लेकवुड सिटी : रसूखदारों ने डेढ़ लाख वर्गगज वाले प्लॉट आठ हजार में खरीदे

लेकवुड सिटी : रसूखदारों ने डेढ़ लाख वर्गगज वाले प्लॉट आठ हजार में खरीदे
February 25 04:29 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) पीएलपीए के तहत संरक्षित वन क्षेत्र में होने के कारण लगभग तीन दशक से अटकी पड़ी लेकवुड सिटी को भाजपा की डबल इंजन सरकारों ने क्लीनचिट दी। यह क्लीनचिट् मुफ्त में नहीं मिली बल्कि इसके एवज में भाजपा नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बिल्डर के नो प्रॉफिट नो लॉस कैटेगरी के 171 प्लॉटों की बंदरबांट हुई। इन लोगों ने ये प्लॉट महज 8100 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से खरीदे और आनन-फानन 90 हजार रुपये प्रति वर्ग गज बेच कर करोड़ों रुपये बनाए। क्योंकि अधिकतर खरीदार यानी लाभार्थी सत्तापक्ष के नेता और प्रशासनिक अधिकारी या उनके रिश्तेदार थे तो टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, हूडा, डीटीपी के अधिकारी भी नियम कानून ताक पर रख कर खेल में शामिल रहे।

जानकारों के अनुसार नेहरू प्लेस दिल्ली इरोज सिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से 1995 में अनंगपुर-लक्कड़पुर में करीब 120 एकड़ में लेकवुड सिटी के नाम से हाईप्रोफाइल रिहायशी कॉलोनी बनाने का लाइसेंस हासिल किया था। क्योंकि अधिकतर जमीन पीएलपीए संरक्षित वन क्षेत्र और पुरातात्विक धरोहर सूरजकुंड के दायरे में आ रही थी तो यहां निर्माण कार्य की अनुमति नहीं मिली। बावजूद इसके 2000 के बाद इसमें निर्माण कार्य शुरू हो गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी ने कांत एंक्लेव, लेकवुड सिटी सहित कई कॉलोनियों को पीएलपीए के उल्लंघन के कारण तोडऩे की सिफारिश की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कांत एंक्लेव को तोड़ भी दिया गया था और लेकवुड सिटी पर तोडफ़ोड़ की कार्रवाई के बादल मंडरा रहे थे। जानकारों के अनुसार अरबों रुपये कीमत की कॉलोनी और प्रॉपर्टी बचाने के लिए डेवलपर्स ने डबल इंजन सत्ता की शरण ली। चर्चा है कि केंद्रीय मंत्री गूजर को एक स्कूल की जमीन गिफ्ट किए जाने के एवज में कार्रवाई नहीं किए जाने पर सौदा पटा। हालांकि मंत्री ने लेकवुड सिटी में खुद स्कूल नहीं खोला लेकिन उसकी जमीन की कीमत वसूली ली, वर्तमान में यहां श्री जी इंटरनेशनल स्कूल संचालित है। अब मंत्री जी ने मलाई खाई तो उनके लगुए भगुए और प्रशासनिक अधिकारी कैसे पीछे रहते। इन सबको फायदा पहुंचाने के लिए कॉलोनी में नो प्रॉफिट-नो लॉस (एनपीएनएल) कैटेगरी के तहत रखे गए 171 प्लॉटों में जमकर खेल हुआ।

एनपीएनएल प्लॉटों के दाम 8100 रुपये प्रति वर्ग गज निर्धारित किए गए जबकि वर्तमान में वहां की कीमत डेढ़ लाख रुपये प्रति वर्ग गज चल रही है। एनपीएनएल कैटगिरी प्लॉट नियमानुसार केवल उन्हीं लोगों को आवंटित किए जा सकते हैं जिनके स्वयं या परिवार के नाम हरियाणा के किसी शहर या चंडीगढ़ में डीटीपी द्वारा जारी लाइसेंस वाली किसी निजी कॉलोनी, या हूडा के किसी सेक्टर में, या नगर में कोई प्लॉट न हो, यानी जिस परिवार के पास कहीं भी प्लॉट न हो। एक आवेदक को केवल एक ही प्लॉट दिया जाएगा।

प्लॉटों की बिक्री की सार्वजनिक जानकारी देने के लिए राष्ट्रीय स्तर के हिंदी और अंग्रेजी अखबारों में दो बार ज्ञापन दिया जाएगा। इसके बाद कमेटी द्वारा ड्रा के जरिए लाभार्थी का चयन किया जाना होता है। प्लॉटों के अलॉटमेंट में यहीं खेल किया गया और नियमों को ताक पर रख कर सत्तापक्ष, प्रशासनिक अधिकारियों और उनके लगुओं भगुओं के बीच 171 प्लॉटों की बंदरबांट हो गई। अक्तूबर 2024 में जिलाधीश, एसडीएम, सीटीपी आदि की कमेटी बनाकर इन प्लॉटों का ड्रॉ निकाला गया था। मंत्री गूजर के खास ग्रीन फील्ड कॉलोनी आरडब्ल्यूए के कथित प्रधान बिंदे भड़ाना के बेटे और बहू के नाम प्लॉट आवंटित कर दिया गया। इतना ही नहीं एक ही परिवार के दो से तीन सदस्यों को अलग अलग प्लॉट आवंटित किए गए। मिट्टी के दाम प्लॉट खरीदने वालों में स्मार्ट सिटी के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर विकास मोहन दहिया सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि अनेक प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों के नाम प्लॉट खरीदे और नब्बे हजार रुपये वर्ग गज की दर से बेच कर मोटा पैसा बनाया।

नियमों को ताक पर रख कर भाजपा के वीरेन्द्र भड़ाना उर्फ बिंदे भड़ाना के परिवार के प्रवेश भड़ाना उनकी पत्नी नेहा भड़ाना, बेटा विवेक भड़ाना, स्वाती भड़ाना को करोड़ों रुपये कीमत के प्लॉट माटी मोल दे दिए गए। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता उदयभान का आरोप है कि अंकुर भड़ाना तो चयन कमेटी के सदस्य थे और उन्होंने खुद ही अपने नाम की पर्ची निकाल कर प्लॉट हड़प लिया।

कांग्रेसी नेता विवेक प्रताप ने इस बंदरबांट का खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार एक तरफ गरीबों के हितों की बात करती है, जबकि दूसरी तरफ 300 करोड़ का ड्रॉ घोटाला सरकार की नीयत पर सवालिया निशान लगा रहा है। वह कहते हैं कि सूची में कोई अलॉटी ऐसा नहीं है, जो पहले से ही करोड़पति न हो। दूसरा सवाल यह भी कि एक व्यक्ति के घर में चार-चार प्लॉट आखिर कैसे अलॉट किए गए। ड्रॉ की मॉनिटरिंग करने वाली कमेटी आखिर क्या देख रही थी और कैसे उन्होंने भी अपने रिश्तेदारों के नाम प्लाट करा लिए? यदि सीएम नायब सिंह सैनी सचमुच ईमानदार हैं तो उन्हें मामले की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच करानी चाहिए और जो भी अधिकारी, नेता, भूमाफिया इसमें शामिल हों उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें, अन्यथा यह मानना गलत नहीं होगा कि यह घोटाला उनकी सरकार की सहमति से हुआ है। प्लॉट के लिए आवेदन करने वालों में से एक गौरव बैसला ने इसकी शिकायत सीएम विंडो पर की लेकिन कार्रवाई नहीं हुई, अब वह हाईकोर्ट में जनहित याचिका डालने की तैयारी कर रहे हैं।

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Mazdoor Morcha
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