फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) दस करोड़ का कीला बेचकर विधानसभा का टिकट खरीदने वाले सतीश फागना को जनता ने विधायक क्या बनाया उसका बेटा तरुण फागना खुद को जमीन का खुदा समझने लगा है। नवरात्रि जैसे धार्मिक पर्व पर उसके पिता के समर्थक पूजा के लिए किसे आमंत्रित करें और किसका दो रुपल्ली की चुनरी-पगड़ी पहना कर स्वागत करें, तरुण फागना यह तय करना चाहता है। यहां तक पूर्व पार्षद चाचा कविंद्र चौधरी को भी साइडलाइन लगा कर फीता काटने, सम्मानित होने खुद पहुंच रहा है।
पाठकों को याद दिला दें कि यह वही तरुण चौधरी है जिसके बारे में चर्चा उठी थी कि उसने अपने फार्म हाउस में फांसी लगा कर जान देने का प्रयास किया, समय रहते उसके गनर ने देख लिया और फंदे पर से उतार कर गंभीर हालत में उसे एशियन हास्पिटल में भर्ती कराया था, हालांकि विधायक सतीश फागना ने इन चर्चाओं का खंडन किया था। फागना परिवार के जानकार बताते हैं कि कविंद्र चौधरी और उनकी पार्षद पत्नी के कारण समाज में फागना परिवार की राजनीतिक पहचान हुआ करती थी। सतीश फागना की पहचान भी कविंद्र के भाई के रूप में ही ज्यादा थी, जनता से सीधा संबंध बहुत कम था। पिछले विधानसभा चुनाव में सतीश ने दस करोड़ की जमीन के बदले चाचा गूजर से टिकट हासिल किया, और चुनाव आयोग की कृपा से चुनाव जीत भी गया। सतीश के जीतते ही अभी तक साधारण जीवन जी रहा बेटा तरुण फागना बिना पंखों के हवा में उडऩे लगा। टोरा बनाने के लिए पापा से अपने लिए भी गनर का इंतजाम करा लिया और खुद को विधायक से कम नहीं समझता। सत्ता का खून मुंह में लगा तो सतीश भी वंशवाद पर उतर आया, भाई कविंद्र फागना को धीरे धीरे खुड्डेलाइन लगा कर बेटे तरुण का प्रमोशन चालू कर दिया।
जो तरुण अपने सोशल मीडिया पर कभी पिता सतीश फागना की फोटो नहीं लगाता था विधायक बनते ही खुद को विधायक पुत्र बताने के लिए आईटी सेल की तरह काम करने लगा। सतीश भी अब अधिकतर विकास कार्यों में भाई कविंद्र की जगह बेटे तरुण को ही ले जाते। यहां तक कि छोटे मोटे स्वागत-सम्मान कार्यक्रमों, दुकान के उद्घाटन, मांगलिक आदि सामाजिक कार्यक्रमों में तरुण ही जाता है। बताया जा रहा है कि अब वह आयोजकों के यहां आने वाले मेहमान भी खुद तय करने लगा है। यदि आयोजक उसकी बात नहीं माने तो ऐसी धमकियां देता है जिनका अर्थ होता है कि तुम्हारी ऐसी तैसी कर दी जाएगी। ऐसा ही एक ऑडियो वायरल हो रहा है, इसमें खुद को तरुण फागना बताने वाला व्यक्ति और उसके समर्थक के बीच बातचीत है। यह समर्थक पूर्व मंत्री शिवचरण लाल शर्मा परिवार का भी करीबी रहा है। दरअसल, इस समर्थक ने नवरात्रि में एक पूजा व सहभोज कार्यक्रम का आयोजन किया था। कार्यक्रम में खुद को विधायक समझने वाला तरुण फागना भी गया था, आयोजक ने यथा योग्य सम्मान किया और भोजन कराया।
तरुण के लौटने के बाद पूर्व विधायक नीरज शर्मा भी पारिवारिक सदस्य के रूप में पहुंचे। आयोजक ने भोजन कराने के साथ ही माता की चुनरी ओढ़ा कर सम्मानित किया। यह बात तरुण को पता चल गई और उसने आयोजक को फोन कर बुरी तरह से धमकाया। तरुण और आयोजक के बीच हुई बातचीत कुछ इस तरह है। कॉलर- मैं कह रहा हूं कि कल चुनरी शॉल मुंड मुंडासा मेरे लिए नहीं था क्या वहां पर, चुनरी मेरे लिए नहीं थी, क्या मंगाई नहीं थी मेरे लिए? जवाब देने वाला पहचान नहीं पाता तो कॉलर कहता है, तरुण फागना बोल रहा हूं। जवाब देने वाला कहता है किसको चुनरी पहनाया हूं, चुनरी पगड़ी किसी को नहीं पहनाया हूं। कॉलर- गले तो ऐसे पड़ रहा है खास समधी आया हो। तुम्हारे लिए कोई कसर छोड़ी है, ये हरकतें करना छोड़ दो मैं बता रहा हूं मैं अपनी पे आ गया तुम्हें फिर पता लगेगी, मेरी तुम्हें पहले भी पता है। जवाब देने वाला पूछता है क्या हो क्या गया है, मैंने किसको क्या कर दिया है बताओगे तभी तो। कॉलर- क्यों?… नहीं करा तुमने, किसको चुनरी पहनाई तुमने, किसको पगड़ी पहनाई, कल गले किसको लग रहे थे मेरे जाने के बाद। जवाब देने वाला- फोटो है। कॉलर- सब चीज है मेरे पास। जवाब देने वाला- तब दिखाओ मेरे को कौन है वो आदमी बताओ। कॉलर- आगे दिखाएंगे, मेरे जाने के बाद कौन आया था।
जवाब देने वाला- आपके जाने के बाद परमार साहब आए थे स्कूल वाले, उसके बाद जयवीर आया था उसके बाद उसके बाद भारद्वाज आया था और कोई नहीं आया, वो पंडित आया था दिन में पंडित शिव चरण लाल का बेटा (पूर्व विधायक नीरज)। कॉलर बहुत बढिय़ा। इस पर जवाब देने वाला बोला अरे यार एक बात बताओ मैं उनके घर में खाया हुआ है, उनके पिता जी के साथ हमारा पुराना… कॉलर- तो उन्हीं के घर में खाना फिर आज के बाद। बताया जा रहा है पूर्वांचली समाज के संभ्रांत व्यक्तियों में शामिल उस व्यक्ति ने इसके बाद तरुण को कई बार फोन कर सफाई देने का प्रयास किया लेकिन सत्ता के घमंड में चूर विधायक पुत्र ने उसका फोन रिसीव नहीं कर अपमानित महसूस कराया।