फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) एनआईटी दो में रहने वाली कोमल बजाज की उम्र तो महज 14 साल है लेकिन मानव सेवा का इतना जज़्बा कि छोटी सी उम्र में ही देहदान कर दिया। बीती 22 अक्तूबर को पिता कृष्णलाल बजाज के साथ एनआईटी तीन स्थित ईएसआई मेडिकल कॉलेज पहुुंची।
मेडिकल कॉलेज एनाटॉमी विभाग के हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉ. रतेश कुमार मुंजाल से मुलाकाल कर देहदान की इच्छा जताई। कक्षा नौ की छात्रा के प्रस्ताव से आश्चर्यचकित डॉ. मुुंजाल ने देहदान करने के निर्णय का कारण पूछा तो उसने अपने पिता को इसका प्रेरणास्रोत बताया। पिता कृष्णलाल बजाज ने बताया कि वह 2007 में ही दिल्ली एम्स में देहदान कर चुके हैं। वह 2003 से एनआईटी दो में ताऊ देवी लाल नाम से वृद्धाश्रम का संचालन कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि आश्रम में कई बेसहारा बुजुर्गों की मृत्यु के बाद उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कराया, हर बार अंतिम संस्कार करते हुए यही महसूस हुआ कि जीवन व्यर्थ गया देहदान कर किसी की अंधेरे जीवन में रौशनी लाई जा सकती है और आने वाली पीढिय़ों को स्वस्थ नीरोगी जीवन देने में इस शरीर का सदुपयोग हो सकता है, अंत में तो सारे अंग पंच तत्व में मिलने ही है। इसी विचार पर उन्होंने देहदान किया था। कोमल ने बताया कि पिता कृष्णलाल बजाज उसके लिए आदर्श हैं।
जब भी एम्स दिल्ली द्वारा उनको जारी किया गया देहदान का सर्टिफिकेट देखती तो मुझे भी देहदान की इच्छा होती। पिता जी ने यह इच्छा सुनी तो खुशी खुशी स्वीकर कर देहदान की इजाजत दे दी। वृद्धाश्रम में सभी बुजुर्गों की सेवा कर उन्हें खुश रखने वाली कोमल की इच्छा है कि मेडिकल कॉलेज में उसके शरीर का इस्तेमाल छात्रों को पढ़ाने के साथ ही किसी असाध्य बीमारी के इलाज का शोध करने में भी किया जाए ताकि आने भविष्य में उस बीमारी के मरीज़ो को इलाज मिल सके।