और गाज गिरी चीफ इंजीनियर बीरेंद्र कुमार कर्दम पर। उनका दोष इतना है कि बैठकों मे मंत्री विपुल गोयल द्वारा उन्हें इन गांवों में विकास कायों के लिए बार बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद वह ‘मंत्री पुत्र’ एक्सईएन ओमदत्त से काम नहीं करा सके। काम तो खैर निगमायुक्त आईएएस मोना ए श्रीनिवास भी ओमदत्त से नहीं करा सकीं तो चीफ इंजीनियर की औ$कात ही क्या थी। वैसे भी ओमदत्त खुद खाने और ऊपर तक खिलाने की कला में सिद्धहस्त है इसलिए वह कार्रवाई शब्द से घबराता भी नहीं है।
बीरेंद्र कर्दम नवंबर 2020 से नगर निगम में चीफ इंजीनियर के पद पर तैनात हुए और जनवरी 2021 में 24 गांव नगर निगम में शामिल कर लिए गए। कंगाली से जूझ रहे नगर निगम को शामिल किए गए इन गांवों की पंचायतों का अच्छा खासा धन हाथ लगा, उसका कुछ भाग विकास के नाम पर जारी किया गया। निगम के अधिकतर एक्सईएन ने इन गांवों में विकास कार्य कराने से हाथ खींच लिए थे, क्योंकि उन्हें इस बात का पूरा अंदेशा था कि इन गांवों में विकास के नाम पर धन की बंदरबांट होगी और उनकी गर्दन फंसेगी। ऐसे में नगर निगम के भ्रष्टतम अधिकारियों में गिना जाने वाला मंत्री गूजर का ‘बेटा’ फर्जी डिग्रीधारक ओमदत्त ने उन गांवों का जि मा लिया था। तब से इक्का दुक्का बार उससे इन गांवों का चार्ज छीना भी गया लेकिन मंत्री के दबाव में फिर उसे ही लौटा दिया गया। मज़दूर मोर्चा उसके कारनामों और 24 गांवों में उसके द्वारा विकास कार्यों के नाम पर की जा रही खुली लूट कमाई की खबरें समय-समय पर प्रकाशित करता रहा है।
खट्टर सैनी की पिछली सरकार में शहरी मंत्री सुभाष सुधा ने भी ओमदत्त को निलंबित किया था लेकिन पिता समान मंत्री गूजर के वरदान और अधिकारियों को चढ़ावा चढ़ा कर चंद दिन में ही बहाली पा गया था। इसी ओमदत्त के पास इन 24 गांवों का प्रभार है। उसने इन गांवों में सड़क, नाली, सफाई आदि के नाम पर खूब लूट कमाई की लेकिन काम कहीं नहीं हुआ। इसकी शिकायतें बीते दो तीन साल से हो रही हैं। एक्सईएन बीरेंद्र कर्दम इन शिकायतों के निस्तारण के लिए मंत्री पुत्र ओमदत्त पर दबाव नहीं बना सके। सूत्रों के अनुसार निगम की बैठकों में बीरेंद्र कर्दम ने निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास को भी हालात से कई बार अवगत कराया लेकिन वह भी कोई कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाईं। एक्सईएन ओमदत्त के भ्रष्टाचार का खेल लगातार चलता रहा।
वैसे भी यदि 24 गांवों में विकास के नाम पर जो भ्रष्टाचार हुए हैं और हो रहे हैं वह केवल चीफ इंजीनियर ने तो किए नहीं हैं, वह तो केवल सुपरवाइजरी अथॉरिटी हैं, जिम्मेदार तो एक्सईएन, एसडीओ, जेई भी हैं, इनके खिलाफ भी तो कोई कार्रवाई होनी चाहिए। हां, सुपरवाइजरी अथॉरिटी होने के नाते उसे जो करना चाहिए था यानी भ्रष्टाचारी और निकम्मे मातहतों के खिलाफ कलम चलानी चाहिए थी, वह भी नहीं चलाई, इसका अंजाम तो उसे ही भुगतना पड़ेगा।
संयुक्त आयुक्त द्विजा गठवाल भी चर्चा में चीफ इंजीनियर बीरेंद्र कर्दम को चार्जशीट किए जाने के बाद से नगर निगम के कर्मचारियों में ओल्ड फरीदाबाद जोन की संयुक्त आयुक्त द्विजा गठवाल को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कर्मचारियों में खुसपुस हो रही है कि मैडम तो केवल कमीशन ले रही हैं काम हुआ है या नहीं? यह भी नहीं पूछतीं-देखतीं। निगम के भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार 24 गांवों के विकास कार्यों में कमीशनखोरी का पूरा काम आज भी ओमदत्त के कार्यालय से ही हो रहा है। उसके कार्यालय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर मुकेश शर्मा ही ठेकेदारों से कमीशन की रकम लेकर ऊपर तक पहुंचाता है। बताया जा रहा है कि उसने ज्वाइंट कमिश्नर द्विजा गठवाल के नाम पर वसूली जाने वाली कमीशन राशि दोगुनी कर दी है। एक ठेकेदार ने पहचान उजागर नहीं किए जाने की शर्त पर बताया कि पहले मैडम का कमीशन आधा परसेंट बनता था, अब ऑपरेटर मुकेश शर्मा कहता है कि मैडम एक परसेंट मांग रही हैं।
कमीशन राशि नहीं देने पर बिल रोक दिया जाता है। निगम के भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि मैडम का आधा प्रतिशत तो बंधा ही है लेकिन कभी कभार वह एक परसेंट पर अड़ जातीं हैं, इसी को बहाना बना कर मुकेश सभी से एक परसेंट वसूल रहा है। निगम में हो रही इन चर्चाओं में कितनी सच्चाई है यह तो जांच का विषय है लेकिन सरकार द्वारा चीफ इंजीनियर को चार्जशीट किया जाना बताता है कि बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हो रही है। यदि सरकार भ्रष्टाचार के प्रति सच में गंभीर है तो उसे गहन जांच करानी चाहिए।