राधा कृष्ण गौ सेवा धाम ट्रस्ट विवाद फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) खेड़ी गूजरान स्थित ग्राम समाज की बेशकीमती जमीन पर चल रहे राधा कृष्ण गौ सेवा धाम ट्रस्ट पर कब्जे के लिए प्रत्यक्ष रूप से तो मंजू यादव और अल्का भाटिया आमने सामने हैं। सत्ता के दम पर मलाई चाटने को आतुर ये दोनों महिलाएं तो सिर्फ राजनेताओं के मोहरे हैं। सच्चाई यह है कि सीमा त्रिखा से गद्दी छीनने वाला अदलखा उसकी सारे कमाई के स्रोतों को भी छीनने में अपनी भ्रष्ट सत्ता का इस्तेमाल कर रहा है, इसी महत्वाकांक्षा के तहत गौशाला हड़पने के लिए मंजू यादव को शिकार बनाया गया है।
जानकारों के अनुसार खेड़ी गूजरान में गांव समाज की पुरानी गोशाला थी लेकिन बजट न होने के कारण यह काफी जर्जर हालत में थी। इस पर सीमा त्रिखा और उनकी खास चहेती रेणू राजन भाटिया की नजर पड़ गई। करीब ढाई साल पहले इस पर कब्जेदारी का खेल शुरू हुआ। सीमा-रेणू राजन की चेली मंजू यादव को इस गौशाला में बैठाया गया। गौशाला पर कब्जा देख गांव वालों ने विरोध किया लेकिन संघी पति राजन भाटिया और अवैध कब्जा माफिया की प्रिय सीमा त्रिखा की सत्ता के दम पर मंजू यादव को कब्जा करवा दिया गया।
राधा कृष्ण गौ सेवा धाम ट्रस्ट भी बनवा दिया गया। ग्राम समाज की करोड़ों की जमीन पर मुफ़्त में कब्जा तो हुआ ही सरकार और दानदाताओं से मिलने वाली मोटी रकम की बंदरबांट भी हुई। यहां तक कि मंजू यादव पर गौशाला का गोवंश कसाइयों को बेचने का भी आरोप लगा। क्योंकि सत्ता का साथ था इसलिए न कोई जांच हुई और न ऑडिट। सबकी लूट कमाई चल रही थी। तत्कालीन कांग्रसी विधायक नीरज शर्मा अपनी विधानसभा क्षेत्र मेें गौशाला के नाम पर हो रही लूट-कमाई को देखते रहे। भले ही वह विपक्ष में थे लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठा कर जनता के सामने सच्चाई तो रख सकते थे, लेकिन विधायकी का सुख लूटने में मगन होने के कारण मुंह में दही जमाए बैठे रहे।
विधानसभा चुनाव में अदलखा खट्टर-गूजर की हथेलियां गर्म कर सीमा का पत्ता कटवा कर खुद टिकट ले आया। चुनाव जीतने के बाद अदलखा अब सीमा त्रिखा के बनाए गए साम्राज्य को प्यादों के जरिए हथियाने में लगा है। मंजू यादव को पहला झटका तो सीमा त्रिखा का टिकट कटने से लगा था, दूसरा झटका सीमा त्रिखा की खास चेली रेणू राजन भाटिया का कन्नी काटना था। संघी पति राजन भाटिया से अवसरवाद के गुर सीखने वाली रेणू भाटिया को समझ में आ गया था कि सत्ता खट्टर-गूजर के भ्रष्टाचारी चेले अदलखा के हाथ चली गई है, ऐसे में उसका विरोध करना, भाटिया दम्पत्ति को नुकसान पहुंचा सकता है। विजिलेंस जांच की धमकी देने वाला अदलखा उन्हें भी किसी सच्चे-झूठे केस में परेशान कर सकता है। रेणू के कन्नी काटते ही मंजू यादव अकेली पड़ गई।
इसके बाद अदलखा गिरोह ने मंजू यादव को फंसाने का जाल फेका। एक करोड़ का दान और नब्बे लाख हड़पने की लालच में आईं मंजू ने अल्का भाटिया, आदि को ट्रस्ट में सदस्य और पद देकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली। अब अल्का यादव बेशकीमती जमीन और ट्रस्ट का पद हथियाने के लिए छटपटा रही हैं। जानकार बता रहे हैं कि मंजू यादव अदलखा गिरोह से बचने के लिए एनआईटी विधायक सतीश फागना की शरण ले सकती हैं। बताया जा रहा है कि सतीश फागना सीधे तो नहीं लेकिन भाई कविंद्र चौधरी के जरिए मामले में हस्तक्षेप कर रहे हैं। इसमें उनका पलड़ा भारी भी नजर आ रहा है, क्योंकि खेड़ी गूजरान गांव उनकी विधानसभा में आता है ऐसे में गांव की पंचायत भी उनके साथ होगी। फिलहाल उठा पटक चल रही है देखना यह है कि करोड़ों की संपत्ति और मोटी कमाई वाली गौशाला पर कौन भाजपाई अपने चेलों के जरिए कब्जा करेगा।
लूट कमाई जाते देख सारे चट्टे-बट्टे एक हुए राधा कृष्ण गौ सेवा धाम ट्रस्ट की कमाई और प्रबंधन प्रशासन के हाथ में जाने लगे तो एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे मंजू यादव, अल्का भाटिया और अमित आहूजा एक होने लगे। अल्का भाटिया ने मंजू यादव पर गौशाला के खजाने में हेराफेरी करने का आरोप लगाया था। पलटवार करते हुए मंजू ने धनेश अदलखा की गोद में बैठे अमित आहूजा का वीडियो वायरल कर अल्का गिरोह को झटका दिया था। एनआईटी विधायक सतीश फागना के भाई कविंद्र चौधरी ने मामले में टांग अड़ा दी और बुधवार को एसडीएम बल्लभगढ़ कार्यालय में दोनों पक्ष बुलाए गए। हुआ वही जो कविंद्र चौधरी ने इशारा किया था यानी गौशाला का प्रबंधन प्रशासन ने अपने हाथ में ले लिया। लूट कमाई हाथ से निकलते देख सारे भ्रष्टाचारी एक हो गए। जिस मंजू यादव ने अमित आहूजा का वीडियो वायरल किया था और अल्का भाटिया को ट्रस्ट का सदस्य नहीं होना बताया था अब वही मंजू यादव दोनों की तारीफ के वीडियो वायरल कर रही है। मंजू यादव का यू टर्न लेना बताता है कि दाल काली है यह मानना गलत नहीं होगा कि उन्होंने हेराफेरी की होगी। अमित आहूजा का एक करोड़ देकर नब्बे लाख हजम करने का प्रस्ताव, मंजू यादव का साठ-चालीस के अनुपात में बंटवारे का प्रस्ताव गौशाला में चल रहे घोटाले की ओर इशारा कर रहा है। सीमा त्रिखा और रेणू राजन भाटिया के हाथ खींचने के बाद अकेली पड़ी मंजू यादव ने विरोधियों के खेमे से हाथ मिलाना ही साख और कमाई बचाने के लिए बेहतर समझा। हालांकि देखने में तो दोनों के बीच समझौता हो गया है लेकिन अदलखा गुट आज नहीं तो कल उसे खुड्डे लाइन लगाकर मोटी कमाई वाली गौशाला पर कब्जा करने का खेल करेगा।
सफेदपोश बना भ्रष्टाचारी अदलखा फार्मेसी काउंसिल का चेयरमैन रहते हुए पंजीकरण और नवीनीकरण करवाने वाले अभ्यर्थियों से खुलेआम रिश्वत मांगने और काउंसिल का पांच करोड़ रुपया हड़पने का आरोपी धनेश अदलखा विधायक बनने के बाद खुद को सफेदपोश बनने का पाखंड कर रहा है। बताया जा रहा है कि मंजू यादव को एक करोड़ का ऑफर और उसमें से नब्बे लाख वापस लेने का समाचार मज़दूर मोर्चा में प्रकाशित होने के बाद अदलखा ने अपने चमचे और दाहिने हाथ अमित आहूजा को भगा दिया है। हालांकि अदलखा के करीबी इसे ढोंग करार दे रहे हैं, उनका मानना है कि खुद को पाक साफ दिखाने के लिए अदलखा ने नाटक किया है, पर्दे के पीछे तो अमित आज भी उसके लिए मोटी कमाई वाले क्लाइंट फंसा कर ला रहा है और डील कर रहा है।