फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) एफएमडीए में हाल ही में ठेके पर जूनियर इंजीनियर लगा नरेश रावत खुद को सरकारी कर्मचारी से ज्यादा भाजपा कार्यकर्ता और पदाधिकारी की तरह प्रचारित कर रहा है। भाजपा पदाधिकारी होने की धौंस दिखा कर अधिकारियों पर रौब गांठने वाले नरेश को विधानसभा चुनाव में यदि निर्वाचन ड्यूटी पर लगाया जाता है तो यह कौन सुनिश्चित करेगा कि वह सरकारी अधिकारी के बजाय भाजपा एजेंट की तरह काम न करे।
लोक सेवक यानी सरकारी कर्मचारी सार्वजनिक तौर पर खास कर ड्यूटी के दौरान किसी भी राजनीतिक दल से अपनी प्रतिबद्धता नहीं दिखा सकता है। यह नियम इसलिए बनाया गया है कि प्रशासन निष्पक्ष रूप से काम करे न कि किसी राजनीतिक दल की नीतियों के अनुसार। हालांकि, सभी कर्मचारी किसी न किसी राजनीतिक दल के प्रति आस्था रखते हैं लेकिन 2014 से पहले लोक सेवक के रूप में उनके आचरण में इस तरह की कोई प्रतिबद्धता प्रदर्शित नहीं होती थी।
2014 में केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकारें आईं तो मोदी-शाह से लेकर खट्टर की सरकारों ने न्यायपालिका से लेकर कार्यपालिका के निचले स्तर तक संघ स्वयंसेवक, भाजपा कार्यकर्ता व संघी मानसिकता वाले लोगों को भरना शुरू कर दिया गया। सरकारी पदों पर नौकरियां देने में आरक्षण की फांस को हटाते हुए ठेके पर भर्तियां शुरू कर दी गईं।
डबल इंजन सरकारों मेें जम कर सरकारी नौकरियों में ठेके पर संघी-भाजपाई भरे गए। हत्या के प्रयास का मुकदमा होने के बावजूद पलवल के भाजपा किसान मोर्चा जिला महामंत्री नरेश रावत को एचकेआरएन के तहत भ्रष्टाचारियों के लिए मुफीद एफएमडीए में जूनियर इंजीनियर बना दिया गया। इधर उसे इंजीनियर बनाया गया इधर भाजपा ने उसे उत्तर रेलवे की कमेटी और खेल मंत्रालय भारत सरकार का सदस्य भी बना दिया। कहने को तो वो जूनियर इंजीनियर है लेकिन खुद को भारत सरकार का प्रतिनिधि बता कर वह एफएमडीए के अधिकारियों पर रौब गांठता है और ड्यूटी करने के बजाय वह भाजपा के विभिन्न संगठनों में शामिल होने निकल जाता है। अब विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही वह सरकारी खर्च पर भाजपा का प्रचार करता घूम रहा है।
जानकारों को आशंका है कि सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद नरेश रावत जिस तरह भाजपा के प्रचार में लगा हुआ है वह चुनाव को पूरी तरह से प्रभावित करेगा। यदि उसे निर्वाचन ड्यूटी पर लगाया गया तो अपने पोलिंग बूथ पर उसके द्वारा पक्षपात किया जाना और मतदाताओं को भाजपा के पक्ष मेंं वरगलाना सुनिश्चित है। भाजपा के एजेंट के रूप में काम करते हुए सारे उल्टे-पुल्टे काम करेगा। जिसमें पार्टी विरोधी वोटरों को हतोत्साहित करने, उनका वोट नहीं पडऩे देने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना सकता है। अब जिला निर्वाचन अधिकारी विक्रम सिंह को सुनिश्चित करना चाहिए कि नरेश रावत और उसके जैसे अन्य सरकारी कर्मचारी जो किसी राजनीतिक दल से ताल्लुक रखते हैं वे चुनाव के दौरान कोई गलत हरकत न कर सकें।