मच्छर मारने के लिए ऑल आउट लगाया जाता है न कि घर को आग

मच्छर मारने के लिए ऑल आउट लगाया जाता है न कि घर को आग
May 27 00:19 2025

मज़दूर मोर्चा ब्यूरो
पहलगाम मसले पर तीन चार दिन का अंतरराष्ट्रीय ड्रामा अब समाप्त हो चुका है, इस बीच में सवाल जो पहले खड़े थे वो आज भी खड़े हैं बल्कि अब सवाल बढ़ गए हैं।
22 अप्रैल को दुर्दांत घटना हुई, उसके क्या कारण थे, और भारत सरकार ने क्या र्कावाई की इस पर आज तक भारत सरकार के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और जम्मू कश्मीर के लेफ़्टीनेंट गर्वनर खामोश हैं, क्या यह उनका दायित्व नहीं था? क्या वो इस घटना के जिम्मेवार नहीं थे, आज तक उनसे सवाल नहीं किया गया।

बंबई में पाकिस्तानी आतंकवादी घुस गए थे, उस समय गृहमंत्री की लापरवाही मानी गई और उन्हें पद से हटा दिया गया था, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का इस्तीफा हो गया था। दस आतंकवादी घुसे थे उनमें से नौ मार गिराए गए थे, एक कसाब को जिंदा पकड़ कर उससे सब कुछ उगलवा लिया गया और भारत सरकार ने साबित कर दिया किया कौन कहां से आया था। मोदी जी उस वक्त आप गुजरात के मुख्यमंत्री थे, आप क्या कर रहे थे, आप उस संकट की घड़ी में ट्राइडेंट होटल के सामने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, आप भारत सरकार के लिए गालियां निकाल रहे थे, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए गालियां निकाल रहे थे, कि वो नाकारा हैं, निकम्मे हैं और आतंकवाद बढ़ रहा है। आप नाटक कर रहे थे कि आतंकवाद को समाप्त करना है तो भाजपा को वोट दीजिए। उसी वक्त भाजपा के पूजनीय नेता एलके आडवाणी साहब बंबई में आकर यही कुछ कर रहे थे। ऑपरेशन चल रहा था और उस वक्त भाजपा नेता ये काम कर रहे थे।

और आज भाजपाई कहते हैं सवाल मत पूछिए, कोई सवाल न करें आप, अब सवाल पूछने में दिक्कत है आपको! आप सवाल का जवाब तो दे नहीं सकते, सवाल पूछने वालों पर आप मुकदमे दायर करते हैं, उस पर यूएपीए लगा देते हैं। चलो इन बातों को छोड़ देते हैं, 22 अप्रैल को ये घटना होती है उस समय प्रधानमंत्री मोदी गए हुए थे सऊदी अरब, वहां मुकेश अंबानी की डील कराई और उसके बाद जल्दी से भाग कर आए।

लगा कि मोदी जी लौटे हैं तो कोई बड़ी कार्रवाई करेंगे लेकिन वह न तो पहलगाम की तरफ गए और न ही कोई कार्रवाई की, सीधे चुनावी रैली करने के लिए बिहार चले गए। वहां जाकर अंग्रेजी बोलते हैं। मोदी जी अमेरिका में तो हिंदी बोलते हैं लेकिन बिहार में अंग्रेजी बोलते हैं। और अमेरिका में जब पत्रकारों ने मोदी से सवाल पूछा तो ट्रंप ने कहा कि इसको तो समझ नहीं आता, मैं जवाब देता हूं, वहां तो आपकी हालत ये थी और बिहार में अंग्रेजी बोलते हैं। बिहार की चुनावी रैली के बाद मोदी जी बंबई चले गए, वहां नाचने गाने वालों के साथ नौ घंटे मौज मस्ती करते रहे, उनके नाच गाने के लिए मोदी को नौ घंटे की फुरसत थी। फिर वहां से केरल चले गए अपने मित्र गौतम अडाणी के लिए जो पोर्ट बनी है उसका समर्पण करने, उनके पास पहलगाम घटना के लिए फुरसत नहीं थी।

दो बार सर्वदलीय बैठकें हो गईं लेकिन उनमें शामिल होने की फुरसत मोदी के पास नहीं थी। फुरसत क्या होती, दरअसल उनमें सवालों का सामना करने की हिम्मत नहीं थी। छप्पन इंची प्रधानमंत्री मोदी देश को संबोधित नहीं कर पाए। मोदी को पता था कि सर्वदलीय बैठक में जो बीस पच्चीस लोग बैठे हैं उनके किसी सवाल का जवाब वो नहीं दे सकेंगे। इसके बावजूद विपक्ष ने उनसे कोई सवाल नहीं किया, पूरे देश ने एकजुटता दिखाई और बराबरी से लगे रहे। यहां ये बड़ा सवाल उठता है कि घुस के मारने का जुमला उछालने वाले मोदी ने छह-सात तारीख की रात में हमला किया, सवाल यह है कि मोदी-शाह ने इतने दिन क्यों लगाए? जघन्य वारदात हो गई, इतनी बड़ी दुर्घटना हो गई और मोदी का रवैया क्या है। वह पहले जाएंगे वाशिंगटन थाने दुनिया के थानेदार ट्रंप को बताने कि ये लोग पीट गए। ट्रंप ने कहा ओह कोई नहीं, देखते हैं करेंगे हल। उसने कह दिया कोई नहीं अभी बताता हूं। उधर उनको (पाकिस्तान) कह दिया कि देखो भाई इनके आदमी मरे हैं ये कुछ करेंगे थोड़ बहुत, दो चार फुलझडिय़ां ये छोड़ेंगे फिर तुम दो-चार छोड़ लेना। इसके बाद मैं मामला रफा-दफा करा दूंगा। ट्रंप से हरी झंडी मिली तब आपने अपना यह कार्यक्रम शुरू किया।

मोदी नेे 12 -14 गंवा दिन दिए, इस दौरान वहां पर जो आतंकवादी अड्डे थे, ये अड्डे कोई मोदी सरकार ने ढूंढे नही, सरकार खुद कह रही है कि ये अड्डे उसकी निगाह में लंबे समय से हैं। पुलवामा आतंकी हमले के बाद भी सरकार ने आतंकी अड्डे नष्ट किए थे, सर्जिकल स्ट्राइक की थी, उसके बाद और उससे पहले भी कई बार कर चुकी है। पहलगाम आतंकी घटना के बाद तो सरकार ने 12-14 दिन का समय दे दिया, इतने दिन तक वो आतंकी अड्डों में बैठे तो नहीं रहेंगे, वो जो बड़े-बड़े आतंकवादी थे इधर-उधर हो लिए, उनमें तो छोटे, मोटे बचे खुचे लोग ही मारे गए।

रही बात पाकिस्तान की सेना की, वह सेना अजीब किस्म की है। कहावत है कि किसी देश के पास सेना होती है, पाकिस्तान में सेना के पास देश है। भारत के पास एक सेना है पाकिस्तान में सेना के पास एक देश है, और उस देश की आम जनता सेना से बहुत दुखी है। मज़दूर मोर्चा संपादक को वहां दो बार जाने का मौका मिला, वहां लोगों से जो बाते हुईं उनका यह कहना था कि सानू तो खा गई फौज ते मुल्ले, जो बजट होता है उसका 50 प्रतिशत तो वहां की फौज खा जाती है और बाकी पचास प्रतिशत ऋण चुकाने में चला जाता है जो कर्जे ले रखे हैं। उसके बाद फिर कर्जे लेते हैं उसका कुछ दुअन्नी-चवन्नी जो है वो थोड़ा बहुत इधर उधर लगा देते हैं, बाकी आर्मी ने वहां की हालत खराब कर रखी है वहां की जनता फौज को ज्यादा पसंद नहीं करती। ये सिर्फ ड्रामा बना रखा है कि फौज हमारी है, लेकिन ऐसा कुछ है नहीं वहां। इसमें कोई दो राय नहीं है कि पाकिस्तान की फौज वहां जमकर शोषण कर रही है और आम जनता आर्मी से बहुत दुखी है।

इधर हमने क्या किया, हमने नाटक किए, आर्मी के चीफ, एयर फोर्स के चीफ, नेवी के चीफ सारे बुला लिए मीटिंग हो रहीं हैं और मोदी उनको नोट करा रहे हैं डायरी में नोट कर लो, अरे मोदी क्या नोट कराएंगे उनको, वो सारे पढ़े लिखे ट्रेंड प्रोफेशनल हैं बीस- तीस साल की नौकरियां उनकी हैं उन्हें पता है क्या करना है। मोदी जी केवल जनता के लिए एक आयटम पेश कर रहे हैं, एक वीडियो बना कर जिसमें मोदी जी बोल क्या रहे हैं यह नहीं दिखाया जा रहा, मूक वीडियो का नाटक। सारी बैठक का चार-चार, पांच-पांच कैमरों से नाटकनुमा वीडियो बना कर मोदी जनता को दिखा रहे हैं कि मैंने इनको आदेश दे दिया है, मैने इनको छूट दे दी है, क्या छूट दे दी है तुमने भाई? यह काम तो उसी दिन तुरंत हो सकता था। मैं इजराइल का समर्थक नहीं हूं, इजराइल कोई अच्छा देश नहीं है, वहां के जो तौर तरीके हैं वो अच्छे नहीं हैं लेकिन उन पर यदि हमला होता है तो चंद घंटों में ही वो इसका जवाब देते हैं।

मोदी को किसने रोका था, लेकिन वो तो पहले वाशिंगटन जाते हैं रिपोर्ट लिखाने, उन्होंने तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं की? जब आपको सारा कुछ पता था कि वहां पर आतंकी ठिकाने हैं तो आप क्या वहां अपने हथियार इक_े करने गए थे, क्या आप ट्रेनिंग पर गए थे, क्या आपको हवाई जहाज की जरूरत थी या आपके पास मिसाइल नहीं थे जो उन्हें लेने गए थे? सब कुछ आपके पास था लेकिन आपको तो नाटक ज्यादा करना था, काम नहीं करना था। तो आपने इसलिए इतना लंबा नाटक किया।

इसके बाद विपक्ष क्या मांग रहा है, बैठक बुला लो, संसद को बुला लो, सदन के अंदर आ जाओ, आप नहीं आ रहे। आप डरते हैं, आपमें सामना करने की हिम्मत नहीं है, आप केवल ड्रामेबाजी करना चाहते हैं। आपके आईटी सेल ने तो गजब ही ढा रखा है। विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने एक बड़ी स्पष्ट बात कही कि वो आतंकवादी हिंदू मुस्लिम करना चाहते थे वो देश के नागरिकों ने होने नहीं दिया। विक्रम मिस्त्री ने ये बात प्रेस ब्रीफिंग में कही लेकिन भाजपा सरकार यह नहीं देख रही कि उसकी पार्टी का आईटी सेल क्या कर रहा है, उसने हिंदू-मुस्लिम का दंगा भड़काने के लिए कोई कसर छोड़ी नहीं।

उन महिलाओं को नहीं छोड़ा जिनके पति मारे गए हैं, उनको कितना ज़लील किया गया है, मोदी जी आपको दिखाई नहीं देता। आम कोई आदमी जो सही बात कह रहा है उस पर तो आप सारे कानून लाद दोगे और आपके जो पालतू पिल्ले, दो दो रुपये पर मैसेज करने वाले आईटी ट्रोल, उन पर आपकी नजऱ नहीं जाती।

मोदी का जितना गोदी मीडिया था किसी ने तो फैसलाबाद पर कब्जा कर लिया, कराची ध्वस्त कर दिया, लाहौर पर कब्जा हो गया और सारा हमने जीत लिया हमारी आर्मी पहुंच गई, ये क्या बकवासबाजी थी, वो आपको नजर नहीं आ रहा था, वो अच्छी बातें हो रहीं थी? आप क्या कर रहे थे? लेकिन आपको तो प्रोपगेंडा चाहिए था। और प्रोपगेंडा के बाद यही आपके आईटी सेल वाले, गोदी मीडिया वाले इश्तेहार निकाल रहे हैं कि मोदी जी ने ये कर दिया, मोदी जी ने वो कर दिया। क्या कर दिया मोदी जी ने, निशाने पर क्या है बिहार का चुनाव, निशाने पर क्या है मुंबई का नगर निगम चुनाव। एक पोस्टर में तो मोदी को हेल्मेट बगल में दबा कर जाते हुए ऐसे दिखाया है जैसे वह खुद ही हवाई जहाज लेकर हमला करके आए हों।

जनता को वो पोस्टर दिखाए जा रहे हैं क्यों बेवकूफ बना रहे हैं, किसको बेवकूफ बना रहे हैं आप। विपक्ष को तो कहते हैं कि आप चुप रहो, आप एक हो जाओ, देश एक है और सबने एकता दिखाई भी किसी ने आपकी कारकर्दगी पर सवाल नहीं उठाया। लेकिन आपने क्या किया? आपने घटियातरीन राजनीति का प्रदर्शन किया। विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री के घर तक पहुंच गए आप के आईटी सेल वाले दो-दो कौड़ी के ट्रोल, उनकी पत्नी और परिवार के बारे में क्या-क्या बकवास नहीं करी इन लोगों ने। आपने क्या किया? आपने कुछ नहीं किया क्योंकि वो आपके पालतू पप्पू हैं। इस तरह आप देश को गुमराह कर रहे हैं।

22 की घटना के बाद करीब दो हफ़्ते बाद बुध पूर्णिमा के दिन कुछ बोलने की हिम्मत आपमें हो पाई। अब सवाल आता है कि यह युद्धविराम सीजफायर कैसे हो गया? युद्ध की तो घोषणा ही नहीं हुई। जब युद्ध की घोषणा ही नहीं हुई तो युद्धविराम कैसे हो गया, बड़ी अजीब बात है, और सीजफायर की घोषणा करने वाला कौन है, पाकिस्तान का डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन) साढ़े तीन बजे के करीब हमारे डीजीएमओ को फोन कर रहा है। लेफ्टीनेंट जनरल रैंक का होता है डीजीएमओ, इस स्तर के अधिकारियों के बीच होती हैं कहीं इस तरह की बातें। उसके बाद पोल खुलती है ट्रंप कहते हैं कि मैंने उनका सीज फायर करवा दिया है।

ट्रंप कौन होता है संप्रभु राष्ट्र के मामले में दखल देने वाला। मोदी तो ट्रंप के पास पहले भी गए थे, ट्रंप ने कह दिया कि तुम तो हजार-पंद्रह सौ साल से लड़ते रहते हो। ट्रंप हजार साल- पंद्रह सौ साल पहले की बात कर रहा है उसे यही नहीं पता कि हजार साल पहले क्या था और पंद्रह सौ साल पहले क्या था यानी नासमझी और अज्ञानतापूर्ण बातें करता है, वह दावा करता है कि उसने सीज फायर करा दिया। ट्रंप कौन होता है सीजफायर कराने वाला, उसका मतलब क्या है? हमारे गोदी मीडिया वाले तो कहीं फैसलाबाद पहुंच गए तो कहीं लाहौर कराची कब्जा लिया और पीओके लेकर आएंगे। पिछले जो चुनाव हुए हैं उसमें उत्तर प्रदेश के सीएम योगी बाबा ने कहा कि केंद्र में मोदी सरकार बनी तो छह महीने में पीओके ले आएंगे। पीओके में जाने की तो आपकी हिम्मत नहीं पड़ी एक कदम भी अंदर नहीं जा सके, केवल ड्रामेबाजी, नौटंकी के अलावा कोई काम आप नहीं कर रहे।

अब और खतरनाक बात आ गई है, जो ट्रंप पहले कहता था कि मैं कश्मीर पर मध्यस्थता करा दूूं, तब पूछ रहा था और मना कर दिया गया था कि नहीं। अब तो उसने साफ कह दिया कि मैं कश्मीर का मसला भी सुलझा दूंगा, साफ कहता है कि मैं कराऊंगा। मोदी जी की तरफ से तो कोई जवाब ही नहीं आ रहा, आपने उस पर कोई टिप्पणी करने तक की जरूरत नहीं समझी। आप ट्रंप के सामने बोल नहीं सकते क्योंकि आप लोगों की गर्दन फंसी हुई है वहां। आपका प्रिय परममित्र वहां मुकदमों में फंसा हुआ है। उनके जाल में फंसे होने की वजह से आपमें कोई हिम्मत नहीं है कि ट्रंप के सामने आप बोल भी जाएं।

ट्रंप ने अपने यहां बुलाकर जिस तरह आपको बेइज्ज़़त किया गया था, ऐसे बेइज़्ज़ती पहले कभी हुई नहीं थी। इस दौरान आपने जिस तरह की हरकतें कीं और जो प्रोपगेंडा किया, उससे आपने आयरन लेडी इंदिरा गांधी की याद दिला दी, उस शेरनी की याद दिला दी जिसने परवाह नहीं की अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन की, जिसने निक्सन से बात करने तक की जरूरत नहीं समझी। (बांग्लादेश युद्ध मे) सातवां बेड़ा आने दो सातवां बेड़ा भी देख लेंगे हम, आठवां भी भेज देना। उसने इतिहास बदल दिया, भूगोल बदल दिया।

मोदी जी तुम्हारे पास क्या है, तुम्हारे पल्ले क्या सौदा है। तुम कुछ करने लायक नहीं हो, तीन दिन में ही लंबे लेट गए। ट्रंप ने यही तो कहा था कि दो-चार दिन तुम फुलझड़ी छोड़ लेना, दो चार दिन वो फोड़ लेंगे, दोनों का बवाल कट जाएगा, कहानी ठीक हो जाएगी। तो ये सारा काम है आप लोगों का आप इसके दम पर कूद रहे हो।
एक और अंतरराष्ट्रीय बात गौर करने वाली है विश्वगुरु का डंका सारी दुनिया में बज रहा था, तो क्या आपके साथ कोई आकर खड़ा हुआ? पाकिस्तान के साथ तो तुर्किए का वारशिप आकर खड़ा हो गया कराची पोर्ट में, चाइना आकर खड़ा हो गया उनके लिए, अमेरिका ने दिखा ही दिया कि पाकिस्तान उसका पालतू पप्पू है।

तुम्हारा पूरा जोर लगाने के बावजूद उसने आईएमएफ के जरिए 8500 करोड़ रुपये दे दिए, इसके अलावा 1200 करोड़ रुपये अलग से देने का वादा उसने कर रखा है। विश्वगुरु आपने तो जोर लगा लिया लेकिन आपकी तो चली ही नहीं कहीं पर। उसने हम पर आतंकी हमला भी करवा दिया, लड़ाई भी लड़ ली। उनके आदमी मार आए, ठीक है लेकिन हमारे भी तो मर लिए, आपने हिसाब क्या किया, मोदी जी सीना तान कर कह रहे थे मैं उन्हें ढूंढ, ढूंढ कर मारूंगा, मैं उनको ऐसी इबरतनाक सजा दूंगा कि वो याद रखेंगे! किसको ढूंढ कर लाए आप, किसको आपने सजा दे दी, जितने उनके मर लिए उतने हमारे मर लिए। वो दावे करते हैं कि हमने भारत के इतने राफेल मार गिराए, आपने तो खंडन भी नहीं किया। सच्चे वो भी नहीं है, मैं यह नहीं कह रहा कि वो सच बोलते हैं लेकिन सच हमने भी नहीं बोला, हकीकत हम भी नहीं बता पा रहे।

ये तो अंतरराष्ट्रीय प्रेस है कहीं टेलीग्राफ, गार्डियन, कोई और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां बता रही हैं कि इस तरह से चाइना ने इसमें दखल दिया, इस तरह से एक अदृष्य जाल बनाया जिसमें हमारे राफेल फंसे, इस तरह की बातें वह कह रहे हैं और आप उनका खंडन भी नहीं कर पा रहे। ये सब क्या है, आपने क्या कमाया इसके अंदर, आपकी क्या उपलब्धि रही ऑपरेशन सिंदूर में, आखिर कब तक बेवकूफ बनाएंगे आप, जनता है सब जानती है, काठ की हांडी बहुत देर तक चूल्हे पर नहीं टिका करती। आपके झूठ का व्यापार बहुत चल चुका है, अब और चलने की गुुंजाइश कम से कम हमें तो नहीं नजर आती।

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Mazdoor Morcha
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