करनाल। हरियाणा का एक मात्र विधानसभा उप चुनाव करनाल में होने जा रहा है। यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा मुख्यमंत्री पद एवं विधायिकी से आकस्मिक इस्तीफा देने के कारण खाली हुई थी। अब इस सीट पर उनके सियासी उतराधिकारी एवं शिष्य नायब सिंह सैनी उप चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार हैं। प्रबल संभावनाएं व्यक्त की जा रही थीं कि भाजपा को अचानक अलविदा कहने वाले मनोज वधवा करनाल सीट से मुख्यमंत्री के खिलाफ निर्दलीय अथवा कांग्रेस पार्टी की और से उम्मीदवार होंगे,लेकिन कल इन संभावनाओं ने मुक्कमल तौर पर दम तोड दिया।
खनन घोटाले में नामजद होने के कारण ईडी के मकडज़ाल में उलझे मनोज वधवा मंगलवार को चुनावी नामांकन पत्र दाखिल करने के ऐन आखिरी मौके तक सामने नहीं आए। इस तरह से वह करनाल विधानभा उप चुनाव की स्पर्धा से एकदम बाहर चले गए।
विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का मंगलवार को आखिरी दिन था और बुधवार को नामांकन पत्रों की पड़ताल भी हो गई। मंगलवार को ही मनोज वधवा की ईडी के समक्ष पेशी भी थी। इस पेशी से पहले उन्होंने कोई बड़ा सियासी फैसला लेने के लिए अपने खास लोगों को बैठक का न्यौता जारी किया था, जिसे बाद में उन्होंने ही रद्द कर दिया था। उप चुनाव के मैदान में उतरने की तमाम कवायदों और उम्मीदों के बावजूद मनोज वधवा पीछे क्यों हटे इसकी वजह तो वह खुद ही बयां कर सकते हैं,लेकिन अब इस स्थिति में उनके पास केवल 4 विकल्प ही शेष हैं।
पहला विकल्प, कि वह मौजूदा चुनाव के दौरान ही कांग्रेस या किसी अन्य दल को ज्वाईन करें। दूसरा विकल्प, आगामी विधानसभा आम चुनाव एवं मेयर चुनाव तक स्वयं को निर्दलीय स्थिति में बरकरार रखना हो सकता है। इनके अलावा उनके लिण् तीसरा विकल्प, अपने घरेलू एवं कारोबारी जीवन तक सीमित रहते हुए ईडी के मकडज़ाल से जूझते हुए सामान्य स्थिति में लौटना है !
चौथे विकल्प के रूप में वह अपनी निर्दलीय स्थिति बरकरार रखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के खिलाफ जीत के लिए संघर्षरत किसी विपक्षी प्रत्याशियों के पक्ष में अपने निजी समर्थन की घोषणा कर सकते हैं क्योंकि करनाल के मतदाताओं पर उनकी खासी पकड़ एवं प्रभाव है,जिसका एहसास उन्होंने विगत में अपनी पत्नी आशा मनोज वधवा को मेयर पद का उम्मीदवार बना कर भाजपा को करवा दिया था। तब उनकी पत्नी 50 हजार से भी अधिक मत प्राप्त करने में सफल रही थीं।